Hindu Muslim Sex Story – मुस्लिम लंड लेकर पति को भूली पड़ोसन भाभी
आदाब मेरे प्यारे सभी पाठकों को, आप सभी का स्वागत है आपके अपने फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com के Hindu Muslim Sex Stories के नए एपिसोड में. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर रफीक जी द्वारा भेजी गयी Hindu Muslim Sex Story लेकर. दोस्तों मेरी यह Hindu muslim sex kahani मेरे घर के जस्ट पास वाली खुबसुरत सुनीता भाभी के साथ की है.
सुनीता भाभी ने जब से यहाँ पर किराये पर मकान लिया है तब से मेरे अंदर उनको चोदने की भावना तो जग चुकी थी. क्योंकि उसके पतिदेव दिन में बाहर मजदूरी करने के लिए जाते है. और यहाँ दिन में सुनीता भाभी एकदम अकेली ही रहती है. इसलिए आपको सच कहूँ तो मैं भाभी के चक्कर में स्कूल जाना ही छोड़ दिया. क्योंकि अब जब से वो इधर आ बसी है तब से में तो बस उन्हें ही मन में याद करके अपना लंड हिला लेता हूँ.
चूँकि मैं इस पोर्टल का बहुत बड़ा फैन हूँ इसलिए लोगों द्वारा भेजी गयी कहानियां मेरे को बहुत पसंद आई. और इसलिए मैंने भी सोचा की मैं भी आपके साथ अपनी सुनीता भाभी की चूत चुदाई की कहानी सांझा करूँ. ताकि आप भी मेरी कहानी को पढ़कर अपने लंड को आराम से हिला सको. इसलिए दोस्तों अब मैं आपके साथ मेरी कहानी सांझा कर रहा हूँ. अगर मजा आये तो मुझे कमेंट बॉक्स में जरूर बता देना.
दरअसल दोस्तों मेरा नाम रफीक है और मेरी उम्र फ़िलहाल 18 बरस की हो गयी है. तथा मुझे चुदाई का नशा चढ़े हुए तो आपको बताऊ करीब 3 बरस हो चले है. जब से क्लास में मैंने नेहा को देखा है तब से मैं इतने दिन उसे चोदने की फिराक में था. लेकिन ऐसा सम्भव नही हो पाया. इसी बीच अभी पिछले दिनों हमारे घर के पास में सुनीता भाभी और उसके पति आकर बस गये.
वो बिहार से आए थे इधर नासिक में नौकरी करने के लिए. इसलिए अभी उनके विवाह को भी करीब 2 बरस ही हुए थे. या ऐसा समझ लो की वो अभी भी नवविवाहित जोड़ा ही थे. क्योंकि मैं जब भी उनके पति विकास को देखता था तो यकीन नही होता था की कोई सुंदर लड़की ऐसे लडके से भी विवाह कर सकती है क्या?
मैं ऐसा इसलिए कह रहा हूँ क्योंकि विकास एक दारुबाज आदमी था और उसकी उम्र भी सुनीता भाभी के मुकाबले 10 बरस ज्यादा ही होगी. लेकिन वो कहावत है ना – लंगूर के हाथ अंगूर लग जाना. वो यहाँ पर एकदम फिट बैठ रही थी. क्योंकि सुनीता भाभी जब साड़ी में रहती थी तो उसका वो स्लिम बदन मेरे लंड को उफान देने के लिए काफी था.
और जब भी मैं बाहर निकलकर देखता था तो सुनीता भाभी दिख जाने पर मेरे को घर के बाथरूम में जाकर एक बार मूठ जरूर मारकर आना पड़ता था. और फिर मैं हमेशा यहीं सोचने लग गया की अब इसे कैसे पटाकर चोदा जाए. इसलिए अब मैं नोटिस करने लग गया की सुनीता भाभी कब छत पर आती है और कब घर से बाहर निकलती है.
इसलिए मुझे पता चला की वो रोज शाम को सब्जी लेने के लिए 5 बजे निकलती है. इसी का ध्यान रखकर अब मैं भी अगले दिन सुनीता भाभी के पीछे-पीछे ही चलता रहा. और देख रहा था उनकी वो गांड आए…हाय…. जब वो मटक कर चलती थी तो क्या खूब लगती थी.
इसलिए मेरी हिम्मत भी नही हो रही थी उससे बात करने की. लेकिन बाद में दिल पर पत्थर रखकर मैंने ही रस्ते में सुनीता भाभी से पूछ लिया- आप इधर के ही रहने वाले हो ना?
सुनीता भाभी- आप कौन?
