Didi Ki Chudai Kahani – बड़ी दीदी ने खड़ा लंड देखकर बुझाई अपनी प्यास
नमस्कार मित्रों, स्वागत है आप सभी का आपके अपने फेवरेट ब्लॉग gandistory.com पर हाजिर आपके सामने एक बार फिर से हरीश जी द्वारा भेजी गई Didi Ki Chudai Kahani लेकर. दोस्तों यह Sister sex kahani मेरी सबसे बड़ी बहन ललिता की है. ललिता दीदी को मैंने पिछले दिनों अपने लंड का स्वाद चखाया था.
दरअसल दोस्तों आपको बता दूँ की मेरी उम्र फ़िलहाल 17 बरस की है. और मेरी ललिता दीदी की उम्र अभी 31 बरस की होने को आई है. हम बिहार के आरा जिले के रहने वाले है. तथा मैं अभी अपनी पढाई करा रहा हूँ वहीँ ललिता दीदी शादी के बाद एक ग्रहिणी बन गयी है. मेरी ललिता दीदी की शादी को करीब 5 बरस होने को आए लेकिन वह अभी तक एक भी बच्चा कन्सीव नही कर पाई.
हो सकता है की मेरे जीजू में ही कुछ कमी हो. लेकिन दोस्तों इस बारें में कह पाना मुश्किल है. क्योंकि मुझे इस बारें में तो बिलकुल पता है की ललिता दीदी जब मैं छोटा था तो घर में ही अपने बॉयफ्रेंड मनीष को बुलाती थी. और घंटों तक दोनों एक ही कमरे में पड़े रहते थे. और मुझे चोकलेट के पैसे देकर बाहर भेज दिया करते थे. इसलिए मेरी ललिता दीदी थी तो शुरू से ही चुद्द्क्दद.
और हो भी क्यूँ न उनका वो रसीला बदन हर किसी को दीवाना बनाने के लिए काफी है. उनके 36 के साइज़ के बूब्स और उनकी गांड के तो कहने ही क्या है. दोस्तों जब वह साड़ी में रहती है तो उनका स्लिम सा बदन मेरे को बहुत भाता है. लेकिन चचेरी बहन होने के कारण कुछ कर नही पाता हूँ.
चलो अब अपनी कहानी शुरू करते है. ये बात सर्दियों की है दोस्तों जब ललिता दीदी घर पर आई हुई थी. इस दौरान रात के समय मैं और ललिता दीदी दोनों एक ही कमरे में अलग-अलग खटिया पर सो रहे थे. लेकिन दोस्तों पता नही उनका कोई बहाना था या हकीकत में ललिता दीदी को सर्दी ज्यादा महसूस हो रही थी. वह बोली- हरीश तुम एक काम करो मेरी खटिया पर ही आकर मेरे साथ सो जाओ. मेरे को सर्दी बहुत महसूस हो रही है.
मैं बोला- ठीक है दीदी, अभी थोड़ा होमवर्क और निपटा लूं इसके बाद मैं आपकी खटिया पर ही सो जाऊंगा आपके साथ ही.
ललिता दीदी- ध्यान रखना पक्का सोना है.
मैं- हाँ दीदी पक्का सोऊंगा, चिंता न करें.
इसके बाद दोस्तों मेरा होमवर्क पूरा हो जाता है और अब मेरा सोने का समय हो चलता है. जिसके बाद मैं ललिता दीदी की खटिया पर रजाई हटाकर उसमे घुस जाता हूँ. और फिर घुसते ही ललिता दीदी ने मेरे को सर्दी के मारे एकदम अपने पास चिपका लिया था.
मैंने इस दौरान महसूस किया की, ललिता दीदी पहले से ही काफी गर्म हो रखी थी. इसलिए वह मुझे एकदम चिपका के सो रही थी. जिसकी वजह से दोस्तों मेरे भी मन में अब चुदाई के ख्याल आने शुरू हो गये. क्योंकि अब मैं कोई बच्चा तो था नही दिन में 2 बार लंड हिलाने वाला बालक बन चूका था. ललिता दीदी के बूब्स की वो गर्मी मेरे को अब दीवाना बना रही थी.
