Sasur Bahu Sex Story – ससुर जी ने अपना लंड दिखाकर किया मदहोश
हेल्लो दोस्तों, आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com के Sasur bahu sex stories के नए एपिसोड में. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर से अनीता जी द्वारा भेजी गयी Sasur bahu sex story लेकर. दोस्तों यह Sex story sasur bahu मेरे पहलवान ससुर के साथ की है जिन्होंने मुझे अपने पति वाला सुख प्रदान किया है.
दोस्तों हम लोग हरियाणा के जींद के रहने वाले है. और हम एक छोटे से गाँव में रहते है जहाँ हमारा काम धंधा केवल खेती बाड़ी ही है. तथा मेरे पति मनोहर जिनके साथ मेरा विवाह आज के 3 बरस पहले हुआ था. वो अभी कमाने के लिए इंग्लैंड गये हुए है. तथा उन्होंने वहीँ पर एक अंग्रेजन को सेट कर लिया है. और मुझे पूरा विश्वास है की वो अबकी बार उस अंग्रेजन को हमारे घर लेकर आयेंगे.
पता नही क्योंकि यहाँ के देशी लड़कों को अंग्रेजन क्यूँ पसंद आती है? सभी लोग अंग्रेजन के पीछे घूमते रहते है. तथा मैं आपको सच बताऊ तो मैं भी किसी हुस्न की परी से कम नही हूँ. क्योंकि मेरा रंग एकदम गोरा और मेरा बदन एकदम गठीला है. जब भी मैं बाहर निकलती हूँ तो गली में बहुत से लड़के मेरे दीवाने है जो की सिर्फ मेरा ही इन्तजार करते रहते है. और वो सोचते है की कब अनीता भाभी घर से बाहर हमें दर्शन दें. लेकिन दोस्तों मैंने आज तक उन लड़कों को कभी भाव नही दिया.
अभी मेरी उम्र 28 बरस की हो चली है. और आपको बताऊ मुझे चुदाई का नशा जब मैं 20 बरस की थी तभी से चढ़ा हुआ है. क्योंकि इस दौरान मुझे कॉलेज के दोस्त अंशुल से प्यार हो गया था. और उसने मेरे को चुदाई की लत लगाकर करीब 4 बरस तक मेरी चूत को जमकर बजाया था. और यहीं से मेरे को पोर्न देखने का भी नशा चढ़ चूका था. क्योंकि जब मेरी चुदाई को काफी दिन बीत जाते थे तो फिर मेरे को गंदी फिल्म देखकर अपनी चूत में ऊँगली करके ही काम चलाना पड़ता था.
तभी घरवालों ने मेरी शादी मनोहर के साथ करवा दी. अब मुझे क्या पता था की मनोहर मेरे को आगे चलकर मेरे से खुबसुरत कोई और मिल जाएगी और फिर वो मुझ पर कोई ध्यान ही नही देगा. हालाँकि उसने शुरू-शुरू में तो मेरे को जमकर चोदा था. लेकिन जब से वो इंग्लैंड गये है तब से मुझसे ढंग से बात भी नही करते है.
इसी के चलते दोस्तों अब मैंने भी निर्णय लिया था की अब मैं भी एक बॉयफ्रेंड बनाउंगी. तभी पास के एक हॉट लड़के वरुण से मैंने दोस्ती कर डाली. और वरुण मेरे घर पर जब ससुर जी नही होते थे तब आकर चुदाई करके चला जाता था. और ये सिलसिला करीब 5 माह तक चलता रहा. लेकिन एक न एक दिन तो ये बात सामने आने ही वाली थी.
एक दिन हुआ यूँ की मेरे ससुर जिनकी उम्र अभी 55 बरस के लगभग होगी. वो बाजार में गये हुए थे. और वो जब भी बाजार में जाते थे. तब वो शाम को ही वापस लौटते थे. इसलिए किसी कारणवश वो जल्दी पधार गये. और इस दौरान वरुण और मैं एक कमरे में चुदाई का मजा ले रहे थे. इसी दौरान ससुर जी घर आकर समझ गये की ये चपल किसी और की है.
इसलिए मेरे कमरे के सामने आकर आवाज दी- अनीता, अनीता,,अनीता.
