Hindu Muslim Sex Story – दोस्त की मम्मी ने जोश में आकर मरवाई अपनी चूत
नमस्कार दोस्तों! आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com पर. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर सुष्मिता जी द्वारा भेजी गयी Hindu Muslim Sex Story लेकर. दोस्तों मेरी यह एक सच्ची घटना है जिसमे मुझे मेरे बेटे अशोक के बेस्ट फ्रेंड अनवर ने पहली बार मुझे असली चुदाई का अहसास करवाया था.
दोस्तों हम लोग हरियाणा के नुह के रहने वाले है. और मैं एक हाउसवाइफ हूँ तथा साथ में कपड़े भी सिल लेती हूँ. हालांकि ये मेरा कोई प्रोफेशन नही है लेकिन अपनी ख़ुशी के लिए ये सब कर लेती हूँ. वैसे भी मेरे पतिदेव एक मल्टीनेशनल कम्पनी में जॉब करते है. इसलिए पैसे की कोई कमी नही है. बस कमी है तो एक लंड की जो मेरे को समय पर नही मिलता है.
इसलिए मेरे को मजबूर होकर अशोक के फ्रेंड अनवर से अपनी चूत मरवानी पड़ी. फ़िलहाल दोस्तों मेरी उम्र 40 बरस की हो चली है. और आपको बताऊ मेरे पति नारायण लाल अक्सर विदेश में ही रहते है. और वह साल में कोई एक-आध बार अपने घर आते है. और वैसे भी वो चुदाई के मामले में एक पिछड़े हुए व्यक्ति है. क्योंकि मैं एक हॉट और सेक्सी टाइप की महिला हूँ.
हालाँकि मैं 40 की अभी लगती नही हूँ. क्योंकि मौहले में बहुत से युवा मेरे पे लाइन मारते है. और उन्हें लगता है की मैं अभी 30 बरस की लड़की हूँ. लेकिन उन्हें कौन बताये की मैं एक 40 बरस की महिला हूँ. और मेरे एक बेटा भी है जिसकी उम्र 18 बरस की हो चली है.
खैर दोस्तों छोड़ो ये सब आपको बता दूँ की मेरा बेटा अभी JEE की तैयारी कर रहा है. इसलिए वह फ़िलहाल कोचिंग क्लास ज्वाइन कर रखा है. और स्कूल के समय से ही अनवर उसका बेस्ट फ्रेंड रहा है. हालाँकि पहले अनवर हमारे घर आता-जाता नही था. लेकिन अभी पिछले कुछ दिन से वो अशोक के साथ हमारे घर पर आने लगा था.
और दोनों एक साथ बैठकर अपने डाउट क्लियर करते थे. जो की एक अच्छी बात थी. लेकिन दोस्तों अब अनवर भी अशोक की उम्र का ही था. पर वह दिखने में एकदम हॉट टाइप का लड़का था. इतनी सी उम्र में उसने अपनी बॉडी बहुत अच्छी बना रखी थी. वह हाफ बाजु वाली शर्ट में सलमान खान से कम नही दीखता था. और तो और वह एकदम अंग्रेज टाइप का दीखता था.
क्योंकि उसकी माँ पाकिस्तानी थी. इसलिए वह कुछ ज्यादा ही गोरा था. और उसके होठ हमेशा बिना कुछ लगाये ही पिंक नजर आते थे. हालाँकि पहले मैंने इसका कोई ध्यान नही दिया. लेकिन फिर दोस्तों अभी जून के महीने में आपको तो पता ही है की, यहाँ बारिश बहुत होती है. इसलिए वह हमारे घर आ रहा था. तो वह बारिश में भीग गया.
और फिर दौड़ा-दौड़ा हमारे घर आया. इस दौरान उसे नही पता था की अशोक आज अपने मामा के घर गया हुआ था. क्योंकि हमेशा तो वो कॉल करके हमारे घर आता था. लेकिन आज वह कॉल करके नही आया था. इसलिए घर में केवल मैं ही मौजूद थी. इसलिए वह घर आया तो मैंने दरवाजा खोलकर उसे अपने घर में बुला लिया. और फिर उसे चेंज करने के लिए पास वाले कमरे में भेज दिया.
