Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani – खेल-खेल में चुद गयी देविका दीदी
हेल्लो सभी को, उम्मीद है की आप सभी ठीक होंगे. स्वागत है आपका अपने फेवरेट ब्लॉग पर Rishton me chudai story के एक नए एपिसोड में. दोस्तों मेरा नाम अनिल है और मैं राजस्थान के भीलवाड़ा का रहने वाला हूँ. फ़िलहाल मेरी उम्र 18 बरस की हो गयी है. यहाँ जो में आपको मेरी Bhai Bahan Ki Chudai Ki Kahani सुनाने जा रहा हूँ ये मेरी देविका Bahan ki chudai story आज के 1 महीने पहले की है.
दोस्तों फ़िलहाल मैं आपको अपने बारें में बताऊ तो मैंने अभी कुछ दिन पहले कॉलेज के फर्स्ट इयर में दाखिला लिया है. और मैं फ़िलहाल B.sc की पढाई कर रहा हूँ. वैसे तो मेरे को चुदाई का भुत आज से 4 बरस पहले ही चढ़ चूका था. क्योंकि जब से मैंने मेरी कक्षा की लड़की सुप्रिया को देखा था. तभी से मैंने मुठ मारने का आदि बन चूका था.
अपने परिवार के बारें में बताऊ तो दोस्तों हम लोग एक गाँव देहात में रहते है जहाँ हम संयुक्त रूप से रहते है. हमारे परिवार में ताऊ, चाचा और मेरे पापा तीनों भाई एक ही हवेली में रहते है. और हमारी हवेली काफी बड़ी है तथा हम कुल मिलाकर 8 भाई-बहन है. जिनमे देविका दीदी मेरे ताऊ की लड़की है.
देविका दीदी की उम्र फ़िलहाल 27 बरस हो चुकी है. लेकिन अभी तक उन्होंने अपनी शादी के लिए घरवालों को इनकार कर रखा है. क्योंकि दोस्तों देविका दीदी REET एग्जाम की तैयारी करके एक टीचर बनना चाहती है. और वह रोजाना अपनी कोचिंग जाती है.
अब दोस्तों बात है अभी गर्मियों की छुट्टियों की जब मैं और देविका दीदी अपने फोन पर लूडो खेल रहे थे. तो ये समय था दोपहर का फिर जब मैंने देविका दीदी की कांटी मार दी तो उसने फ़ोन को अपने पास ले लिया और अपनी हार स्वीकार नही कर पा रही थी. इसलिए मैं दोस्तों उससे फ़ोन को छुड़ाने की कोशिश कर रहा था की मेरा हाथ देविका दीदी के बूब्स से टकरा गया. और मेरे अंदर मानों ऐसी फीलिंग आई देविका दीदी के बूब्स को छूकर की पूछो मत.
फिर दोस्तों मेरे को ऐसा करते-करते बहुत मजा आया. मैं जान बुझकर देविका दीदी के बूब्स को छूता रहा. और उसके मुलायम बूब्स को फील करता रहा जिसके कारण मेरा लंड में तनाव बढ़ गया. और फिर दोस्तों अंत में मैंने सोचा की अब मुझे एक बार मुठी मारनी पड़ेगी. इसलिए मैं उस फ़ोन को देविका दीदी के पास ही छोड़कर बाथरूम में चला गया.
अब दोस्तों मैंने बाथरूम में जाते समय कुछ भी याद नही रहा और मेरे को इस दौरान केवल मुठी मारना ही सूझ रहा था. इसलिए मैंने दरवाजे के कुण्डी नही लगाई. तो मेरी देविका दीदी भी सोची की मैं कहाँ चला गया?
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वो मेरे पीछे-पीछे आ गयी. और जब मैं मुठी मार रहा था तो देविका दीदी ने बाथरूम में आकर मेरे को चुपके से देख लिया और अपने कमरे में वापस चली गयी. फिर जब मैं मुठी मारकर वापस गया तो देविका दीदी एकदम खुश दिख रही थी. तो मैंने पूछा क्या हुआ दीदी?
दीदी- कुछ नही, सब नार्मल है.
मैं- फिर मुस्कुरा क्यूँ रही हो तुम?
दीदी- वो तो ऐसे ही की मैंने तुमसे हारी नही बल्कि तुम मेरे से हार गये.
मैं- नही दीदी तुम ही हारी हो मैं नही.
दीदी- हाँ गेम में तो मैं हारी हूँ लेकिन और जगह तुम हारे हो.