ये आवाज सुनकर मैं एकदम घबरा गई और बोली- हाँ पापाजी, क्या बात है?
ससुरजी- अंदर कौन है?
मैं- कोई नही है मेरी दोस्त निर्मला है.
इतना सुनकर ससुरजी चले गये. हालाँकि धान तो वो भी खाते है इतना फर्क तो समझते है की बाहर देखी चप्पल मर्द की है या औरत की इसलिए उन्होंने मेरे कमरे की तरफ पूरा ध्यान रखा और फिर जब वरुण ने आधे घंटे बाद मेरे को चोदकर घर से जाने का निर्णय लिया तो हम दोनों ने समझा की ससुर जी अब अपने कमरे में होंगे.
लेकिन ससुर जी कहाँ इतनी जल्दी हार मनाने वाले थे. और वो लगातार मेरे कमरे की तरफ अपनी नजर गडाए हुए थे. तभी वरुण निकला और बाहर जाने को लग गया. तभी ससुरजी ने देख लिया. और फिर मेरे पास आकर बोले- अच्छा तो ये थी निर्मला जो लड़कों के कपड़े पहनती है?
मैं- सॉरी पापाजी, गलती हो गयी.
ससुरजी- ये गलती नही है महापाप है. बताओ तुमने इसे अपने घर क्यों बुलाया, तुम्हे पता है इससे हमारी कितनी बदनामी होगी.
मैं- बुलाती नही तो क्या करती आपका बेटा कभी मेरे से सीधे मुह बात ही नही करता है. हमेशा लड़ाई करता है. क्या मेरी कोई ख़ुशी नही है?
ससुरजी- कहना क्या चाहती हो साफ़-साफ बताओ.
इसके बाद मैंने ससुरजी को सब कुछ सच-सच बता दिया. और मैंने कहा की मेरे को भी सेक्स की लत लगी हुई है इसलिए मुझे वरुण से दोस्ती करनी पड़ी है.
ससुरजी- तेरे को पता है ना इससे हमारी कितनी बदनामी होगी?
मैं- बदनामी तो होगी, लेकिन आप प्लीज मेरी मजबूरी को समझो.
ससुरजी- कोई बात नही आगे से मत बुलाना, क्योंकि ऐसे अच्छा नही लगता है.
मैं- ठीक है पापाजी, सॉरी अगेन.
ससुरजी- सॉरी से काम नही चलेगा, मनोहर ही तो नही चोदता ना तुमको मैं कौनसा तुमको मना किया हूँ. कब से तुमको चुपके-चुपके देखकर अपना लंड हिलाकर टाइम पास करता हूँ.
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मैं- अच्छा, सच्ची पापाजी?
ससुरजी- हाँ, मुझे भी जब से तेरी सासु माँ का इंतकाल हुआ है तब से चुदाई की बहुत मन में होती है. लेकिन करूँ तो करूँ क्या? इसलिए तेरे को ही बाथरूम में चुपके से देखकर लंड हिला लेता हूँ.
मैं- अब से लंड मत हिलाना पापाजी.
ससुरजी- ठीक है.
इतना कहते ही ससुरजी ने मेरे को अपनी बाहों में भर लिया. और फिर मेरे को लगातार किस करने में लग गये. और वो मेरे को इस दौरान ऐसे चूम रहे थे. जैसे की कोई भूखा भेड़िया मेरे को चूम रहा हो. क्योंकि उनकी चुदाई की आग इस दौरान चरम पर थी. और उनके चूमने के कारण मेरी भी चुदाई वाली प्यास चरम पर जाने लगी.
इसलिए अब ससुरजी मेरे से बिल्कुल चिपके हुए थे. उनकी छाती में मेरी चूचियां दबी हुई थी. उनकी गर्म सांस मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी. वह कभी मेरे गर्दन को चूमते, तो कभी अपने दूसरे हाथ से मेरी नाभि को मसलते. उनकी इन हरकतों से मेरा चुदाई का नशा बढ़ने को लग गया. और मैं अब आह…अहह्हः…ईईई……आहाहाह…अह्हाह्हा… करने में लग गयी.
