Khet Me Chudai Story – मनीषा को खेत में बुलाकर अँधेरे में की ताबड़तोड़ चुदाई
हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम है हरीश और मैं राजस्थान के झुंझुनू जिले का रहने वाला हूँ. दोस्तों मैं और मनीषा दोनों एक ही साथ पढ़ते है. शुरू से ही हम स्कूल और कॉलेज में एक साथ पढ़े है. इसलिए मनीषा को मैं शुरू से ही जानता था. तो दोस्तों मनीषा के साथ ही मेरी ये Khet Me Chudai Story की शुरुआत हुई थी. जो मैं आपको आज बताने जा रहा हूँ.
खैर दोस्तों मैं पहले आपको अपने बारें में बताऊ तो मेरी और मनीषा की उम्र लगभग बराबर है. फ़िलहाल हम दोनों 19 – 20 साल के है. और मनीषा के बारें में आपको बताऊ तो दोस्तों मनीषा दिखने में काफी खुबसुरत बला है. और उसे लौड़ा लेने की आदत तो स्कूल से ही लग गयी थी.
लेकिन स्कूल वाला BF फिर शहर के कॉलेज में पढाई करने चला गया था. तब से मनीषा भी किसी नए लंड की तलाश में लगी हुई थी. तो दोस्तों जैसा की हम गाँव में रहते है. तो हम लगभग खेत में काम करने के लिए जाते रहते है. फिर दोस्तों वैसे तो पहले मेरी और मनीषा की कोई ऐसे बात नही होती थी.
क्योंकि वो एक घमंडी लड़की थी. उसे अपनी सुन्दरता पर बहुत घमंड था. इसलिए हम साथ पढने जाते थे तो वो केवल पढाई से रिलेटेड ही मुझसे बात करती थी. इसके अलावा मुझे कभी भी भाव नही देती थी. फिर दोस्तों कॉलेज की छुटी चल रही थी. ये बात है अभी पिछले दिनों की ही जब खेत में बाजरा लगा हुआ था.
तो मैं भी खेत में गया हुआ था और मनीषा भी खेत में ही गयी हुई थी. तो हम वहां पर अकेले ही थे और ये समय था शाम के 7 बजे का जब अँधेरा सा छाने लग गया था. तो मनीषा ने मुझे बोला की मुझे भरोटी (घास का बंडल) मेरे सर पर रखवा दे. तो दोस्तों मैं उसके पास चला गया और उसने बंडल बाँध रखा था.
तो हम दोनों ने ही उसे उठाया और उसके सर पर रखने लग गया. तो सर पर रखते – रखते मेरी छाती मनीषा के ममों से टकरा गयी. जिसकी वजह से मनीषा को गुदगुदी फील हुई और उसने वो बंडल फेंक दिया और हसने लग गयी. इतना देख मैं भी दोस्तों हसने लग गया. और फिर हम चुपचाप बैठ गये.
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फिर मनीषा बोली- पागल यहाँ भी कोई छूता है क्या?
मैं- मनीषा मैंने जानबूझकर नही छुआ है. तुम बुरा मत मानो.
मनीषा- बुरा नही मान रही लेकिन मुझे गुदगुदी बहुत हुई है सच्ची.
मैं- अच्छा, चलो तुम हंसी तो सही मेरे सामने इसी बहाने वरना पुरे दिन मुह फुलाए रखती हो.
मनीषा- मैं कहाँ मुह फुलाए रखती हूँ?
मैं- और क्या तो कभी बात ही नही करती मेरे से कोई मजाक वाली.
मनीषा- यार तुम बुरा मत मानों लेकिन मैं मूंह नही बनाती हूँ.
मैं- तो फिर क्या बनाती हो पागल?
मनीषा- जल्दी से बोली- मैं मूड बना देती हूँ. और हसने लग गयी. हाहाहा
मैं- अच्छा, वो कैसे?
मनीषा- वैसे ही जैसे तेरे निचे ये कुछ चुभने जैसा हो रखा है वैसे. हाहाहा
मैं- पागल ये तो ऐसे ही है.
