Train Me Chudai Story – चलती ट्रेन में दीपिका आंटी की दमदार चुदाई की कहानी
आदाब दोस्तों! आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com पर. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर सद्दाम जी द्वारा भेजी गयी Train Me Chudai Story लेकर. दोस्तों मेरी यह एक सच्ची Train me chudai kahani है जिसमे मैंने पिछले महीने सफर के दौरान चलती ट्रेन में चुदाई करके एक स्लिम सी अनजान आंटी को चुदाई का भरपूर मजा दिया था.
खैर दोस्तों मैं आपको अपने बारें में बताऊ तो मैं मध्यप्रदेश के इंदौर का रहने वाला हूँ. और अक्सर मैं गुजरात के गांधीनगर अपने काम से साप्ताहिक रूप से ट्रेन का सफ़र करता हूँ. क्योंकि दोस्तों मैं वहां पर एक सिविल इंजिनियर का जॉब करता हूँ. इसलिए मुझे हर हफ्ते अपने घर जाना होता है. हाँ लेकिन कभी-कभी 15 दिन से भी घर चला जाता हूँ.
क्योंकि घर जाना इसलिए भी जरूरी है की, मेरी बेगम मेरे से चुदाई करवाने के लिए मेरे को समय-समय पर बुला लेती है. इसलिए मैं शनिवार से रविवार तक मेरी बेगम जन्नत की जमकर चुदाई करके वापस गुजरात अपने जॉब पर चला जाता हूँ. दोस्तों में आपको अपनी उम्र के बारें में बताऊ तो मैं अभी 28 बरस का हो गया हूँ. और मैं दिखने में के हट्टा-कट्टा कद काठी वाला बन्दा हूँ.
मुझे वहीँ लड़की या आंटी पसंद करती है जिसे केवल चुदाई की जरूरत होती है. क्योंकि मैं ट्रेन के सफ़र के दौरान अक्सर चुदाई का आनंद लेता हूँ. इसलिए मेरे पास ऐसी कहानियों का बहुत खजाना है. लेकिन जो मैं यहाँ आपको सबसे खुबसुरत आंटी की चुदाई की कहानी बताने जा रहा हूँ उनका नाम दीपिका आंटी था.
दीपिका आंटी दोस्तों है तो वैसे 45 बरस की लेकिन उनका शरीर देखकर मेरे को वह केवल 30-32 बरस की ही लगती है. शायद इसलिए वह मेरे को बेहद पसंद आई. क्योंकि उनका नेचर एकदम खुले विचारों का था. कोई भी बात हो बस मुह पर कह देती है.
अब आपको अपनी कहानी बताऊ तो दोस्तों पिछले महीने जून के दौरान मैं शाम को ट्रेन के रिजर्वेशन डिब्बे में टिकट बुक किया हुआ था अपने घर जाने के लिए. इसलिए शाम को 7 बजे मेरी ट्रेन थी. तो मैं दोस्तों ट्रेन के डिब्बे में बैठ गया. और वहां देखा की मेरे डिब्बे में गांधीनगर से केवल 6 लोग ही डिब्बे में मौजूद थे.
बाकी डिब्बा खाली पड़ा था. इसी डिब्बे में मेरे को दीपिका आंटी दिखाई पड़ती है. जिन्होंने एक छोटा सा बेग लिया हुआ होता है अपनी गोद में. और जैसे ही मेरी नजर दीपिका आंटी पर पड़ी तभी से दोस्तो मेरा मन उनसे बात करने को करने लग गया. इसलिए वैसे तो मुझे सीट खिड़की की तरफ नही मिली थी. लेकिन फिर आगे चलकर जब डिब्बे से कुछ यात्री उतरे तो मुझे खिड़की वाली सीट भी मिल गयी थी.