फिर वो मेरे गाल को चूमते हुए मेरे होंठ के रस को पीने लगे. मैं उनकी मजबूत हाथों के बीच में फंसी हुई थी, और तनिक भी हिल नहीं पा रही थी. वह लगातार मेरे होठों को चूम रहे थे. उनकी भारी भरकम देह मेरे अंदर भी गर्मी जगा दी थी. मैं भी अपनी आंखों को बंद कर उनके होंठ चुसाई का मजा लेने लगी थी. ससुरजी जी मेरे होंठ को चूमते हुए नीचे की ओर बढ़े, और फिर गर्दन के हर हिस्से को अच्छे से चूम रहे थे. मैं अपनी आंखों को बंद करके उनके बालों को सहला रही थी.
फिर ससुर जी मेरे शरीर से हटे, और मेरे माथे को चूम कर मेरी साड़ी को खोलने लगे. मैंने भी अपनी साड़ी उतारने में उनकी हेल्प की, और फिर मैं पेटिकोट और ब्लाउज पर हो गई. ससुर जी से मेरा गोरा पेट देख कर रहा ना गया. और वो झट से मुझे लिटा कर, मेरी नाभि में अपनी जीभ डाल कर चाटने लगे.
इस दौरान मैं आंखों को बंद कर उनके बालों को जोर-जोर से सहला रही थी. मेरे मुंह से अब सिसकियां निकल रही थी. क्योंकि उनके चूमने का अंदाज इतना निराला था की मरी हुई लड़की भी होश में आ जाए एक बार तो चुदवाने के लिए. शायद इसलिए अभी तक उन्होंने लंड के दर्शन नही करवाए थे लेकिन मैं अब जोश में आ चुकी थी. और सबसे गजब बात तो ये थी की अभी-अभी वरुण मेरे को चोदकर गया था. लेकिन उससे वो नही हुआ था. जो अब ससुरजी मेरे साथ कर रहे थे.
क्योंकि ससुरजी एक खेले हुए खिलाड़ी आदमी थे. इसलिए उन्हें भली भांति सब पता था की कहाँ क्या करना है जो की मेरे को जोश में लाया जा सके. इसलिए उन्होंने लगातार मेरे शरीर के साथ खेलना सही समझा और वो मेरे को चुदाई के लिए आतुर करते रहे. पिछले करीब 15 मिनट से वो मेरे को ये चूमा चाटी वाली हरकते कर रहे थे.
अब मैंने भी बिना कोई शर्म किए ससुरजी को सामने से चूमना शुरू कर दिया था. और हम दोनों इस दौरान ऐसे हो गये थे जैसे दो जिस्म एक जान. और लगातार एक दुसरे को कसकर पकड़े हुए थे. और चूसने का मजा ले रहे थे. मैं आह… ऊऊऊउ…. आह …… आहाहहहः. …. कर रही थी. ससुर जी मेरी नाभि को चाटते हुए पेट के हर हिस्से को चूमने लगे.
इसके बाद उन्होंने मेरे को सीधा लेटा दिया बेड पर. और अब वह निचे से मेरे पेटीकोट को ऊपर करने में लग गये. और साथ में धीरे-धीरे अपने नाजुक से हाथों से मेरी जांघों पर गुदगुदी करने में लग गये. और इस दौरान मेरे को अब और चुदाई का नशा चढ़ चूका था. हालाँकि दोस्तों अभी तक मैं हैरान थी की अभी ही कुछ देर पहले मेरे को वरुण ने चुदाई का मजा दिया था.
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लेकिन ना जाने क्यूँ ससुर जी का मजा कुछ और ही था. इसलिए मेरे को उनकी हर हरकत बहुत ही पसंद आ रही थी. और इसलिए मैंने उनका एक भी विरोध नही किया और उन्होंने जैसा मेरे संग करने को चाह वैसा करने को दिया. अब दोस्तों वह मेरे पेटीकोट को पेंटी से ऊपर ले आए. और इस दौरान मैंने सफेद रंग की पेंटी पहनी हुई थी.