तथा मैंने उसको एक टॉवल दे दिया. और बोला की वो अपना गीला बदन पौंछ ले नही तो बीमार हो सकता है. इसलिए वह कमरे में गया और बेग रखकर अपने सारे कपड़े उतार दिया. तथा टॉवल से अपना बदन पौछकर टॉवल को लपेट लिया. और फिर कपड़े कूलर की हवा के आगे रख दिया. ताकि वह जल्दी से सुख जाए. लेकिन दोस्तों जब से मैंने अनवर का सीना देखा तो मैं तो हक्की-बक्की रह गयी.
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क्योंकि उसके निपल्स किसी लड़की की तरह बाहर की ओर उभार मारने के लिए बेताब थे. फिर मैंने उसे अपने पास बिठा लिया. और अनवर से नार्मल बातें शुरू कर दी. क्योंकि मेरे को भी उसे नंगा देखकर बहुत मजा आने लगा था. इसलिए मैं करीब 20 मिनट तक बातें करने के बाद मेरे ठरकी दीमाग में उससे अकेले में कुछ करवाने का मन हो चला था.
फिर एकदम से मैं भी किसी बहाने बारिश में बिना बात के ही भीग आई. ताकि मैं भी अब भीगी हुई अनवर को अपना हॉट बदन दिखा सकूँ. हालाँकि दोस्तों मैं ऐसा करती तो नही. लेकिन जब से उसे नंगा देखा तब से मेरा तो मानों दीमाग ही काम करना बंद कर दिया. और बस चुदाई के ही ख्याल दीमाग में आने शुरू हो चुके थे.
इसलिए मैं बाहर जाकर भीग कर आ गयी. और हाल में टॉवल लपेटा अनवर शांति से बैठा हुआ था. लेकिन अब भीगने की वजह से मेरे ब्लाउज में से मेरे 38 के निपल्स साफ़ – साफ़ दिखाई दे रहे थे. इसलिए अब ये सब देखकर अनवर को भी जोश आ गया था. और वह मेरे को लगातार देखे जा रहा था. फिर दोस्तों मैंने भी चेंज का बहाना लगाकर पास के कमरे में जाकर बिना कुण्डी लगाये ही अपने कपड़े चेंज करने लग गयी.
क्योंकि अब अनवर भी मेरे बदन को नंगा देखने के लिए बेताब हो गया था. इसलिए मुझे पूरा यकीन था की, अनवर मेरे को नंगा देखने के लिए आएगा जरूर. और और आएगा भी नही तो कम से कम छुपकर तो देखेगा ही. इसलिए अब दोस्तों मैंने अपनी साड़ी उतारी और फिर मैंने अपने ब्लाउज को उतारा.
अब मैं केवल पेटीकोट और ब्रा में ही थी. फिर मैंने नोटिस किया की, कमरे के किवाड़ की साइड कोई परछाई नजर आ रही है. तो मैंने चुपके से साइड में जाकर एकदम से किवाड़ खोलकर देखा तो अनवर मेरे को नंगा देखने की कोशिश कर रहा था. और जब से वो मेरे सामने आया तो बोला- सॉरी आंटी. मैं तो अपने कपड़े लेने आया था.
मैं- अच्छा, इतनी जल्दी थोड़ी सुख जाएँगे पागल. आज तू भी कमरे में आजा.
अनवर- नही आंटी आप चेंज कर लो.
मैं- अरे कोई बात नही आ जाओ अनवर अंदर ही. मैं कर लुंगी चेंज.