मनीषा- सब पता है मेरे को.
मैं- अच्छा पता है तो अब क्या करना है फिर?
मनीषा- तेरे को जो करना है वो कर ले मैं तैयार हूँ.
इतना सुनते ही दोस्तों मेरे तो मानों लौटरी सी लग गयी थी. क्योंकि मनीषा भी काफी दिनों से चुदाई की भूखी थी. इसलिए वह मुझसे खुलकर चुदाई के लिए बोल रही थी. फिर मैंने जरा भी देर न करते हुए खेत के बाजरे में ही मनीषा को अपनी गोद में भर लिया और उसे चूमने लग गया.
लेकिन इस दौरान मुझे डर लग रहा था. तो मैं कांपने लग गया तो मनीषा बोली- पागल कांप क्यों रहा है? पहली बार लड़की को छुआ है क्या?
मैं- नही यार तुम किसी से कह तो नही दोगी ना?
मनीषा- नही पागल किसी से नही बोलूंगी. तेरे को जो करना है कर ले जल्दी से घर भी जाना है अँधेरा हो गया है अब.
फिर मैं बोला- कोई बात नहीं, हम बस नॉर्मल किस कर लेंगे। इसमें तो कोई दिक्कत नहीं है ना?
वह बोली- नहीं, लेकिन सेक्स नहीं करेंगे। क्योंकि दोस्तों मनीषा को चुदाई की लत लगी हुई थी इसलिए वह केवल लंड की डिमांड कर रही थी.
फिर मैंने कहा – ठीक है, अब दोस्तों मैं तो बचपन से ही कमीना था। गर्म करके मैं उसे चुदने पर मजबूर करने वाला था। मेरा प्लान था कि फोरप्ले में ही उसे इतना गर्म कर दूं कि वह खुद मेरा लन्ड मांगे।
मैंने उसका चेहरा पकड़ा और उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए। उसने एकदम से खुद को छुड़ा लिया। वह इस अचानक हमले से सहम सी गई थी। लेकिन मनीषा होंठों की गर्मी तो उसे भी मिल ही चुकी थी इसलिए मैंने फिर से हमला किया और इस बार उसने कोई विरोध नहीं किया।
अब मैं उसके होंठों को लगातार चूसने लगा। मनीषा को भी मजा आने लगा और वह गर्म होने लगी। वह मेरा पूरा साथ दे रही थी। मैंने धीरे से उसके बूब्स पर हाथ रख दिया। उसने एकदम से हटा दिया मेरा हाथ।
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मैंने दोबारा लगाया, उसने फिर हटा दिया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। इस दौरान मैं बार-बार उसकी चूची भींचता रहा। और फिर एक टाइम आया कि उसने हार मान ली।
अब मैं आराम से उसके बूब्स दबाने लगा. अब वह कोई विरोध नहीं कर रही थी। मनीषा अब कसमसाने लगी। फिर मैंने उसकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया। अब वह मेरे वश में होती जा रही थी।
फिर मैं मनीषा की टीशर्ट उठाने लगा। एक बार तो उसने रोका लेकिन मैंने गर्दन पर किस करके उसे ज्यादा सोचने का मौका नहीं दिया। फिर मैंने टीशर्ट उतरवा दिया। उसकी ब्रा में वह एकदम चुदने वाली से कम नहीं लग रही थी। फिर मैंने धीरे-धीरे उसके सारे कपड़े उतार दिए, उसके बदन को सहलाने लगा।
हर जगह से मैं उसके कोमल-मखमली जिस्म को छूकर देख रहा था। उसकी काया इतनी नर्म थी कि पूछो मत यार … मैं तो पागल हुआ जा रहा था। जैसे ही मेरी नज़र उसकी चूत पर गई मैं अपने होश से खो बैठा।