मैं- कैसे दीदी?
दीदी- पहले तुम मेरे को ये बताओ बाथरूम में किस काम गये थे?
मैं- पेशाब करने गया था.
दीदी- तो वहां हाथ हिलाकर क्या कर रहे थे?
मैं- तुमको कैसे पता दीदी?
दीदी- मैं भी वहां गयी थी तो मैंने तेरे को वो सब करते देख लिया.
मैं- सॉरी दीदी, गलती हो गयी. किसी को बता मत देना घर में.
दीदी- अच्छा ठीक है, कितने दिन से कर रहे हो अनिल तुम ये सब?
मैं- जब मेरा मन करता है तभी कर लेता हूँ.
दीदी- क्या सोचते हो फिर तुम?
मैं- किसी को बता मत देना दीदी आप.
दीदी- किसी को नही बोलूंगी बताओ तुम अभी मेरे को खुलकर.
मैं- मैंने तो अभी आपके बूब्स को याद करके मुठी मारी है.
दीदी- पागल, अपनी दीदी के बारें में भी तुम ऐसा सोचते हो क्या?
मैं- सॉरी दीदी, बहक गया था.
दीदी- कोई बात नही, एक बात बताओ अनिल?
मैं- पूछो दीदी.
दीदी- तुमको मेरे बूब्स इतने अच्छे लगे क्या जो तुम्हे ऐसी फीलिंग आ गयी?
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मैं- हाँ दीदी केवल बूब्स ही नही आपकी हर चीज अच्छी है, कोई किस्मत वाला ही आपको चोदेगा.
दीदी- इतनी खुबसूरत हूँ क्या मैं?
मैं- हाँ दीदी, इसमें कोई शक नही है.
फिर दीदी हसकर बोली- अच्छा, तेरे को एक बात बताऊ?
मैं- बताओ दीदी.
दीदी- जब तुम मेरे बूब्स को छू रहे थे तब मेरे को भी तेरे जैसी ही फीलिंग आई थी. और सच बताऊ तो मैं भी बाथरूम में ऊँगली ही करने जा रही थी. वो तो किस्मत से तुम मेरे सामने मिल गये.
मैं- सच्ची दीदी?
दीदी- हाँ यार, मेरे को भी चुदाई का बहुत मन होता है.
मैं- फिर दीदी क्या हम दोनों एक टाइम के लिए भाई बहन वाले रिश्ते को भूलकर चुदाई के मजे ले ले तो कैसा रहेगा?
दीदी- तुम ठीक कह रहे हो अनिल, मेरे से तो तुम ये बातें कर रहे हो इसी की वजह से ही फीलिंग्स बढ़ गयी है.
इतना कहते ही दोस्तों मैंने देविका दीदी को अपनी बाहों में भर लिया. और उनके गालों पर किस करने लग गया. और इस दौरान देविका दीदी मदहोश हुए जा रही थी. और गर्म-गर्म साँसे छोड़ने लग गयी. तो मुझे लगा की दीदी की तड़प बहुत खूब है. जितना जल्दी हो सके अब चुदाई कर दी जाए.
फिर दोस्तों मैंने दीदी के सलवार के ऊपर से चूत टटोली और अंदाज से चूत में उंगली डाल दी. जब दीदी ने कुछ नहीं कहा तो मैंने सलवार की सिलाई उधेड़ दी और चिकनी सलवार में से सीधा उनकी चूत (bahan ki chut) में उंगली डाल के अन्दर बाहर करने लगा.
दीदी मेरी तरफ प्यार से देखते हुए मस्त होकर चूत में मेरी उंगली का मजा ले रही थीं. उनकी चुदास भड़क उठी थी. इधर एक तो उनकी चिकनी सलवार और ऊपर से उनकी चूत भी गीली हो चुकी थी, पर मैंने अपना काम जारी रखा. अपनी बीच वाली उंगली जल्दी जल्दी अन्दर बाहर करने लगा.
इसके बाद मैंने दीदी के चुचे दबाने शुरू किए, वो बिल्कुल पागलों की तरह हो गईं. मैंने उन्हें ऐसा उतावलापन करते हुए कभी नहीं देखा था. मैंने उन्हें अपनी ओर करके अपनी गोद में बैठा लिया. वो बिल्कुल मेरे लंड पर चुत टिका कर बैठ गई थीं.