इतना सुनते ही अनवर झट से कमरे में घुस जाता है. और अब मैंने ज्यादा देर न करते हुए अपनी ब्रा को अनवर के पीछे होकर उतार दिया. और अब मेरे बूब्स एकदम लटके जा रहे थे. जिसके बाद मैंने एक नई ब्रा पहनी. और फिर मैंने अनवर के सामने ही अपना पेटीकोट उतार फेंका. जिसके बाद अब दोस्तों अनवर से रहा नही गया. और उसने वहां से उठकर मेरे को पीछे से पकड़ लिया.
और बिना पूछे ही मेरे कूल्हों पर अपना लंड रगड़ने लग गया. मैं समझ चुकी थी की अब अनवर का लंड उफान पर है. इसलिए मैंने कोई विरोध नही किया. और वो अब लगातार मेरे को चूमे जा रहा था. फिर मैं मुड़ी और देखि तो वो पीछे से अपना 8 इन्चा का एकदम गंजा सा हथियार लेकर उसकी टोपी मेरे पीछे से टच कर रहा था.
और आपको बताऊ दोस्तों अनवर का लंड एकदम सख्त हो चला था. तथा वह चुदाई के लिए एकदम बेताब हो गया था. इसलिए वह बोला- आंटी आप कितनी हॉट और सेक्सी हो. मेरे को आपको नंगा देखकर बहुत अच्छा फील हुआ है. काश आप मेरी गर्लफ्रेंड होती.
मैं बोली- अपनी गर्लफ्रेंड ही समझ लो अनवर तुम तो.
अनवर- लेकिन आंटी गर्लफ्रेंड के साथ तो सब कुछ कर सकते है.
मैं- हाँ तो तुम भी सब कुछ कर सकते हो मेरे साथ, कोई चिंता वाली बात नही.
अनवर- पक्का आंटी?
मैं- हाँ यार, लेकिन ध्यान रखना अशोक को इसके बारें में कुछ पता नही चलना चाहिए.
इतना सुनते ही अनवर हँसने लगा और हम दोनों गर्मा गर्म किस करने लगे. मेरा जिस्म भरा हुआ था, बहुत सेक्सी और चिकना बदन था. अनवर अब मेरे मम्मो पर आ गया था और मजे से मेरे बूब्स चूसने लगा था. उसने मेरे दोनों 38 के बूब्स को हाथ में पकड़ लिया था और हल्का हल्का दबा रहा था. मुझे मजा मिलना शुरू हो गया था.
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फिर अनवर मेरे बूब्स को मुंह में लेकर चूसने लगा. उसके बूब्स को मसलने का ही अंदाज मेरे को लंड डालने जैसा अहसास दे रहा था. अनवर मेरी रसीली चूचियों को मुंह में लेकर चूसने लगा. इस दौरान मैं आः….आह….आह… करके आहें भरनी लगी थी. क्योंकि उसका अंदाज ही निराला लग रहा था मेरे को एकदम जोश दिए जा रहा था.
आपको बताऊ दोस्तों मेरे मम्मे किसी अनार जैसे लाल लाल गुलाबी गुलाबी और बड़े खूबसूरत थे. वृत्ताकर दूध के शिखर पर काले काले रंग के घेरे वाले चूचुक थे, जो बहुत मस्त और सेक्सी लगते थे. अनवर मेरी काली काली निपल्स में अपनी खुदरी जीभ को बार बार टकरा रहा था. और मैं आह… आह…. आह… करके मजे मार रही थी.
फिर उसके बाद अनवर मुझे उठा कर बेड वाले कमरे में ले गया. उसने मुझे ले जा कर बेड पर पटक दिया और अपने कपडे़ खोलने लगा. फिर वो मेरे ऊपर आ गया और दोबारा से मेरे चूचों को अपने मुंह में भरने लगा. इस दौरान मैं केवल पेंटी में ही थी. और मैंने नील रंग की पेंटी पहन रखी थी. जिसमे मेरा गोरा बदन उसके लंड को और सख्त किए जा रहा था.