और मेरे आगे अब दीपिका आंटी थी. जिनके सुनहरे बाल हवा में उड़कर मेरी तरफ आ रहे थे. और मेरे को उनके बालों की खुशबु ने ही उनका दीवाना बना डाला था. एक बार तो मैंने उनसे अपने बाल सम्भालने को कहा लेकिन बाल कहाँ मानने वाले थे वो तो फिर से खुलकर मेरी तरफ आ गये. इसलिए मैं पीछे से उनके बालों की खुशबु का आनंद लेता रहा.
फिर दोस्तों अब मेरे को उनके बालों से कोई दिक्कत नही हुई. और मैं मस्त खुशबु में मद्मस्त होता चला गया. इसके बाद अगला स्टेशन आया और दीपिका आंटी को छोड़कर सभी यात्री उतर गये. अब डिब्बे में केवल दीपिका आंटी और मैं ही मौजूद थे. इसलिए मैंने दीपिका आंटी से पूछा- आप कहाँ जाओगी?
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आंटी- मैं मध्यप्रदेश जाउंगी.
मैं- अच्छा, मध्यप्रदेश में कहाँ?
आंटी- जबलपुर जाउंगी.
इतना पूछने के बाद दोस्तों मैंने उनके बारे में सबकुछ पूछना स्टार्ट कर दिया. और मेरी बातों का दीपिका आंटी बेबाक अंदाज में जवाब दे रही थी. फिर मुझे लगा की आंटी है तो काम की क्योंकि ये बिलकुल भी मेरे से नही शर्मा रही है. इसलिए हो न हो इन पर ट्राई मारी जाए.
इसलिए मैंने पूछा- आपकी शादी हो गयी?
आंटी- हाँ आपको मेरी मांग में सिंदूर नही दिख रहा?
मैं- सॉरी लेकिन मेरे को आप जवान दिखे तो पूछ लिया, माफ़ करना.
आंटी- अच्छा, आपको मैं इतनी जवान दिखी क्या?
मैं- हाँ, वैसे आपकी उम्र क्या है?
आंटी- 45 बरस हो गयी है, लेकिन आपको किसी औरत से उसकी उम्र नही पूछनी चाहिए.
मैं- हाँ ये बात भी ठीक है आपकी, वैसे आपका नाम?
आंटी- दीपिका, और आपका?
मैं- सद्दाम, मैं एक सिविल इंजिनियर हूँ. और हर हफ्ते अपने घर जाता हूँ इसी ट्रेन से.
आंटी- अच्छा इस ट्रेन से ही मैं भी गुजरात से महीने में एक बार तो अपने मायके जाती ही हूँ. मेरे पति दरअसल गुजरात में ही एक डॉक्टर है. इसलिए उनको समय नही मिल पाता है. तभी मैं अकेली जाती हूँ.
मैं- अकेली कहाँ आप मेरे साथ चली जाया करो अब.
आंटी- हाँ ये भी ठीक है, वैसे आप घर क्यों जाते है हर हफ्ते?
मैं- सच बताऊ तो मेरी बेगम को मेरी बहुत याद आने लगती है. इसलिए मेरे को घर जाना होता है.
आंटी- क्या गजब दुनिया है, कोई अपने काम में बीजी है तो कोई अपने परिवार को लेकर चिंतित है.
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मैं- कैसे?
आंटी- देखों ना आप अपनी बेगम के लिए जा रहे हो, वहीँ मेरे डॉक्टर साहब कभी भी मेरे बारें में नही सोचते है.
मैं- कैसे आंटी?
आंटी- कुछ नही रहने दो आप तो और बताओ?
मैं- बताओ ना आंटी प्लीज खुलकर.
आंटी- यार सच बताऊ तो डॉक्टर साहब मेरे को समय नही दे पाते है. इसलिए मैं गुमसुम सी रहने लगी हूँ.
इतना सुनते ही मेरे दिमाग में दोस्तों दीपिका आंटी को पेलने के विचार आने लग गये. और मैं बोला- कोई बात नही आंटी आप एक बेस्ट फ्रेंड बना लो जिसके बाद आप खुलकर अपनी बातें किया करो आपको अच्छा लगने लग जाएगा.
