Jeth Bahu Sex Story – जेठजी ने पूरी कर डाली पतिदेव की कमी
नमस्कार दोस्तों, आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com पर। हाजिर है आपके सामने एक बार फिर मंजू जी द्वारा भेजी गयी Jeth Bahu Sex Story लेकर. दोस्तों यह jeth bahu ki chudai कहानी मेरे जेठजी प्रभु जी के साथ की है. दोस्तों मेरे जेठजी प्रभुजी ने पिछले 3 वर्षों से चुदाई का आनंद देकर मुझे अपनी दीवानी बना रखी.
दरअसल दोस्तों मेरी शादी को अभी 5 साल होने को आए है. लेकिन अभी तक मेरे पतिदेव आशीष ने कुल मिलाकर ही मुझसे 10-20 बार सेक्स किया होगा. क्योंकि दोस्तों उनकी बीजी लाइफ की वजह से अब उनका लंड भी ठीक से खड़ा नही हो पता है. इसलिए वह खुद भी सेक्स से पीछे हटते है. इसलिए अब आपको तो पता ही है की इस भरी जवानी में चुदाई सभी को भाती है.
चूँकि मेरी उम्र अभी 30 बरस की हुई है और मेरा मन अब एक दमदार लंड लेने का होता है. लेकिन दमदार दो छोड़ो पति से तो 5 मिनट भी ढंग से चूत में लंड रह जाए तो उसमे भी मैं सब्र कर लूँ. लेकिन उनका लंड तो 5 मिनट भी मेरी चूत में नही ठहरता. वैसे दोस्तों बाहर के लड़के मेरे पर बहुत लाइन मारते है. लेकिन मैं उन पर ध्यान कम ही देती हूँ.
फिर आपको तो पता ही है की एक न एक दिन दिल पिघल ही जाता है. क्योंकि मेरी मस्त जवानी को देखकर पास का एक लड़का मनोज मेरे को हमेशा फॉलो करता था. और वो मुझसे बातें करने के लिए तडप रहा था. इसलिए उसने एक दिन मैं बाजार गयी हुई थी तब गली में मुझे रोककर प्रपोज कर डाला. हालाँकि पहले तो मैंने नौटंकी की लेकिन फिर मुझे लगा की ये हट्टा-कट्टा नौजवान है क्यों न इसकी जवानी के मजे लूटते है.
इसलिए दोस्तों मैंने हां कर दी. और इसके बाद हमारी नार्मल बातें होती रही. और फिर आई मुद्दे की बात उसने मेरे को सेक्स के लिए बोला. तो मैं भी इस काम के लिए तैयार थी. लेकिन कुछ दिन तो उसने होटल में ले जाकर मेरे को पेला. फिर मैंने सोचा की होटल का खर्चा क्यूँ करना जब घर में कोई नही रहता तो. इसलिए अब मैं मनोज को अपने घर पर बुलाकर अपनी चूत मरवाने लग गयी थी.
क्योंकि दोस्तों मेरे ससुराल में एक जेठ है तथा जेठानी का देहांत हो चूका है. तथा मेरे पतिदेव आशीष अक्सर घर से बाहर ही रहते है. इसलिए मैं घर पर अकेली ही रहती हूँ. और जेठजी भी अक्सर बाजार में गये हुए रहते है. फिर दोस्तों एक दिन मनोज घर पर आया हुआ था. और हम दोनों कमरे में चुदाई कर रहे थे. तथा घर का मैंन गेट बंद था. ये समय था दोस्तों दोपहर का.
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लेकिन फिर अचानक से मेरे जेठजी पधार गये. और उन्होंने मेरे को आवाज लगाकर गेट को खुलवा लिया. फिर मैंने मनोज को छुप जाने को बोला. हालाँकि मनोज छूप भी गया था. लेकिन बाहर पड़ी चप्पल के कारण मनोज के घर में होने का आभास जेठजी को हो गया था. इसलिए अब जेठजी को डाउट हुआ तो बोले- मंजू घर में कोई है क्या?