जिस पर वरुण की चुदाई वाला माल अब भी निकले जा रहा था. और वो सामने से अभी भी गीली ही नजर आ रही थी. इसलिए अब ससुर जी ने धीरे-धीरे करके मेरी पेंटी को उतार दिया. और पहले तो पास में पड़ा एक कपड़ा लिया तथा वरुण की चुदाई वाले माल को साफ़ करके अब झट से मेरी चूत को चाटने में लग गये. और उनके चूत चाटने के अंदाज से ही मैं समझ चुकी थी की, आज चुदाई तो दमदार होने वाली है.
इसलिए ससुरजी बोले- ये माल केवल वरुण का ही लग रहा है, तेरा नही निकला क्या?
मैं- पापाजी वो मैं इतनी जल्दी नही झड़ पाती हूँ. क्यूंकि वरुण 5 मिनट ही आगे-पीछे होकर अपना माल छोड़ के चला जाता है. इसी में ही खुश रहना पड़ता है.
ससुरजी- चिंता मत करो बेटा आज मैं तुमको भी झाड़ के ही दम लूँगा.
इतना कहते ही ससुरजी लगातार मेरी चूत को चाटने में लग गये. और अब मेरा चुदाई का जोश और बढ़ गया. तथा अब मैं आह….ईईईईइ………ऊऊऊऊऊऊ…….सीईईईईइ…….आआआआअ………..आआआआआअ….. करने में लग गयी. और ससुरजी ने मेरी एक न सुनते हुए करीब 15 मिनट तक मेरी चूत को चाटना ही बेहतर समझा.
और आपको सच बताऊ तो मैं अब उनके मुह में ही झड़ गयी थी. क्योंकि उनके चाटने के अंदाज से ही मेरे को चुदाई वाला मजा आ रहा था. इसलिए अब मैं आह…आः….आया….आह्हहहः…..अह्हहहहः…. करके ससुरजी के मुह में ही झड़ गयी. और ससुरजी ने मेरी चूत का सारा पानी अपने मुह में गटक लिया. तथा अब उन्हें पानी पिने के बाद जोश आ गया.
इसलिए अब वो उठे और अपना पजामा खोलकर अपने 7 इंच के काले से लंड के दर्शन मुझे करवा डाले. और जैसे ही मैंने उनका लंड देखा मैं एक दम हक्की-बक्की रह गयी. क्योंकि मैंने पहले कभी इतना बड़ा और मोटा लंड नही देखा था. इसलिए मेरे मन में एक ख़ुशी ये भी थी की वो मेरे को आज जमकर चोदेंगे. इसलिए दोस्तों मैंने झट से बिना कहे ही ससुरजी के लंड को हाथ में लेकर मुह में ले लिया.
और ससुरजी के लंड को ऐसे चूम रही थी जैसे की मैं किसी कुल्फी को चूमती हूँ. उनके लंड का स्वाद एकदम नमकीन टाइप का सा था. और मेरे को उनके लंड की खुशबु मदहोश किये जा रही थी. इसलिए मैंने करीब 5 मिनट तक ससुरजी के लंड को लगातार चूमा और उनके लंड को एक लौहे ही रॉड की तरह बना डाला. और अब उनका लंड मेरी चूत में जाने के लिए एकदम तैयार था.
इसलिए अब ससुरजी ने भी मेरे को लेटाया और मेरे दोनों टांगों को अपने कंधों पर रखकर सामने से अपने लंड को मेरी चूत के ऊपर फिराना शुरू कर डाला. और वो लगातार मेरी चुदाई की प्यास बढाने में लग गये. क्योंकि उनके लंड फिराने की वजह से मैं पागल हुए जा रही थी. और अब मैं लंड को अंदर डलवाने के लिए मिन्नते कर रही थी.
तभी ससुरजी ने अपने लंड की टोपी को मेरी चूत के छेद में डाल दिया. और मैं एकदम से चिल्लाई… आहाहह्हाहा…… आआआआआअ…….ईईईईइ……..सीईईईईइ……..अ………अ…..आआआआआअ…. आहाहहः…. प्लीज. पापाजी प्लीज धीरे-धीरे करो.
ससुरजी- धीरे-धीरे करूँगा तो तुमको मजा कैसे आएगा?
मैं- हाँ ये बात तो है लेकिन प्लीज ध्यान से फाड़ मत देना मेरी चूत को.
ससुरजी- चिंता मत करो बेटा. आज से तुम वरुण को भूल जाओगी.