मैंने उनको अपनी बांहों में जोर से जकड़ लिया. मेरा मन कर रहा था कि उनमें पूरा समा जाऊं. मैंने उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए उनको बोला- दीदी आप बहुत सेक्सी हैं, इस दिन का इंतजार मुझे कई दिनों से था.. पर आज भगवान ने मेरी सुन ली.
मैंने उनके होंठों पर किस किया और उनके मुँह में अपनी जीभ डाल दी. हम एक दूसरे को बुरी तरह से चूस रहे थे. फिर मैंने दीदी को लेटने को कहा और उनकी सलवार, जो नीचे से चुत के पानी से गीली हो गई थी, वो उतार दी.
इसके बाद मैं दीदी की चिकनी चुत चाटने लगा. दीदी मेरा सिर पकड़ के चुत के अन्दर खींच रही थीं और मेरे सिर में हाथ फेर रही थीं. वो बाहर तेज तेज सांसें ले रही थीं. तभी दीदी एकदम से मेरा सिर जोर से दबाए हुए टाँगें चौड़ी करके बैठ गईं. उम्म्ह… अहह… हय… याह… अनिल…. बहुत मजा आ रहा है…. ऐसे ही चुसो मेरी चूत को.
इस दौरान उनका मजा बहुत बढ़ गया था और उनकी चुत से सारा पानी मेरे मुँह में आ गया था और मैं पी भी गया. फिर दीदी बोली- अब जल्दी से अपना लंड निकाल और चुदाई शुरू कर अनिल. मेरे से और नही रहा जा रहा है. तो मैंने अपना लंड उनके सामने निकाल कर रख दिया. दीदी मेरा लंड देख कर हैरान थीं कि इतना मोटा और लंबा लंड कैसे हो गया?
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मैंने कहा- दीदी आप पहले मेरे लंड को अपने मुँह में लो और चूसो.
दीदी लंड चूसने से मना करने लगीं. हालांकि उनका मन दिख रहा था. इसलिए मैंने उनके मुँह में जबरदस्ती लंड डाल दिया और वो भी मेरा लंड चूसने लगीं. कुछ टाइम बाद मैंने अपना पूरा वीर्य उनके मुँह में डाल दिया और सारा मुँह में गटक गईं. अब हम दोनों झड़ चुके थे. हम दोनों एक दूसरे की तरफ देख कर हंसने लगे और बिस्तर पर लेट गए.
कुछ टाइम बाद मैंने दीदी की चुची को मुँह में लिया और चूसना शुरू कर दिया. साथ ही नीचे से उनकी चुत को सहलाना शुरू कर दिया. दीदी फिर गर्म हो गईं और बोलीं- कितना स्टेमिना है अनिल तेरे अन्दर.. जो तेरा लंड इतनी जल्दी फिर से तन गया.
अब वो मेरी जाँघों में बैठ कर मेरे लंड से अपनी चुत रगड़ने लगीं. पूरा कमरा उस गर्म दोपहर में उनकी तेज सांसों से गूंज रहा था. तब तक मैं कुछ सोचता, दीदी ने मेरा लंड अपनी चुत में ले लिया. पूरी नंगी होकर दीदी मेरे लंड पर उछल रही थीं. कमरे में पच पच की आवाज के साथ, मेरी और दीदी की ‘आह आह आह आह आह…. ऊऊऊउ…… अनिल….. आह…… आह…… पागल’ ऐसी आवाज निकल रही थी दीदी.
फिर दोस्तों दीदी करीब 10 मिनट तक ऊपर से झटके लेने के बाद थक गयी. और मेरे ऊपर लेट गयी और बोली अब तू मेरे उपर आ. फिर दोस्तों मैंने तुरंत दीदी को लेटाया. और मैंने उनकी टाँगें खोल कर एकदम से अपना पूरा लंड पेल दिया और अपनी स्पीड बढ़ा दी. मैंने इतनी जोर की चुदाई की कि दीदी चीख मारने लगीं.
मैंने तकिया उठाया और उनके मुँह पर रख दिया. मैं दीदी को धकापेल चोदता रहा. पूरे कमरे में अलग सी महक हो गई थी. दीदी की आह आह की आवाज ने मुझे पागल कर दिया था. और मेरा लंड सटासट जा आ रहा था, मैंने नोटिस किया की इस दौरान दीदी की चूत से पानी टपक रहा था. वो ऐसे ही लाश की तरह बेदम पड़ी थीं, पर मेरे लंड में अभी भी दम था, मैं उनको चोदता रहा.