इसके बाद मेरी तडप को समझकर अब अनवर ने मेरी पैंटी को निकाल दिया और फिर मेरी चूत में उंगली करने लगा. अब मैं पूरी तरह से गर्म हो गई थी. मैंने उसके लंड को ऊपर से पकड़ कर सहलाना शुरू कर दिया. और बोली- यार अनवर तेरा लंड इतनी सी उम्र में इतना बड़ा कैसे हो गया?
अनवर- इसको चूत का नशा चढ़े हुए 8 साल हो चुके है.
मैं- कैसे?
अनवर- जब मैं 11 बरस का था तभी से ये चूत में जाने के लिए बेताब हो रखा है. इसलिए मैं पिछले दिनों से मेरी फुंफी की लड़की सानिया की जमकर चुदाई करता हूँ. और उसी चुदाई के कारण यह एकदम अपनी पूरी साइज़ में आ चूका है.
मैं- तब तो तुम मंझे हुए खिलाड़ी लगते हो, मजा आएगा फिर तो मेरे को भी आज. मैं तो सोच रही थी तुम नए-नए हो.
अनवर- नही आंटी चुदाई करूँगा तब आपकी चीख न निकाल दूंगा तो बता देना.
मैं- इतना जोश है तेरे में?
अनवर- अभी पता चल जाएगा.
इतना कहते ही अब दोस्तों अनवर मेरी रसीली चूत पर अपनी जीभ टिका देता है. और अब वह एक ऊँगली मेरी चूत में घुसाकर आगे-पीछे करते हुए ऊपर से चूत को चाटता रहता है. जिसकी वजह से मैं काफी जोश में आ चुकी थी. और उसकी इन हरकतों के कारण में आह….आह… अनवर…. आह…. आह… बहुत मजा आ रहा है….. और चाटो मेरी चूत को.
बहुत मजा आ रहा है…. ऐसे ही करते रहो मेरी अनवर जान….. मुझे बहुत मजा आ रहा है….. आह…. आह…. आह…. फिर अनवर ने अपनी ऊँगली की स्पीड बढ़ा डाली और उसकी ऊँगली से ही मेरी चूत बहुत सारा पानी निकालकर झड़ गयी.
फिर अनवर ने वो पानी अपनी जीभ से चाटकर फिर से मेरी चूत में ऊँगली आगे-पीछे करनी शुरू कर दी. और अब मेरे से रहा बिलकुल भी नही जा रहा था. इसलिए अब मैं अनवर के सर को पकड़कर उसे सहला रही थी. और उसे ऊपर आने के लिए बोल रही थी. क्योंकि अब मेरे को भी अनवर के होठों का रस पिने का मन हो चला था.
लेकिन अनवर को कुछ और ही सूझ रहा था. इसलिए उसे अब ऊपर आकर सीधा अपना 8 इंच का मोटा लंड मेरे को मुह में लेने के लिए बोल दिया. फिर मैंने एक बार तो मना किया लेकिन फिर उसने जबरदस्ती लंड मेरे मुह में घुसा दिया. और मेरे सर को पकड़कर खुद से ही लंड को आगे पीछे करने में लग गया. हालाँकि पहले तो मेरे को बहुत अजीब लगा लेकिन फिर मैंने उसके लंड का नमकीन पानी गटकना शुरू कर दिया.
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जिसके बाद मेरे को भी अब बहुत मजा आने लगा था. और अनवर लगातार करीब 5 मिनट तक अपना लंड मेरे मुह में आगे-पीछे करता रहा. फिर उसने बोला- अब चुदाई शुरू करूँ आंटी?
मैं- कब से तडप रही हूँ मेरी जान. आ जाओ मेरे ऊपर और फाड़ डालो मेरी चूत को अपने इस 8 इंच के हथियार से.
इतना सुनते ही अनवर ने अपने लंड को मेरी चूत पर लगा दिया और फिर एक धक्का दे दिया. इतना बड़ा लंड लेकर दोस्तों एकदम से मेरी जान निकल गई उम्म्ह … अहह … हय … ओह … इतना मोटा लंड मैंने चूत में पहली बार लिया था. प्लीज अनवर धीरे-धीरे करो.