मैं- देखते है पापाजी आप में कितना दम है.
इतना सुनते ही ससुरजी जोश में चले आए. और अब उन्होंने एकदम से मेरे को झटका दिया और अपने लंड को चीरता हुआ मेरी चूत की गहराई में डाल दिया. और आपको सच बताऊ मैंने तो अपनी जिन्दगी मैं पहली बार ऐसा लंड लिया था जिसने मेरी चूत की जड़ तक अपनी टोपी का अहसास करवाया हो. इसलिए अब मुझे दर्द कम और ख़ुशी ज्यादा हो रही थी.
लेकिन फिर भी मैं आहाहहहः….. अहहहहः…… अहहहाह्हा…. अहहहहः…. किये जा रही थी. तभी अब ससुरजी ने भी मेरी मुस्कराहट देखकर अपनी स्पीड बढ़ानी शुरू कर डाली. और वो लगातार मेरे को झटके पे झटके दिए जा रहे थे. तभी मैं अब लंड को अंदर तक महसूस कर रही थी. मेरे को इस दौरान आपको क्या बताऊ दोस्तों जन्नत जैसा फील हो रहा था.
और मेरी आँखे इस दौरान तैरने को लग गयी थी. लेकिन ससुरजी रुकने का नाम नही ले रहे थे. इस दौरान उन्होंने मेरे को लगातार 20 मिनट तक चोदने का मजा दिया. और मैं अब फिर से झड़ गयी थी. और एकदम अकड़कर सो गयी. क्योंकि अब मेरे को और चुदाई की जरूरत नही थी. लेकिन ससुरजी ठहरे मंझे हुए खिलाड़ी. इसलिए वो कहाँ अब रुकने वाले थे. उन्होंने फिर भी मेरे को झटके पर झटके दिए. और आगे करीब 10 मिनट बाद उन्होंने अपने लंड का माल मेरे पेट पर आह्हहः… ह्हहहहः…..हहहहः करके फेंक डाला.
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तभी मैंने कहा- पापाजी ये क्या कर दिया आपने?
ससुरजी- वीर्य निकाला है पागल.
मैं- इसे अंदर ही छोड़ देते.
ससुरजी- नही इससे कोई गडबड हो जाएगी अंदर छोड़ने से.
मैं- हो जाने दो, गड़बड़ होती है तो मेरे को अंदर तक अपने लंड को फील कराना था आपको.
ससुरजी- चिंता मत करो अगले राउंड में पक्का अपना माल तेरे अंदर ही चूत की जड़ तक छोडूंगा.
इतना कहकर ससुरजी मेरे साथ बेड पर लेट गये. और मेरे से अपने सेक्स के अनुभव के बारें में पूछने लग गये. तथा ऐसे बातें करते-करते ससुरजी फिर से 20 मिनट बाद मेरी चूत पर हाथ फिराने को लग गये. और वह फिर से जोश में आ चुके थे. इसलिए अब उन्होंने फिर से मेरी चूत को साफ़ किया और चाटना शुरू कर दिया.
और फिर से मैंने आह…अहहः….अह्हहः… करना शुरू कर डाला. मेरे को उनके चूत चाटने का अंदाज बिलकुल पसंद आ रहा था. काश वो मेरे पति होते. कितनी हसीन मेरी जिन्दगी होती. तभी उन्होंने मेरी चूत से हटकर अपने लंड को मेरे मुह में दे डाला. और मैंने भी उनके लंड को अंदर तक ले जाकर चूम रही थी. करीब 10 मिनट तक लंड चुस्वाने के बाद उनका लंड तो फिर से खड़ा हो चला था.
और अब फिर से उनका लंड मेरी चूत को चोदने के लिए बेताब हुआ जा रहा था. तभी ससुरजी बोले- अनीता तेरे को सबसे अच्छी चुदाई की पोजीशन कौनसी लगती है?
मैं- काश आप मेरे को घोड़ी बनाकर चोदे, मजा आ जाए.