मैं- नही जेठजी.
जेठजी- फिर ये चपल किसकी है?
मैं- ये मैं ही पहनती हूँ.
जेठजी- इतनी बड़ी चप्पल तुम पहनती हो.
मैं- हाँ जेठजी कभी-कभी बड़ी चप्पल पहनने का मन करता है.
जेठजी- अच्छा ठीक है बेटा.
इसके बाद जेठजी चले गये और मैंने और मनोज ने सोचा की अब जेठजी अपने कमरे में है. लेकिन वो पहले से एक खिलाड़ी व्यक्ति थे चुदाई के मामले में इसलिए उन्होंने पास वाले कमरे की खिड़की से पूरा ध्यान रखा और फिर कमरे से बाहर मनोज को निकलता देख लिया. हालाँकि मनोज इस दौरान घर से जा चूका था.
इसके बाद जेठजी बाहर आए और बोले- ये लड़का कौन था मंजू?
मैं- ये कुछ बेचने वाला था.
जेठजी- बेचने वाला घर के कमरे तक आ जाता है क्या? सच बताओ मंजू.
मैं- आपको क्या बताऊ जेठजी आपके छोटे भाई से तो कुछ होता नही है इसलिए ये मेरा बॉयफ्रेंड है इसी के सुख की वजह से मैं इस घर में टिकी हुई हूँ.
जेठजी- अच्छा, तेरे को इतनी चुदाई की प्यास है क्या?
मैं- भरी जवानी में किसे नही होती है.
जेठजी- तो मुझे बोल देती बाहर मुह मारने से बदनामी नही होती क्या?
मैं- जेठजी आप?
जेठजी- हाँ, जैसे तेरा मन करता है ठीक वैसे ही मेरा भी तेरे को चुदाई करने का बहुत मन करता है. लेकिन शर्म के कारण मैं तुझे कभी कह नही पाया और मैं दिन में एक बार तेरे को याद करके मूठी मार लेता हूँ. क्योंकि मंजू तुम हो ही चिकनी चमेली हर किसी का मन बहका सकती हो.
मैं- सच्ची जेठजी?
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जेठजी- हाँ कोई शक है क्या तेरे को?
मैं- नही जेठजी, लेकिन आप मेरे रिश्ते में जेठजी लगते है इसलिए ये सब ठीक नही है. मैं आपको मुह नही दिखाती हूँ चूत कैसे दिखाउंगी?
जेठजी- ये तेरा वहम है मैं बाथरूम से झांककर तेरे पुरे नंगे बदन को हमेशा देखता हूँ. बहुत चिकनी चूत है तुम्हारी मन करता है उसमे अपने धक्के देता ही रहूँ.
मैं- ओह्ह माय गॉड, इसका मतलब आपने सब कुछ देख रखा है.
जेठजी- हाँ तेरे को बुरा लगा तो सॉरी मंजू.
इतना कहते ही मैं जेठजी को अपनी बाहों में भर ली. और उनकी पीठ पर हाथ फिरानी शुरू कर दी. फिर में उनके पास उनकी बगल में बैठ गई और बातों ही बातों में उन्होंने मेरी जांघ पर हाथ घुमा दिया. उनका ये अंदाज मेरे को बहुत भा रहा था.
मेरे से भी इस दौरान रहा नही जा रहा था इसलिए मेरा हाथ उनके लंड तक पहुंच गया और मैंने महसूस किया कि वो तनकर खड़ा था. इसके बाद जेठजी ने वहीँ से मुझे बेडरूम में जाने को बोला. और फिर मुझे पकड़ कर लेटा दिया और मेरे मुहं पर अपना हाथ रखकर कहा कि आज में तेरी प्यास बुझा रहा हूँ और ज़्यादा हिलना मत बस चुपचाप पड़ी रहना समझी.