आंटी- हाँ ये भी ठीक है, लेकिन इतने अच्छे लोग होते भी कहाँ है इस दुनिया में अब.
मैं- आप बुरा न मानों तो आंटी मैं आपका फ्रेंड बन सकता हूँ.
आंटी- इसमें बुरा मानने वाली क्या बात है, ठीक है आज से आप मेरे बेस्ट फ्रेंड हो वैसे भी आपकी बातें मेरे को बहुत अच्छी लगी.
मैं- आंटी आपको तो मेरी बातें ही अच्छी लगी है और मेरे को आप ही अच्छी लग गयी हो. मन कर रहा है की हम दोनों ऐसे ही बातें करते रहे पूरी जिन्दगी.
आंटी- अच्छा, वैसे आप दिखने में भी काफी स्मार्ट हो.
मैं- थैंक्स आंटी, लेकिन इसका क्या फायदा जब कोई खुबसुरत आंटी सामने हो और फायदा न ले.
आंटी- क्या मतलब आपका?
मैं- कुछ नही आंटी, सॉरी.
आंटी- सब समझती हूँ मैं उम्र गुजारी है मैंने.
मैं- सॉरी आंटी गलती हो गयी.
आंटी- कोई बात नही होता है इन्सान से ही वैसे भी मेरे को आप बहुत पसंद आए इसलिए आप मेरे से कुछ भी कह सकते हो.
मैं- सच्ची आंटी?
आंटी- हाँ.
मैं- आपको मेरी फीलिंग्स बताऊ?
आंटी- हाँ बताओ खुलकर बताओ.
इतना सुनते ही मैंने कहाँ- आंटी मेरे को आपको एक किस करने का मन कर रहा है. क्योंकि आप बहुत सुंदर हो.
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आंटी- अच्छा, ठीक है लेकिन केवल किस ही करना है.
इतना सुनते ही मैंने आंटी को पकड़ लिया अपनी बाहों में और सुलाकर उनके गोरे से गालों पर एक प्यारी सी पप्पी कर दी. जिसकी वजह से आंटी काफी मचल गयी. और फिर उन्होंने रिटर्न में मेरे सर को पकड़कर मेरे को 2 किस कर डाली.
इतना सब होता देख मैंने अब उनके गुलाबी होठों पर अपने होठ रख दिए. और फिर वह भी मेरा विरोध किए बिना मेरा साथ देने लग गयी. मेरे को उनके रसीले होठ पिने में इस दौरान बहुत मजा आ रहा था. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे की मैं कोई शरबत पि रहा हूँ. इतने मीठे थे दीपिका आंटी के होठ.
किस के साथ-साथ अब मैंने आंटी के ब्लाउज के ऊपर से ही उनके बूब्स को भी फील करते हुए धीरे-धीरे दबाने के लिए लग गया. और जैसे ही मैंने उनके बूब्स पर हाथ धरा तो दीपिका आंटी तो सिस्कारियां लेने लग गयी. और मुझे तभी लगा की वह चुदाई के लिए काफी प्यासी है.
तो मैंने पूछा- आंटी आप कितनी खुबसुरत है लगता है आपने कई दिनों से सेक्स नही किया है.
आंटी- हाँ तुम ठीक कह रहे हो, मेरे डॉक्टर साहब ने मेरे साथ सेक्स किये पुरे 7 महीने होने को आए है.
मैं- फिर आप कैसे रह लेती हो, मुझसे आपकी तडप नही देखि जा रही है.
आंटी- तुम ठीक कह रहे हो, मेरे को भी तुम्हारी प्यार करने वाली हरकतें काफी पसंद आई है.
मैं- अभी डिब्बे में कोई नही है तो क्या हम चुदाई का मजा ले सकते है अगर आपकी इजाजत हो तो?
आंटी मुस्कुराते हुए- बोली ये भी कोई पूछने वाली बात है, मेरी तडप को महसूस करके भी तुम इतना पूछ रहे हो?
मैं- सॉरी आंटी.