क्योंकि ललिता दीदी अब मेरे को कसकर पकड़ रखी थी. इसलिए अब मेरा लंड धीरे-धीरे खड़ा हुए जा रहा था. और फिर मैंने भी अपना एक पैर ललिता दीदी के जांघों में डाल दिया. और फिर मैंने भी महसूस किया की ललिता दीदी की जांघें कितनी मुलायम है. जिसकी वजह से लंड और खड़ा हुए जा रहा था. ऐसा करते-करते अब मैं ललिता दीदी के जांघ पर ही अपना लंड मसलने लग गया.
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और दोस्तों मेरे को इतना मजा आ रहा था की पूछो मत इस दौरान थोड़ी देर बाद दीदी बोली- हरीश तू बड़ा हो गया है.
मैं- कैसे दीदी?
ललिता दीदी- कुछ नही, चुपचाप सो जाओ.
मैं- नही दीदी बताओ ना. प्लीज!
ललिता दीदी- सो जा सुबह बताउंगी.
मैं- ठीक है दीदी.
इतना कहते ही मैं कहाँ रुकने वाला सो गया और रात के 12 बजे तक दीदी के ऊपर आकर अपने लंड को आगे-पीछे करने लग गया. क्योंकि मैं इस दौरान नींद में था इसलिए मेरे को पता नही चल रहा था. लेकिन यहीं से शुरुआत हुई मेरी दीदी की चुदाई की.
क्योंकि इस दौरान केवल सो मैं रहा था. लेकिन दीदी जग चुकी थी. और मेरी इन हरकतों के कारण वह दीवानी हुई जा रही थी. और अपना आप को चुदाई के लिए तैयार कर ली थी. फिर उन्होंने मेरे सर को पकड़कर किस किया. जिसकी वजह से मेरी नींद खुल गयी.
मैं- आप क्या कर रही है दीदी?
ललिता दीदी- कुछ नही जो तू कर रहा है उसी का जवाब दे रही हूँ.
मैं- मैंने क्या कर दिया?
ललिता दीदी- पागल मत बनाओ मेरे को सब पता है क्या कर रहा था.
फिर मैं समझ गया की दीदी को सब पता चल गया है की मैं उनको ऊपर आकर पेल रहा था. तो मैंने घबराते हुए दीदी को बोला- सॉरी दीदी.
ललिता दीदी- अरे कोई बात नही होता है जवानी में सबके साथ होता है. तेरी इन हरकतों से मेरे भी अंदर कुछ होने लग गया है.
मैं- कैसे दीदी?
ललिता दीदी- जैसे तेरे अंदर हो रहा है वैसे ही. अब ज्यादा बन मत और मेरे से एक वादा कर.
मैं- बोलो दीदी.
ललिता दीदी- पहले प्रोमिस कर किसी को बतायेगा तो नही ना?
मैं- नही दीदी, पक्का किसी को नही बताऊंगा. आप तो बोलो बेझिझक.
ललिता दीदी- चलो मैं ये कह रही थी की, तुम मेरे साथ जो करना चाहो वो कर सकते हो. क्योंकि मेरे को भी अब बहुत फीलिंग्स आने लग गयी है.
मैं- सच्ची दीदी?
ललिता दीदी- और क्या तो पिछले एक घंटे से तू मेरे ऊपर आकर आगे पीछे जैसा कर रहा है, फीलिंग्स तो आनी ही थी.
इतना कहते ही दोस्तों ललिता दीदी मेरे ऊपर आ गयी और हम इस दौरान रजाई के अंदर समाये हुए थे. और ललिता दीदी ने मेरे उपर आकर मेरे को किस करना शुरू कर दिया. और उनके वो किस मेरे को आजतक याद है जिस कदर वह पागलों की तरह मेरे होठों को चूमे जा रही थी. आये हाय दोस्तों…. सीरियसली बहुत मजा आ रहा था. और उनके किस करने के अंदाज से ही मेरे लंड ने तो पानी छोड़ दिया था.