मैं बोला- मैं आपको रोज देखता हूँ शायद आप मेरे पास वाले घर में ही रहने लगे हो.
भाभी- मैंने तो आपको पहले कभी नही देखा. आप किनके है.
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मैं- मैं आपके पास वाले मकान में रहता हूँ. अभी हम वापस जायेंगे तो आपको पता लग जाएगा.
इसके बाद हम रस्ते में खूब बातें करते-करते घर पहुंचे और फिर मैंने बताया की भाभीजी मैं आपके पास वाले इसी घर में रहता हूँ. अगर आपको किसी चीज की जरूरत महसूस हो तो प्लीज मेरे को बेझिझक बता सकती हो.
इतना सुनकर भाभी ने मेरे को एक प्यारी सी स्माइल दे डाली. और उनकी वो स्माइल हाय अल्लाह…. मैं मर ही जावा…. मेरे लिए किसी चुदाई के फोर्मुला से कम नही थी. क्योंकि उनके वो गुलाबी होठ और उनकी वो प्यारी स्माइल… दोनों सूट कर रहे थे.
इतना कहकर वो भी अपने घर पर चली गयी तथा मैं भी अपने घर आ गया. फिर इसके बाद मेरे को अगले दिन का इंतजार होने लगा. और फिर से मैं भाभी के साथ ही मार्केट जाने लग गया. ऐसा करते-करते मैं उनके बारें में सबकुछ जान चूका था. और फिर मेरे को पता भी लग चूका था की उसका दारुबाज पति किसी काम का नही है.
क्योंकि अब वो भी मेरे को अपना दोस्त समझने लगी थी. इसलिए मेरे को जो भी बात होती थी वो बता देती थी. तब जाकर मेरे को पता चला की अब ये सही मौका है भाभी के घर जाने का. इसलिए मैंने बोला- भाभी कभी अपने घर भी बुलाया करो हमें. या फिर आप आ जाया करो.
सुनीता भाभी बोली- आप ही आ जाया करो जब आपको बातें करनी हो. क्योंकि मुझे किसी के घर जाना पसंद नही है… प्लीज आप बुरा मत मानना लेकिन सच में मेरे को किसी के घर जाना इतना पसंद नही है.
मैं बोला- और अगर आप मेरे को पसंद हो तो भी नही आ सकती मेरे घर?
सुनीता भाभी- क्या मतलब?
मैं- अरे भाभी मैं तो मजाक कर रहा हूँ, आप ऐसे चौंको मत. वैसे आप बहुत खुबसुरत हो… मानना पड़ेगा… भगवान् ने आपको बड़ी फुर्सत से बनाया होगा.
मेरे मुंह से ये शब्द सुनकर सुनीता भाभी अब अपनी बालों की लटी को सम्भालने में लग गयी. और फिर मन ही मन में मुस्कुराने में लग गयी. क्योंकि मैं एक जवान लड़का उनकी ऐसी तारीफ़ जो कर रहा था. इसके बाद मैंने निडर होकर उनसे उनका मोबाइल नंबर मांग लिया. तथा भाभी ने भी मेरी फीलिंग्स को समझते हुए अपना मोबाइल नंबर दे दिया.
जिसके बाद से शुरू हुई हमारी चुदाई की असली कहानी. फिर दोस्तों मैं और सुनीता भाभी लगभग अगले 5-7 दिन फोन पर सारे दिन बातें करने में लग गये. और इतने में ही मेरे को पता चला की सुनीता भाभी में तो सेक्स मेरे से भी ज्यादा भरा पड़ा है. तो मैंने उनको बोला की – भाभी आपकी इजाजत हो तो आप मेरे को घर बुलाओ ताकि हम प्यार कर सकें.
भाभी- अगर आप घर पर आओगे और कोई देख लेगा तो?
मैं- उसकी चिंता मत करो आप, अब दुनियादारी ऐसे ही चलती है…. प्लीज आप मेरे को बुलाओ ना.
मैं भाभी के सामने बच्चों की तरह जिद्द करने में लग गया. इसके बाद आख़िरकार भाभी मान ही गयी और फिर मेरे को उसी शाम 4 बजे अपने घर पर बुला ली. तथा मैं भी वैसे तो गया तो था डरता हुआ ही. क्योंकि मेरे को भी पहली बार चुदाई का आंनद जो लेना था. इसलिए मेरे अंदर एक अजीब सी उर्जा महसूस हो रही थी.