फिर एकदम से मेरे वीर्य की पिचकारी ने दीदी की चूत में भर दी और उनके शरीर में भी मुझे अकड़न सी महसूस हुई. वो टांगें मिला कर लेट गईं औऱ उनके पास मैं भी लेट गया. इस तरह से मैंने अपनी सेक्सी दीदी की चूत की चुदाई करके वासना शांत कर दी
फिर दीदी मुझे चूम कर बोलने लगीं- आज मैं तुम्हारी कर्जदार हो गई, जब भी दिल करे, मुझे जी भर के चोद लेना.
इसके बाद दोस्तों मैं कहाँ दीदी को ऐसे हो छोड़ने वाला था. मैंने कहा दीदी अभी तो आप देखती जाओ क्या कुछ होता है. अभी आपको घोड़ी बनाकर चोदना तो बाकी ही रह गया है.
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तो दीदी बोली पहले तो मेरी सफाई कर पागल. वो कपड़ा ला और फिर मैं गया कपड़ा लेकर अपने लंड को तथा देविका दीदी की चूत को साफ किया. तथा फिर से मैंने दीदी के बूब्स को मसलना शुरू कर दिया और जब उन्हें जोश आया तो वह खुद से ही बिना बोले घोड़ी वाले आसन में आ गयी. और बोली- मेरे पीछे से मेरी गांड को भी वैसे ही चाट जैसे तू मेरी चूत को चाट रहा था.
फिर दोस्तों मैंने दीदी की गांड व चूत दोनों को करीब 15 मिनट तक चटाई की. फिर इसके बाद दीदी काफी सिस्कारियां लेने लगी थी. तो मैंने जरा भी देर न करते हुए मेरे वापस से खड़े हुए लंड को पीछे दीदी की चूत में सेट किया और आगे पीछे करने लगा. पहले तो दीदी बोली- अनिल बहुत आगे तक जा रहा है, तुम तो मुझे नार्मल पोजीशन में ही चोद लो.
मैं बोला- नही दीदी, पहले पहले होगा दर्द फिर नही होगा.
दीदी- अच्छा, तू बड़ा अनुभवी लग रहा है.
मैं- हाँ मैंने मेरी GF की कई बार घोड़ी बनाकर चुदाई की है. ऐसे ही होता है पहले पहले फिर नही होगा कुछ भी.
दीदी- अब से तुझे GF की चुदाई करने की कोई जरूरत नही है. मैं हूँ तेरे साथ अब कसम खाओ की कभी उसकी चूत नही मरोगे?
मैं- कसम से दीदी, आपकी चूत और आपका बदन बहुत नशीला है, उसमे और आपमें रात दिन का अंतर है. अब आपकी ही चुदाई करूंगा.
फिर दोस्तों इतना कहते ही मैंने अपनी रफ़्तार बढाई और फिर से दीदी आह…. आह…. आह…. आह…. आह…. आह…. अनिल … धीरे करो आह….आह….आह….आह….आह….आह….आह….आह…. कह रही थी. मैंने उनकी एक न सुनी और मेरे झटकों के कारण दीदी का पेशाब भी बाहर आने लग गया था.
फिर दोस्तों करीब 45 मिनट तक घोड़ी बनाकर मैंने फिर से मेरा माल दीदी की चूत में ही छोड़ दिया. और उनके ऊपर ही 5 मिनट तक लेटा रहा. और उनकी पीछे से गर्दन पर किस किए जा रहा था.
तो दीदी बोली- अब बस कर पागल, अभी मनीषा और राकेश आ जाएँगे. आपको बता दूँ की मनीषा और राकेश मेरे चाचा के लड़के-लडकियाँ है. तो हमने झट से अपने अपने कपड़े पहने और कमरे का दरवाजा खोल दिया. तथा फिर हम आगे की चुदाई की प्लानिंग करने लग गये.
और दोस्तों अब हम जब भी घर में अकेले होते है तो जबरदस्त चुदाई का मजा लेते है. और गनीमत यह रही की आज तक किसी को हमारे इस रिश्ते का पता तक नही चला है. थैंक गोड!
ये थी दोस्तों मेरी Bhai bahan ki chudai kahani जो काफी मजेदार थी और आज भी मेरे लिए काम की है. आप ये Bahan ki chudai story हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. तो दोस्तों अगर आपको मेरी ये Bhai bahan sex story hindi पसंद आई है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव साँझा कर सकते है. मिलता हूँ आपसे मेरी एक और मेरी Gandi Story के साथ.