क्योंकि दीदी एक अनुभवी चुदाई वाली लड़की थी. इसलिए वह हर किसी का लंड का पानी निकलवा सकती थी. इसके बाद मैंने उनकी कमर में हाथ डाला और उसे अपनी तरफ खींच लिया. ललिता दीदी ने मुँह नीचे कर लिया. मैंने उनका चेहरा पकड़ा और लाल लिपस्टिक लगे होंठों को चूसने लगा. ललिता के होठ इतने रसीले थे की मैंने इस दौरान उनको अगले 10 मिनट तक एक ही स्पीड से चूसता रहा.
और आपको बताऊ दोस्तों मेरे को बहुत मजा आने लगा था. क्योंकि मेरा लंड अभी ही तो झड़ा था लेकिन अब उनके होठों के कारण फिर से खड़ा हो गया था. फिर मैं ललिता दीदी के दूध दबाने लगा. ललिता दीदी पहले से ज्यादा सेक्सी हो गयी थी. मै प्ललिता दीदी की 36 साइज की चूचियाँ दबा रहा था और ललिता दीदी आँखे बंद किये आपने मुँह से कामुक आवाज़ें आह…. आह….. हरीश….. तू तो तगड़ा खिलाड़ी है.
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मैं बोला – हूँ नही आपने बना दिया?
दीदी- कैसे?
मैं- आपको देखकर कोई भी खिलाड़ी बन सकता है. हाहाहा!
इसके बाद मै ललिता दीदी की गर्दन को चाटते हुए उनका ब्लाउज खोल रहा था. ब्लाउज खुलते ही दीदी की चूचियाँ ब्रा में दिखने लगी. मै ब्रा के ऊपर से ही उनकी चूचियाँ दबाने लगा. इस दौरान ललिता दीदी मेरे होंठों को चूस रही थी. फिर मैंने दीदी की ब्रा ऊपर कर दी और में उनके निप्पल पकड़ के मसलने लगा.
ललिता दीदी मेरे होंठों को खींच रही थी. मैंने उनकी चूचियाँ मुँह में भर ली और उनकी चूचियाँ दबा दबा के चूसने लगा. और मेरे बूब्स मसलने के कारण ललिता को बहुत मजा आने लगा और वो फिर से आह….हरीश ….आह….आह…. करने लग गयी.
और फिर वह रजाई से बाहर निकलकर खटिया पर बैठ गयी और मेरी पेण्ट खोलने लगी. क्योंकि मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था. लेकिन वह अपनी पहली पिचकारी अंडरवियर में ही छोड़ दिया था. इसलिए मेरी चड्डी उतारकर दीदी बोली- ये तूने क्या किया?
मैं- पता नही दीदी, हो गया अपने आप ही आप हो ही ऐसी.
दीदी- क्या मतलब?
मैं- इतनी होठ लड़की किसी का भी निकलवा सकती है.
फिर दीदी ने मुस्कुराते हुए मेरे लंड को चुसना शुरू कर दिया. मेरा 7 इंच का लंड उनके सामने आ गया. दीदी ने मेरा लंड पकड़ लिया और उसे आगे पीछे करने लगी. मेरा सुपाड़ा बाहर आते ही. इस दौरान वो मेरा लंड बहुत अच्छे से चूस रही थी और मै उनकी चूचियाँ दबा रहा था. कुछ देर लंड चूसने के बाद, मैंने दीदी की साड़ी और पेटीकोट निकाल दिया. अब प्रिया दीदी सिर्फ पेंटी में मेरे सामने थी.
और आपको बताऊ इस दौरान उन्होंने काले रंग की पेंटी पहन रखी थी जो की उनकी गोरी जाँघों पर काफी सूट कर रही थी. और मेरे लंड को फिर से तन्तानने के लिए काफी थी. फिर मैंने ज्यादा देर न करते हुए उनकी पेंटी भी निकाल दी. दीदी की चूत (didi ki chut) बिलकुल साफ़ थी. बालो का नामो निशान नहीं था. और अंदर से एकदम गुलाबी तथा गीली लगी.
इसलिए मैंने पूछा, दीदी आपका भी हो गया क्या?
दीदी- कैसे?
मैं- अंदर से ज्यादा ही गीला-गिला लग रहा है.