और फिर सुनीता भाभी के घर जाकर मैंने देखा तो पाया की, भाभी पहले से ही Deo वगेरह लगाकर एकदम तैयार हो रखी थी. मानों की उसकी आज सुहागरात हो. इसलिए अब मेरे को भी उनका ये रूप देखकर रुका नही गया. और मैंने जाते ही भाभी को एकदम से अपनी गोद में भर लिया. और भाभी हंसती-हंसती मेरी गोद में आ समाई.
फिर मुझे भाभी का ये स्लिम बदन महसूस हुआ. और अब मेरा लंड मानों उनको छूते ही खड़ा हो चला था. इसलिए दोस्तों अब भाभी भी मेरे को पता तो था ही वो फ़ोन पर सेक्स के लिए कैसे तड़प रही थी. इसलिए अब वो मेरे को किस करने में लग गयी. और मैं भी सामने से कभी उनके गालों पर तो कभी उनकी गोरी सी गर्दन पर अपनी तरफ से पप्पी दिए जा रहा था.
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और अब मेरे को उनके बदन की खुशबु महसूस हुई तो अब मेरे से रहा नही जा रहा था. इसलिए अब मैंने भाभी से बोला- प्लीज आप अपनी साड़ी उतार दो, मेरे से रहा नही जा रहा है.
भाभी बोली- रहा तो मेरे से भी नही जा रहा है, इसलिए आप भी प्लीज अपनी लोअर – टीशर्ट को उतार दीजिए.
अब हम दोनों ही अपने-अपने कपड़े उतारने में लग गये. जहाँ मैं तो अपना लंड तक भाभी को दिखा चूका था. लेकिन भाभी अभी भी अपनी पेंटी में ही थी. उनकी वो सफेद रंग की पेंटी. आए… हाय….. ऊपर से उनकी चूत के ऊपर से चुदाई करवाने का वो गीला पानी साफ – साफ़ झलक रहा था. इसलिए अब मैं सोचा की जल्दी से भाभी की पेंटी उतार दू.
लेकिन भाभी के मन में कुछ और ही था. क्योंकि उन्होंने कभी मुस्लिम लंड नही देखा था. इसलिए मेरे लंड को देखकर बोली- आपकी चमड़ी काट दी जाती है ना?
मैं- हाँ, ये ठीक रहती है, इससे कभी इन्फेक्शन नही फैलता. और चुदाई भी दमदार होती है.
भाभी- दमदार चुदाई का तो अभी पता चल जाएगा, लेकिन आपका लंड दिखने में तो काफी दमदार है. ये तो मानना पड़ेगा.
मैं- आपके पति का नही है क्या ऐसा?
भाभी- उसका तो आपके लंड के सामने आधा भी नही है.
इतना कहकर अब भाभी मेरे लंड को हाथ में लेकर सहलाने में लग गयी. और अब वो बैठी हुई थी तथा मैं खड़ा हुआ था. इसलिए अब मुझे उनका वो लंड चुसना इतना भा रहा था की मेरा लंड करीब 5 मिनट तक चुस्वाने के बाद भाभी के मुंह में ही माल छोड़ दिया.
और कमाल की बात ये की भाभी मेरे माल को अपने अंदर पी गयी. क्योंकि वो चुदाई की काफी प्यासी थी इसलिए अब वो कहाँ रुकने वाली थी वो लगातार मेरे लंड को किसी कुल्फी की तरह चूस रही थी. और इधर मैं आह….आः…..अहहहाहः….अहह्हहहह्हा…. किए जा रहा था. फिर करीब अगले 5 मिनट और लंड चूसने के बाद मेरा लंड खड़ा हो गया. और अब पूरा 7 इंच का हो चला था.
तथा अब लंड पूरा चूत में जाने के लिए तैयार था. लेकिन मैं कहाँ भाभी को इतनी जल्दी चोदने वाला था? मुझे भी अब उनकी चूत जो चाटनी थी जैसे उन्होंने मेरे लंड को चूसा ठीक वैसे ही. इसलिए अब मैंने भाभी को खटिया पर लिटा दिया और अब मैं उनकी वो सफेद रंग वाली चड्डी उतारने में लग गया. तथा भाभी भी अब खुद गांड उठाकर अपनी चड्डी मेरे से खुलवा रही थी.
भाभी की चड्डी खोलने के बाद मैंने देखा की उनकी चूत एकदम रसीली थी और काफी पानी फेंक रही थी. तो मैं एक ऊँगली लगाया और मैंने महसूस किया की मेरी ऊँगली भी भाभी की चूत पर नही टिक पा रही थी. वो भी एकदम से फिसले जा रही थी. और ऊँगली लगाने से ही भाभी की आह….आह…आह… निकल पड़ी.