इसके बाद आंटी की ये बातें सुनकर मैंने उनके ब्लाउज से उनका एक बूब्स निकाला और उसे मुह में लेकर काटने और चाटने लग गया. इसके बाद आंटी की सिसकारी निकलने लगी थी और वह इस दौरान आह….आह…. आह…. आह… सद्दाम मेरी जान….. ऐसे मत तडपाओ प्लीज. ऐसे करने लग गयी थी.
अब मैने दीपिका आंटी के मुह में अपनी जीभ डाल दी और आंटी मेरी जीभ को किसी आइसक्रीम की तरह चूसने लगी, बहुत मज़ा आ रहा था. इसके बाद मैंने आंटी को लिटाया और किस करते-करते साथ में निचे से उनकी साड़ी को ऊपर टांगों की तरफ लाने लग गया.
और दोस्तों दीपिका आंटी की जांघे इतनी गोरी थी की मुझे तो दीखते ही मेरा लंड पेंट से बाहर आने के लिए तड़पने लग गया. और फिर मैंने धीरे-धीरे करके उनकी पेंटी के दर्शन कर लिए. इस दौरान दीपिका आंटी ने सफ़ेद रंग की पेंटी पहन रखी थी.
और फिर मैंने उनकी पेंटी पर से ही चूत के उपर हाथ लगाया तो मुझे महसूस हुआ की आंटी की पेंटी तो पहले से ही गीली हो रखी है. इसलिए मैंने पूछा- आंटी आपकी पेंटी तो गीली हो रखी है?
आंटी- अब ऐसे किस करोगे तो पेंटी गीली क्या इसमें से पानी की बुँदे भी टपकेगी. अब तुम ज्यादा देर न करो वरना अगले स्टेशन से कोई यात्री बेठ जाएगा इससे पहले इस गीली चूत में अपना लंड घुसाकर इसकी प्यास बुझा दो.
इतना सुनते ही दोस्तों मेने अपना लंड अपनी पेंट से निकाला और आंटी अब मेरा लंड सहलाने लगी. फिर मैने उनकी ब्रा उतार दी और सीट पर ही लिटा कर बूब्स के एक निप्पल को मुह में भर लिया. वो मेरा हेड अपने बूब्स पर दबाने लगी. मैने दोनों बूब्स चूस-चूस कर निचोड़ डाला. फिर मैने किस करते हुए नीचे सरकने लगा..वो मोअन कर रही थी, फिर मैने पेंटी के ऊपर से ही किस कर ने लगा और वो अब बहुत गरम हो चुकी थी. अब उन्होंने मुझे उठा कर एक जोरदार किस करते हुए, मेरे कपडे निकल दिए और नीचे बैठ कर मेरा लंड बड़ी कामुकता से चूसने लगी.
अब मेरे मुह से सिसकारी निकल रही थी. आंटी बहुत ही अच्छा बिलोंजॉब दे रही थी. मेरा लंड एकदम कड़क हो चूका था. वो मेरे लंड के आगे वाले हिस्से पर अपनी जीभ बहुत मस्त घुमा रही थी. और इस दौरान मेरे को इतना अच्छा लग रहा था की दोस्तों मैं बयाँ नही कर सकता.
इसके बाद मैंने उनको सीट पर ही घोड़ी बनने को बोला. और आंटी तुरंत घोड़ी बन गयी. और फिर मैंने पीछे से लंड एक बार में ही पूरा डाल दिया. वो बोली – आराम से, मै तेज-तेज चोदने लगा और दोनों हाथो से बूब्स दबा रहा था. वो भी गांड आगे-पीछे करके चुदवा रही थी.
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दीपिका आंटी काफी दिनों से प्यासी थी इसलिए वो मेरे लंड को अंदर तक लेकर अपनी वासना को शांत करने में लगी हुई थी. और मेरे 10-20 दमदार झटकों में ही उनकी चूत से पानी की पिचकारी बहने लग गयी. मुझे लगा की वो झड़ गयी है लेकिन वो कहती रही और जोर से चोदो मेरे को सद्दाम बहुत मजा आ रहा है.