इसके बाद जेठजी ने मेरे सूट को उतारकर फेक दिया. में अब थोड़ा बहुत विरोध कर रही थी जिससे उन्हें लगे कि में मना कर रही हूँ लेकिन में तो उनके इस काम से अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी. क्योंकि जेठजी भी कई सालों से चूत के प्यासे थे. और मुझे इस बात की ख़ुशी थी की वो एक अनुभवी चुदाई वाले व्यक्ति है इसलिए शायद वो ही आज मेरी चूत का पानी निकाल सकते है.
अब दोस्तों मैं इस दौरान उनके सामने केवल ब्रा और पेंटी में ही थी. मैं इस दौरान लाल रंग की पेंटी पहन रखी थी. इसलिए मेरी गोरी-गोरी जांघों पर वह रंग खूब जम रहा था. और फिर जेठजी मेरी जाँघों पर अपना प्यारा सा हाथ फिराने के लिए लग गये. और मेरे को अंदर ही अंदर बहुत मजा आ रहा था.
इसके बाद वो मेरे ऊपर आये और मेरे रसीले होठों पर किस करना शुरू कर दिए. तथा मेरे बदन के हर अंग को चाटने लगे.. में गरम हो गई लेकिन अभी भी मैंने उनका साथ नहीं दिया. फिर उन्होंने मेरी ब्रा को खींचकर उतार दिया और मेरे बूब्स को पकड़कर चूसने लगे. में अब और भी गरम हो गई. उन्होंने अब मेरी पेंटी को भी उतार दिया और ध्यान से देखा कि मेरी चूत गीली हो गई है.
जेठजी बोले- मंजू तेरी चूत में से तो बहुत पानी निकल रहा है. क्या उस लडके ने तेरी चुदाई नही की क्या?
मंजू- वो भी आपके भाई जैसा ही है, 5 मिनट भी नही ठहरता लेकिन कम से कम दिन में एक बार खुजली तो कर जाता है.
जेठजी- चिंता मत करो इस चूत को आज भोसड़ा बनाकर ही मानूंगा मैं भी.
इतना कहते ही अब जेठजी ने बुरी तरह से मुझे अपनी बाहों में दबोच लिया और किस करने लगे.. कभी होंठो पर, कभी गांड पर, तो कभी चूत के अंदर, तो कभी पेट पर और अब में भी उनका साथ देने लगी. तभी कुछ देर बाद वो अपना मोटा बड़ा लंड मेरी चूत में घुसाने लगे.. लेकिन मैंने उन्हे रोक दिया.
फिर जेठजी बोले- क्या हुआ रंडी? क्या इसलिए डर लग रहा है कि यह बहुत बड़ा है?
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मैं- मेरे को आपका लंड चुसना है.
इसके बाद मैंने धीरे से नीचे झुककर.. उनके लंड को पकड़कर अपने मुहं में डालकर चूसना शुरू कर दिया और चूसना शुरू करते ही वो पागल हो गए और बिस्तर पर लेट गए और कहा कि मंजू तू तो सचमुच की रंडी है.
इसके बाद मैंने उनके लंड को बहुत देर तक चूसा और उनका पानी भी पी लिया और उनका लंड अपनी चूत पर रखकर उसमे घुसाने की कोशिश करने लगी. तो वो बोले कि अभी रुक जा और वो मुझे बिस्तर पर लेटाकर मेरी चूत को चाटने लगे.. मैंने उनका सर पकड़ लिया और अपनी चूत पर दबाने लगी.
आपको बताऊ दोस्तों इससे पहले मनोज और मेरे पति ने भी मेरी चूत को बहुत चाटा था लेकिन जेठजी जैसे अंदाज से कभी नही चाटा. क्योंकि जेठजी ने जैसे ही मेरी चूत की गहराई तक अपनी जीभ घुमाई तो मेरा तो बिना लंड डाले ही पानी निकल गया और मैं एक बार तो झड़ गयी… और मैं इस दौरान उनका सर पकड़कर जेठजी को महसूस कर रही थी.