दीदी- तेरी इस किस की वजह से मेरे को बहुत मजा आया है इसलिए हो गया.
इतना कहते ही मैंने कहा- दीदी अब मेरा आपकी चूत को चूसने का मन कर रहा है.
दीदी बोली- मेरे को भी चूत (bahan ki chut) चुस्वाने में बहुत मजा आता है. आजा मेरे पेरों के बिच में और लग जा अपने काम पर.
इतना कहते ही मैंने टूट पड़ा और ललिता दीदी की चिकनी चूत पर अपनी जीभ घुमाने लग गया. और करीब 5 मिनट तक जीभ फिराने के बाद ललिता दीदी काफी जोश में आ गयी थी. और अब वो मेरे सर को पकड़कर अपनी चूत पर रखनी शुरू कर दी थी. और मेरे से बोल रही थी. हटना मत ऐसे ही चूसते रहो मेरे को बहुत मजा आ रहा है….आह…आह…आह…आह.
लेकिन दोस्तों मेरे से अब रहा नही जा रहा था. क्योंकि मेरा लंड अब ललिता दीदी की चूत में जाने को बेताब हो चला था इसलिए मैंने कहा दीदी एक बार लंड लेकर देखो इससे भी तगड़ा मजा आएगा.
दीदी- तू ज्यादा जनता है क्या?
मैं- नही दीदी, लेकिन लेकर तो देखो.
दीदी- आजतक मैंने कई लंड ले लिए ज्यादा सिखा मत और चूसता रह.
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फिर दोस्तों मैंने भी अब ललिता के एक बूब्स को हाथ में लिया तथा अब मैं उनकी चूत के दाने पर जल्दी-जल्दी अपनी जीभ घुमाने लग गया. जिसकी वजह से ललिता दीदी झड़ गयी. और अब मैंने सोचा की ये सही समय है इनकी चुदाई करने का इसलिए मैं उठा और उनके टांगों को अपने कंधों पर लेकर अपने लंड को उनकी चूत में डाल दिया.
दीदी की चूत में लंड आराम से चला गया और मैंने धक्के लगाना शुरू कर दिए. मेरे तेज तेज धक्को से दीदी बहुत आवाज निकाल रही थी. उनकी कामुक आवाज सुनके मेरा जोश और बढ़ रहा था. और इस दौरान दीदी आह…आह…ईईइ….आऔउ……हरीश ऐसी आवाज निकाल रही थी. दीदी ने मेरा लंड निकाला और मेरे सामने डोगी स्टाइल में खड़ी हो गयी. मैंने अपने लंड को पीछे से उनकी चूत मे डाल दिया और उनके बालो को पकड़ के चुदाई करने लगा.
क्योंकि ये मेरा दूसरा राउंड था इसलिए मेरा अभी झड़ने वाला नही था. इसलिए मैंने ललिता दीदी को करीब 10 मिनट तक ऐसे ही डौगी स्टाइल में चोदना जारी रखा. और इस दौरान उनकी चूत में से फच…फच….फच… की आवाजे आने लग गयी थी. क्योंकि मेने धक्के ही इस लेवल के लिए थे की उनका पानी इस दौरान 2 बार निकल चूका था. और वो अब चुदाई का भरपूर मजा ले रही थी.
दीदी बोली- हरीश तू तो बड़ा चुदाई वाला मास्टर है. कहाँ से सिखा तुमने ये सब?
मैं- आप ही से सिखा है?
दीदी- मैंने कब सिखा दिया तेरे को?
मैं- जब आप पहले अपने बॉयफ्रेंड को बुलाती थी घर पर तब मैंने चुपके से आपको देख लेता था.
दीदी- हट पागल, इतना ध्यान रखते हो मेरा.
मैं- आपको पुरे दिन ख्यालों में रखता हूँ मेरी दीदी कम जान ज्यादा हो तुम.
इतना कहकर मैं दीदी को अगले 5 मिनट तक और पीछे से धक्के दिया और फिर उनकी चूत में ही अपना माल छोड़ दिया. और फिर अपना लंड निकालने लग गया. तो दीदी बोली- क्या कर रहा है?
मैं- लंड निकाल रहा हूँ.