क्युकि वो लंड को बहुत अन्दर तक ले रही थी. अब उन्होंने मुझे नीचे लेता कर मेरा लंड चूत में ले लिया और दोनों हाथ मेरे पेरो पर रख कर बहुत स्पीड में गांड उछाल-उछाल कर चुद रही थी. इस दौरान में सीट पर लेटे-लेटे बहुत मज़े ले रहा था. फिर मैने उन्हें ट्रेन की खिड़की के सहारे खड़ा कर दिया और उनकी एक टांग को अपने हाथ में ले लिया और अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया और चोदना शुरू कर दिया.
इस दौरान मेरे दमदार झटकों से उनकी चूत में से फच…फच…फच की आवाजे आने लग गयी. और वह आह… आह… उ…उ… आई लव यू….सद्दाम कहकर मजे से चुदवा रही थी. बोल रही थी- मैंने आज तक करीब 10 लंड ले लिए लेकिन ऐसा लंड पहली बार मिला है जो मेरी चूत की गहराई को छूकर आ रहा हो.
प्लीज रुकना मत और मेरे को चोदते रहो. इतना सुनकर मैं काफी जोश में आ गया और एक टांग उठाकर आंटी को लगभग 20 मिनट तक झटके देता रहा. और आखिर में मेरा माल निकलने वाला था तो मैंने बोला आंटी में झड़ने वाला हूँ.
आंटी बोली- झाड़ तो मेरी चूत में ही इसकी आग तेरे माल से ही बुझेगी. अदर तक जाने देना अपने माल को. बहुत मजा आ रहा है.
इतना सुनते ही मैंने अब 10 धक्के और दिए और अपना सारा माल आंटी की चुत में ही आह….. आह… करते-करते झाड़ दिया. और इस दौरान दीपिका आंटी ने मेरे को कसकर पकड़ लिया और मेरे लंड को पूरा अंदर तक महसूस किया. फिर उन्होंने मेरा लंड निकाला और पेंटी पहनकर सीट पर बैठ गयी.
और मेरे को फिर से साथ में बिठाकर बोली- आज तक मैंने सुना ही था की मुस्लिम लंड दमदार होता है, लेकिन आज तुमने प्रमाण भी दे दिया है. आई लव यू सद्दाम ये चुदाई में अपनी जिन्दगी में कभी नही भूलूंगी.
मैने बोला – मज़ा तो अपने मुझे दिया आंटी जी, थैंक यू आंटी.
आंटी- अब से मेरे को आंटी नही अपनी जान बोला करो.
मैं- ठीक है मेरी जान, अब आप मेरे को अपने नंबर दे दो ताकि हम अगले हफ्ते फिर से इसी ट्रेन में चुदाई कर ले. इसके बाद आंटी ने अपने नंबर मेरे से शेयर कर दिए. अब मैं जब भी गुजरात से घर जाता हूँ तो साथ में दीपिका आंटी को लेकर जाता हूँ. और अब हम स्लीपर कोच में जाते है ताकि पूरी रात बिना डिस्टर्ब हुए चुदाई कर सकें.
अब तक दोस्तों आपको बताऊ तो मैंने दीपिका आंटी की चूत को चोद-चोदकर भोसड़ा बना दिया है. और वो मेरी चुदाई से इतनी इम्प्रेस है की अब दिन में मेरे को कॉल करके अपनी चूत में ऊँगली करके काम चलाती है. अगले हफ्ते में फिर से आपको उनकी चुदाई की नई कहानी बताऊंगा, तब तक मेरा इंतजार कीजियेगा.
ये थी दोस्तों मेरी Train me chudai kahani जो काफी मजेदार थी और आज भी मेरे लिए काम की है. आप ये Train me chudai ki kahani हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. तो दोस्तों अगर आपको मेरी ये ट्रेन में चुदाई की कहानी पसंद आई है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव साँझा कर सकते है. मिलता हूँ आपसे मेरी एक और मेरी Gandi Story के साथ.