लेकिन अनवर भी मेरी चिकनी चूत को देखकर अब बिलकुल भी होश में नही था. और उसने मेरी एक न सुनी और वह धीरे-धीरे अपनी स्पीड बढाता चला गया. और जैसे ही उसका लंड मेरे अंदर तक जाता गया. मेरा भी अब मजा बढने लग गया था. वो गालियां देते हुए मेरी चूत की चुदाई करने लगा. मुझे उसके मुंह से गालियां सुनना भी पसंद आ रहा था. अब मैं भी चुदाई के पूरे मजे लेने लगी थी
वो कह रहा था….. मादरचोद आंटी आज आपको मैं रंडी बनाकर छोडूंगा…… आह…. आह…. आंटी आप कितनी खुबसुरत हो…. आपके सामने मेरी फुंफी की लड़की तो फ़ैल है. काश आप ही मेरी गर्लफ्रेंड होती क्योंकि आपकी चूत की गहराई मापने में मेरे लंड को बहुत मजा आ रहा है.
ऐसे बोलकर अनवर मेरे को लगातार चोदे जा रहा था. करीब 5 मिनट तक झटके देने के बाद मैं फिर से झड़ गयी. क्योंकि उसका लंड मेरे अंदर तक जा रहा था. इसलिए मेरे को बेहतरीन अहसास हो रहा था. पहले मेरे अंदर इतना बड़ा लंड कभी नही गया था. क्योंकि मेरे पतिदेव का लंड सिर्फ नुनु जैसा है. वह बस अपना माल छोड़ने के लाइक ही बना रखे है.
इसलिए मेरी आँखे तैर रही थी. और मैं अनवर के साथ चुदाई के दौरान सोच रही थी आज शायद में स्वर्ग में हूँ. और लगातार आह…आह…आह… किये जा रही थी. लेकिन अनवर का झड़ने का नाम ही नही ले रहा था. और वो लगातार अब मेरे टांगों को अपने कंधों पर रखकर जोर-जोर से मेरे को झटके दिए जा रहा था. और मेरी चूत से इस दौरान फच…फच….फच…. की आवाजें आ रही थी.
और ये सब आवाजें सुनकर अब अनवर और जोश में आ चूका था. और अपने झटकों की स्पीड बढ़ा डाली. कई मिनट तक उसने इसी पोज में मेरी चूत की चुदाई की और फिर मुझे खड़ी कर दिया. फिर उसने मेरी एक टांग को उठाया और फिर से चुदाई शुरू कर दी. और बोल रहा था की आंटी आपकी चूत को इतना चोदूंगा कि आपको चलने के लायक भी नहीं छोड़ूंगा.
मैं बोली- बेटा चोदना है जितना चोद लो. मेरे को तो बहुत मजा आ रहा है.
ये सब सुनकर वो बुरी तरह से धक्के लगाने लगा. मेरी चूत फटने लगी. मुझे चूत में दर्द होने लगा लेकिन वो नहीं रुका. उसके धक्कों से हो रहे दर्द से मेरी आंखों में पानी आने लगा था. मगर फिर भी मैं उसका साथ दे रही थी क्योंकि मुझे भले ही दर्द हो रहा था लेकिन मजा भी बहुत मिल रहा था. क्योंकि दोस्तों मुझे पहली बार किसी मर्द का लंड मिला था. जो पहली चुदाई में ही मेरे को 3 बार झाड चूका था.
इससे पहले मेरे पति ने कभी भी मुझे झाड़ा नही था. इसलिए मैं दर्द को भूल रही थी. कई मिनट तक मेरी चूत को रगड़ने के बाद उसने मुझे उल्टा कर दिया और फिर मेरी गांड ने नीचे तकिया लगा दिया. मुझे बेड पर उल्टा लिटाने के बाद उसने मेरी चूत में पीछे से अपना लंड पेल दिया.