ओह माय गॉड मनीषा की क्या सेक्सी चिकनी चूत थी … एक भी बाल नहीं चूत पर! लग रहा था कि जैसे वह पहले से ही चुदने का मूड बनाकर आई हो।
आराम से उसको मैंने नीचे लिटा लिया और धीरे से उसके ऊपर चढ़ गया। मैं उसके बूब्स मुँह में लेकर चूसने लगा। कुछ ही देर में उसके अंदर भी वासना की लहरें दौड़ने लगीं।
वह एकदम मदहोश हुई जा रही थी। मौके की नजाकत को देखते हुए मैं भी अपने सारे कपड़े निकाल कर बिल्कुल नंगा हो गया। मेरा लन्ड मनीषा के सामने आ गया। एक बार तो उसने शर्माने का नाटक किया लेकिन मैंने उसका हाथ पकड़ कर लंड पर रखवा दिया।
मेरा लंड एकदम से गर्म होकर तप रहा था। उसके नर्म-कोमल हाथ का स्पर्श पाकर वह और ज्यादा टाइट हो गया। फिर मनीषा मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाने लगी। लंड को सहलाते हुए मैं उसके चेहरे की तरफ देख रहा था, जिस पर मुझे चुदाई की प्यास साफ नजर आ रही थी।
फिर मैंने उससे अपना लन्ड चूसने को कहा तो झट से उसने मेरा लन्ड मुंह में डाल लिया और बिल्कुल एक्सपर्ट रण्डी की तरह चूसने लगी। क्योंकि दोस्तों उसे लंड को चूसने का काफी अनुभव प्राप्त था स्कूल के समय से ही.
लंड चुसवाते हुए मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं भी बेकाबू सा होने लगा। जोश में आकर मैंने उसके बाल पकड़े और उसका मुंह जोर जोर से चोदना शुरू कर दिया। फिर कुछ देर बाद जैसे ही मैं झड़ने को हुआ तो मैंने उसके बाल कसकर पकड़े और अपना लन्ड पूरा उसके गले तक ठूंस दिया।
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इतने में ही मेरा माल उसके गले में गिरने लगा। जब तक माल की एक-एक बूंद उसके गले में उतर नहीं गई, मैंने उसे नहीं छोड़ा। फिर मैंने लंड निकाला तो वह बुरी तरह से हांफ रही थी।
मनीषा हांफती हुई आवाज में- आज पहली चुदाई में ही मारने का प्लान है क्या?
मैं- अरे मेरी जान … ऐसे थोड़े ही होने दे सकता हूं मैं, अगर तू मर गई तो इसे (लन्ड की तरफ इशारा करते हुए) कौन प्यार करेगा।
मनीषा- ओह, तुम्हें तो बस अपनी पड़ी है, मेरा क्या, इतनी देर से जो नीचे आग जल रही है।
उसके इतना कहते ही मैंने उसे खींचा और 69 की पोजिशन में ले लिया।
वह मेरा मुर्झाया हुआ लंड मुंह लेकर खड़ा करने लगी और मैं उसकी चूत के रस को चाटने लगा।
फोरप्ले में उसकी चूत ने बहुत सारा रस छोड़ दिया था और वह अंदर से पूरी गीली हो चुकी थी।
फिर मैंने उसकी चूत में उंगली डाल दी। और जैसे ही उंगली अंदर गई तो मुझे पता चल गया कि वह वर्जिन नहीं थी, वह पहले चुद चुकी थी।
मैं- ओह डार्लिंग, तुम तो पहले ही अपनी चूत का उद्घाटन करवा चुकी हो, फिर मेरा लन्ड लेने में इतने नखरे क्यों कर रही थी?
मनीषा- ताकि हमारी चुदाई का मजा डबल हो जाए, वैसे तुम्हें वर्जिन चाहिए थी क्या?
मैं- ऐसा कुछ नहीं है मेरी जान … अब तो बस मुझे तेरी चूत का स्वाद चखना है!