इतना सुनते ही ससुरजी ने मेरे को घोड़ी बना डाला. तथा अपने लंड को मेरे बुर पर पीछे से सेट करके धक्का दे दिया. मैं तो आगे की तरफ जा गिरी. फिर उन्होंने मुझे संभाला और मेरे दोनों कंधों को पकड़ के अपने लंड को मेरे बुर पर सेट करके धीरे-धीरे अंदर प्रवेश करने लगे. मेरी तो जैसे जान ही निकल रही थी. क्योंकि घोड़ी बनने के बाद उनका लंड कुछ ज्यादा ही अंदर तक फील हो रहा था.
इसलिए मेरी आंखों से आंसू निकल गये. फिर धीरे-धीरे उन्होंने धक्के मारने शुरु किये, और फिर मजा आने लगा. मैं अपनी बुर में कई दिन बाद लंड लेकर मजा ले रही थी. आआह्ह्ह उउउउफ्फ्फ़ यह चुदाई अनोखी थी. मेरी बुर रस छोड़ रही थी. उनके धक्कों से मेरी दोनों चूचियां हिल रही थी. इस दौरान ससुरजी पीछे से मेरी बालों को खींच कर मेरी बुर में लगातार धक्के मार रहे थे, और मैं अपनी आंखें बंद करके घोड़ी बनी हुई चुदाई का भरपूर आनंद ले रही थी.
करीब 15 मिनट नॉन स्टॉप धक्कों के बाद मेरी बुर लगातार रस छोड़ रही थी. और ससुरजी समझ चुके थे की मैं अब धीरे-धीरे झड़ रही हूँ इसलिए उन्होंने अब मेरी दोनों चूचियों को पकड़ कर मेरे बुर में जोर-जोर से धक्का मारने लगे. उनके हर धक्के से मेरी चूत में अजीब सी ख़ुशी महसूस हो रही थी. इसलिए मैं अब ससुरजी को आई लव यू…. बोल रही थी. क्योंकि मैं उनकी चुदाई से इम्प्रेस जो हो चुकी थी.
इसलिए साथ में वो भी मेरे को आई लव यू टू अनीता बोले जा रहे थे. और मेरे को लगातार झटके दिए जा रहे थे. तभी करीब आधे घंटे तक मेरे को लगातार चोदने के बाद मैं फिर से पूरी तरह झड़ चुकी थी. इसलिए मेरी चूत अब काफी गीली हो चुकी थी. और अब जैसे ही ससुर जी झटका दे रहे थे पीछे से आवाज आ रही थी….. फट….फट….फट…. और ये आवाज मेरे को बहुत भा रही थी.
क्योंकि मैंने पहले कभी ऐसी आवाज मेरी चूत के लिए उम्मीद नही की थी. फिर करीब 15 मिनट बाद ससुरजी झड़ने को आए थे. इसलिए मेरे को बोले- अंदर छोड़ दू?
मै- हाँ पापाजी प्लीज.
इतना सुनते ही ससुरजी ने मेरी कमर को जोर से पकड़कर अपने लंड को मेरी चूत की जड़ तक पहुंचाकर अपने वीर्य को चूत के अंदर तक छोड़ दिया. और वो इस दौरान आह…अहहहः…हाहाहा….. कर रहे थे. और मैं भी आगे घोड़ी बनी हुई काफी हाँफते हुए आआ….हहहहाह्ह…अहहहहः… करते हुए उनके लंड का अहसास अंदर तक कर रही थी.
करीब 5 मिनट तक ससुरजी ने मेरी कमर को ठीक वैसे ही पकड़े रखा जैसे वो अपना वीर्य निकाल रहे थे. इसलिए अब जाकर वो मेरे को छोड़े और बोले- कैसा लगा मेरी जान?
मैं- ऐसा लगा जैसा पहले अभी ऐसा न लगा.
इतना कहकर हम दोनों हसने लग गये. और अब मैंने दोस्तों वरुण को कभी भी घर पर नही बुलाती हूँ. क्योंकि ससुरजी और मैं अब जमकर घर पर ही चुदाई का मजा ले लेते है. इसका फायदा ये है की घर की बदनामी भी नही होती. और मेरे को जैसा लंड चाहिए होता है वो भी मिल जाता है. आई लव यू पापाजी ऑलवेज….उम्म्माह…!
दोस्तों ये Sasur Bahu Sex Story आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Sex story sasur bahu बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.