दीदी- नही इसे अंदर ही रहने दे बहुत मजा आ रहा है.
इतना कहते ही दोस्तों मेरे लंड में फिर से जान आ गयी. और मैंने बोला दीदी आप कितनी सेक्सी है फिर से लंड खड़ा होने लग गया है.
दीदी- हाँ तो ये अच्छी बात है, हो जाने दो इसे खड़ा.
और फिर दीदी मेरे को किस करने लग जाती है और मैं भी दीदी को पुरे बदन पर किस कर रहा होता हूँ. तभी दीदी भी फिर से जोश में आ गयी और बोली- इस बार तू मेरे को उस टेबल पर ले जाकर अपने लंड का जोश दिखा तब मेरे को मजा आएगा. क्योंकि मेरे को टेबल पर ही मेरा बॉयफ्रेंड चोदता था.
मैं- हाँ दीदी मैंने देखा था. और आप इस दौरान बहुत चीखती थी.
इतना कहते ही दीदी टेबल पर चली गयी और पीछे दीवार का सहारा लेकर अपने टांग चौड़े कर दिए. और अब मेरे को उनकी चूत की गुलाबी गिरी साफ-साफ दिख रही थी. और मेरे लंड को सख्त बनाने के लिए ये सब काफी थी.
मैंने भी फिर से उनकी रसीली चूत को चूमना शुरू कर दिया. और उनको फिर से मजा आने लग गया. इस दौरान दीदी- आह…आह….आह…आह…हरीश …..उ….उ… उ… ईईई….. करने लग गयी.
फिर मैंने ज्यादा देर न करते हुए ललिता दीदी की चूत में फिर से अपना लंड घुसा दिया और अब मैंने उनको निचे खड़ा-खड़ा चोद रहा था. और मेरे को इस दौरान बहुत मजा आ रहा था. क्योंकि मैंने एक नई चुदाई की स्टाइल सिख ली थी. इसलिए मैंने बोला- दीदी वास्तव में आप हो तो चुदाई की मास्टर ही.
दीदी- कैसे?
मैं- मेरे को एक और स्टाइल सिखा दी.
दीदी- ये तो कुछ नही है, अभी मेरे को बहुत सारी स्टाइल आती है. तेरे को सभी स्टाइल सिखाउंगी चिंता न कर.
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इतना कहते ही मैं जोश में आ गया और फिर करीब आधे घंटे तक खड़े-खड़े दीदी को टेबल पर बिठा कर चुदाई कर रहा था. तो दीदी का पानी निकलकर पूरी टेबल पर फ़ैल गया था. क्योंकि मैंने झटके ही इस लेवल के दिए थे की वो अब आधे घंटे की चुदाई में 3 बार और झड़ चुकी थी. और फिर से वह आह…आह…आह… करने लगी थी.
इसके बाद मैंने भी अपनी स्पीड बढाई और जोर-जोर से झटके देने के बाद फिर से अपना माल दीदी की चूत में ही छोड़ दिया. और काफी देर तक उनके अंदर ही मेरे लंड को घुसाए रखा. फिर मैंने बोला- दीदी अब सो जाएँ?
दीदी- अभी कहाँ अभी तेरे को खटिया वाली स्टाइल तो सिखाई ही नही.
इसके बाद दीदी मेरे को खटिया पर ले गयी और खुद उलटी लेट गयी तथा मैं उनके ऊपर आकर एक बार एक राउंड हो ले लिया. इस दौरान मैं उस रात ललिता 5 बार “दीदी को चोदा”. और उनको मेरी चुदाई इतनी पसंद आई की वो आज भी मेरे को ससुराल जाने के बाद बहुत मिस करती है. और एक बार तो मैं उनको उनके ससुराल जाकर ही पेल के आ चूका हूँ.
और अब वह फिर से घर आने वाली है. इसका मेरे को बहुत इन्तजार है. क्योंकि दोस्तों ललिता दीदी की रसीली चूत के आगे कुछ भी अच्छा नही लगता है. काश वह मेरी बीवी होती तो कितना मजा आता जिन्दगी मैं.
दोस्तों ये Didi ki chudai kahani आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Cousin sister sex story बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.