इसके बाद मैं मनीषा की चूत चूसता रहा और उंगली करना जारी रखा। इतने में मेरा लन्ड भी पूरे जोश में आ गया। अब मैं सीधा हुआ और अपना लन्ड उसकी चूत पर सेट कर दिया। फिर मैंने अपना पूरा लंड एक झटके में ही उसकी चूत में उतार दिया। वह बहुत जोर से चिल्लाई- आह्ह आईई … धीरे-धीरे करो … दर्द होता है।
मैंने धीरे-धीरे लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरू किया और चुदाई करने लगा। फिर उसको भी मज़ा आने लगा और थोड़ी देर में वह उछल-उछल कर चूत चुदाई में मेरा साथ देने लगी।
मनीषा के मुंह से मस्त कामुक सिसकारियां निकलने लगीं- ओह्ह राहुल … ओफ … आह्ह … चोदो मुझे … सारी प्यास बुझा दो आज!
उसकी तेज-तेज, कामुक सिसकारियों से मेरा जोश और ज्यादा बढ़ रहा था। मैंने उसे और तेजी से चोदना शुरू कर दिया। चुदाई की पट-पट की आवाजों से कमरे का माहौल बहुत ज्यादा कामुक हो गया था।
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मनीषा का बदन मेरे धक्कों के रिदम के साथ अपनी ताल मिला रहा था। वह अपनी गांड उठा उठाकर मेरे साथ अपनी चुदाई का पूरा आनंद ले रही थी- ओह यस … आआ … आह्ह्ह उफ फ्फ … यार आह अह आह!
कुछ मिनट बाद लगने लगा जैसे वह झड़ने जा रही है। उसका शरीर अकड़ना शुरू हुआ तो मैंने अपनी स्पीड और तेज़ कर दी। दो पल बाद ही वह झड़ गई।
मेरा अभी नहीं झड़ रहा था क्योंकि मैं कुछ देर पहले ही एक बार अपना माल निकाल चुका था उसके मुंह में! तो मैंने मनीषा को लगातार उसी स्पीड में चोदना जारी रखा।
मगर झड़ने के कारण मनीषा अब शान्त हो गई थी। उसकी तरफ से कोई रिस्पॉन्स नहीं आ रहा था। वह एकदम निढाल होकर बस पड़ी-पड़ी मेरे लंड तले चुद रही थी।
कुछ देर और उसे चोदने के बाद मैं भी झड़ने के करीब पहुंच गया। फिर दो मिनट बाद ही मेरा माल भी उसकी चूत में गिरने लगा। मैं पूरा खाली हो गया और उसके ऊपर लेट गया।
उसने अपनी अपनी आँखें बंद कर लीं। जैसे ही मैंने उसकी आंखों से हाथ हटाया तो उसकी आंखों में एक अजीब सी खुशी मुझे दिखी। फिर मैं भी उसकी बगल में निढ़ाल होकर लेट गया।
थोड़ी देर बाद वह मेरे बदन पर हाथ फिराने लगी; अपने हाथों से मेरे अंग सहलाने लगी और मुझे किस करने लगी। मैंने भी उसके बूब्स दबाना शुरू कर दिया। लगभग 15 मिनट के बाद मेरे लन्ड में एक बार फिर से जोश भर गया और हमारा चुदाई का खेल दोबारा से शुरू हो गया।
और फिर दोस्तों अगला राउंड करते-करते हमें अब साढ़े आठ बज चुके थे रात के. फिर मैंने जल्दी से काम निपटाया और मनीषा ने बोला- अब बस करो अब मैं सिर्फ तुम्हारी हूँ. इसलिए अगली चुदाई कल करेंगे खेत में आकर ही. अगर खेत में नही आना हुआ तो मेरे घर आ जाना.
मैंने कहा – ठीक है, मनीषा और मनीषा को एक प्यार भरा किस देकर मैं और मनीषा दोनों अपने घर चले गए. अब दोस्तों पिछले 1 महीने से मैं मनीषा की भरपूर चुदाई का आनद ले रहा हूँ.
दोस्तों ये खेत में चुदाई की कहानी (Khet me chudai kahani) आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है। उम्मीद है आपको यह Khet me chudai kahani कहानी बहुत पसंद आई होगी। चलिए, जल्द ही मिलता हूँ अपनी अगली कहानी के साथ। अगर आपको मेरी यह Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।