और अब वह पीछे से मेरे निचे तकिया लगाकर करीब आधें घंटे तक चोदने के बाद आखिर में अह…आह…आह….आह… आंटी आई लव यू…… बोलकर झड़ रहा था…. और झड़ने के दौरान वह मेरी चूत में ही अपना सारा माल पटक रहा था. उसका गर्म माल मेरी चूत में गर्म अहसास दे रहा था….और मुझे बहुत मजा आ रहा था.
इसके बाद वो उठा. और फिर मैंने अपनी चूत की तरफ नजर घुमाई तो देखा की वह काफी लाल हो चुकी है. क्योंकि मेरी चूत की अनवर ने करीब 1 घंटे तक नॉनस्टॉप चुदाई की थी. इसलिए लाल होना तो लाजमी था. लेकिन दोस्तों उसके लंड का मजा आये …हाय… ऐसा फील दे रहा था जैसे की अब मैं सिर्फ अनवर की ही सब कुछ हूँ.
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इसलिए अब मैंने उससे उसकी सेक्स लाइफ का राज पूछा तो बोला- मैं समय-समय पर चुदाई कर लेता हूँ. इसलिए मेरा स्टैमिना इतना बढ़ा हुआ है. और आंटी ये तो कुछ नही है. अभी आपको घोड़ी बनाकर चोदना तो बाकि ही रह गया है.
मैं बोली- अच्छा, अभी और चोदोगे तुम मेरे को?
अनवर- हाँ अभी तो शुरुआत हुई है. मैंने बोला था ना की आपको चलने लाइक नही छोडूंगा.
इतना सुनते ही मैं हसी और बोली- पागल पहले मेरे को एक बार पेशाब करके आने दे. इतना कहकर मैं पेशाब करके वापस अनवर के पास चली आई. और अनवर ने मेरे को आते ही फिर से मेरी चूत पर अपनी जीभ चलानी शुरू कर दी. और साथ में मेरे बूब्स को दबाने लगा था.
जिसकी वजह से फिर से मेरे को चुदाई का नशा चढने लगा था. और फिर करीब 10 मिनट तक चूत चूसने के बाद अनवर ने मेरे को घोड़ी बना लिया और खुद बेड के निचे घुटनों के बल खड़ा हो गया. और वह अब पीछे से मेरी चूत की पंखुड़ियों को खोलकर अंदर तक अपनी जीभ ले जा रहा था. और मैं फिर से आह…आह…आह… करके सिसकारियां लेने लगी थी.
क्योंकि अब मेरे अंदर भी आग लगी थी. और वो इसलिए आपको सच बताऊ तो मुझे भी घोड़ी बनकर चुदने में बहुत मजा आता है. इसलिए अब अनवर का लंड फिर से खड़ा हो गया था. और उसने पीछे से मेरे को धीरे-धीरे करके धक्के देने शुरू कर दिए. और फिर अपनी स्पीड बढ़ाते हुए मेरी कमर को पकड़कर मेरे को करीब 1 घंटे तक ऐसा चोदा की मैं 4 बार झड़ चुकी थी.
और पूरी बेडशीट मेरी चूत के पानी से सन चुकी थी. आखिर में अनवर ने भी फिर से अपना माल मेरी चूत में ही निकाल दिया. लेकिन आपको बताऊ दोस्तों उसकी कही बात सच निकली मेरी उस नॉनस्टॉप चुदाई से चलने में मुश्किल होने लगी थी. और करीब 2 दिन तक मुझे अपनी चूत में जलन महसूस हुई. लेकिन मेरे को आज भी अनवर की वो पहली चुदाई याद आती है. तो मैं ऊँगली करके अपना काम चला लेती हूँ. हालाँकि वो भी मेरे को घर पर आकर अशोक की गैरमौजूदगी में समय-समय पर अपने तगड़े लंड का अहसास करवाता रहता है.
दोस्तों ये Hindu Muslim Sex Story आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Hindu Muslim Sex Kahani बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.