इतना सब देखकर अब मेरा मन सुनीता भाभी की ये रसीली चूत चाटने का हो गया. तो मैंने अब अपना मुंह भाभी की चूत पर रख दिया और अब मैं अपनी जीभ से लगातार उनकी चूत का पानी चाटे जा रहा था. और वो अब मेरे इसी अंदाज से आह….आहाह्हा…अहहः…. रफीक…. मत तडपाओ…. चोद लो अपनी भाभी को…. वरना फिर से नहीं बुलाऊंगी कभी…. प्लीज….प्लीज.
उनकी ये बातें सुनकर मैंने उनकी चूत को चाटना छोड़ा और अब मैंने अपना लंड भाभी की चूत के सामने ले आया. जिसके बाद भाभी ने खुद से ही मेरे लंड को अपनी चूत के सामने फिट कर डाला. और बोली- अब जाने दो रफीक जी इसे अंदर प्लीज…. प्लीज…प्लीज…प्लीज.
और भाभी का ये अंदाज देखकर अब मैंने भी एक जोर का झटका दिया. तथा अब मेरा लंड भाभी की चूत में जा समाया. और जैसे ही मेरा पूरा लंड चला गया तो वो चिल्लाने में लग गयी. और आऐईईई……ईईईईई…….ऊऊऊऊउ……….आआआआआ………..ईईईए……..ईईईई…. करने में लग गयी.
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मैं भी कौनसा कम था मैंने भी अब भाभी के होठों पर अपने होठ रख दिए ताकि बाहर कोई आवाज न जा पाए. और पीछे से मैंने लगातार भाभी की चूत में धक्के देने में लग गया. इसके बाद मैं उनके बूब्स को चूसने लगा गया, मैं उनके दर्द को कम होने का इंतजार कर रहा था. जैसे ही उनका दर्द कम हुआ तो मैंने एक और जोर झटका मारा और पूरा लंड उनकी चूत में डाल दिया.
और इस बार भाभी बोली- अब मारो धक्के जितने चाहो उतने अब मेरी चूत खुल चुकी है.
भाभी के मुंह से ये बात सुनकर अब मेरे लंड में भी काफी जोश आ गया. और अब मैं सुनीता भाभी की जाँघों को अपने हाथों से जकड़कर जोर-जोर से झटके देने में लग गया. तथा करीब आधे घंटे तक इसी अंदाज में सुनीता भाभी की चुदाई करता रहा. और मेरी चुदाई से वो करीब 3 बार झड़ चुकी थी. तथा फिर मेरा अब लंड झड़ने को आया तो अब सुनीता भाभी ने मेरे को जकड लिया और बोली- जितना दम से चोदना है चोद लो अपनी भाभी को.
आप अगर ऐसे ही मेरी चुदाई करोगे तो मैं आपको रोज चुदवाने के लिए बुलाऊंगी. और फिर मैं अपने झटकों की स्पीड तेज कर दिया तथा आह..आहाह्हा…भाभी….आहाहहः….अहहहह्ह…. करते हुए उनकी चूत में ही झड़ गया. तथा फिर करीब 5 मिनट तक उनके ऊपर ही लेटा रहा. करीब 1.5 घंटे तक चुदाई वाला प्रोग्राम चलने के बाद अब 5 बज चुके थे. इसलिए अब हमारा मार्किट जाने का भी टाइम हो गया.
इसलिए हम दोनों ही उठे और मैंने देखा की सुनीता भाभी की चूत में से बिस्तर पर इतना पानी निकल चूका था जैसे कोई पानी का फव्वारा चला हो. तो मैंने पूछा- भाभी इतना पानी कैसे?
भाभी बोली- ऐसे चोदोगे तो ऐसे ही निकलेगा पानी. आप इसकी परवाह मत करो. आप तो हमेशा मेरे को इसी अंदाज में चोद लिया करो. क्योंकि अब मेरे को आपसे प्यार हो गया है रफीक जी.
इसके बाद दोस्तों मैंने भी अब सुनीता भाभी के गालों पर एक प्यारी सी किस दे डाली. और सामने से वो भी मेरे को किस की और बोली- आई लव यू रफीक जी.. आप मेरी जान हो आज से. इसके बाद से दोस्तों करीब 4 महीने हो गये है मैं रोज सुनीता भाभी को कभी घोड़ी बनाकर तो कभी 69 वाली पोजीशन में जमकर चोदता हूँ. और वो भी मेरा मुस्लिम लंड लेकर अपने पति को मानों अब भूल सी गयी है.
दोस्तों ये Hindu Muslim Sex Story आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Hindu Muslim Sex Kahani बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.