मेरी सिसकारियां सुनकारी जेठजी अब काफी जोश में आ चुके थे और वो लगातार मेरी चूत को चाटे जा रहे थे. और फिर से मैं जोश में आ चुकी थी. करीब 10 मिनट तक मेरी चूत को चाटने के बाद अब मैं फिर से आः….आह…. आह….. जेठजी ….. बहुत मजा आ रहा है… उ….. आह…. आह…. आह…. अहा…… और मत तडपाओ जेठजी डाल दो अपना हथियार मेरी चूत के अंदर मेरे से नही रहा जा रहा है.
इतना सुनते ही अब जेठजी खड़े हुए और फिर उन्होंने मेरी चूत को चाटकर साफ कर दिया और अपना लंड डालने के लिए तैयार हो गए और जैसे ही उन्होंने अपना लंड मेरी चूत में डाला तो मेरी बहुत ज़ोर से चीख निकल गई और लंड अभी आधा ही गया था और मैंने दर्द की वजह से अपनी गांड ऊपर उठा ली. तो उन्होंने मेरी गांड के नीचे एक तकिया लगाया.. जिससे मेरी चूत ऊपर हो गई और उनके हर एक धक्के से लंड मेरी चूत की जड़ तक पहुंच रहा था और वो ज़ोर-ज़ोर से धक्के लगाते हुए पूरा का पूरा लंड मेरी चूत में डाल रहे थे लेकिन इस बार में चीखकर एकदम शांत हो गई.
दोस्तों जेठजी का लंड बहुत मोटा और बड़ा था. मुझे पहली बार यह एहसास हुआ.. फिर उन्होंने मुझे चोदना शुरू कर दिया. करीब 30 मिनट तक चोदने के बाद वो मेरी चूत में ही झड़ गए और मेरे पास में आकर लेट गए और थोड़ी ही देर के बाद उनका लंड फिर से खड़ा हो गया.
इसके बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाकर ज़ोर-ज़ोर से चोदना शुरू कर दिया और इस तरह से उन्होंने मुझे उस दिन पहली बार 5 राउंड दिए. और उनका हर राउंड मुझे बेहतरीन अहसास दिलवा रहा था. क्योंकि में थककर चूर हो गई और हम दोनों एक साथ ही नंगे सो गए. इसके बाद शाम को 5 बजे फिर से हम उठे अपने-अपने कपड़े पहने और काम पर लग गये.
तथा इसके बाद मेरी चूत के दीवाने जेठजी मेरे पीछे-पीछे ही रहे और मेरे को बोले- अब तो नही है ना मंजू तेरे को मनोज की जरूरत?
मैं- कैसी बातें करते हो जेठजी आपकी चुदाई का कोई जवाब नही है उनके पास. ऐसे ही अगर आप मेरे को चोदोगे तो मैं बिलकुल आपकी ही दीवानी बनी रहूंगी.
जेठजी- लेकिन ध्यान रखना आशीष को इस बात का जरा भी ध्यान नही पड़ना चाहिए.
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मैं- नही जेठजी आप चिंता मत करो.
इसके बाद फिर से रात को 3 बार जेठ ने बहु को चोदा. जिसके बाद अगली सुबह मेरी चूत का हाल जेठजी ने ऐसा कर दिया था की, मेरे से चला भी नही जा रहा था. लेकिन उनकी चुदाई ने मेरे को पागल कर दिया था. जिसकी वजह से मैं भी अब उनके बिना नही रह पाती हूँ. और पीछे 3 वर्षों से मैं अपने जेठजी का लंड हमेशा लेकर अपनी चूत की प्यास भुजा लेती हूँ. इससे मेरे जेठजी भी खुश और मैं भी खुश.
दोस्तों ये jeth aur bahu ki chudai कहानी आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह jeth ne bahu ko choda कहानी बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी ये Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.