Bua Ki Chudai Kahani – लंड की प्यासी बुआ की चूत की आग बुझाकर ही माना
नमस्कार दोस्तों! आप सभी का स्वागत है आपके फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com पर. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर पंकज जी द्वारा भेजी गयी Bua Ki Chudai Kahani लेकर. दोस्तों मेरी यह Bua sex story एक सच्ची घटना है जिसमे मैंने अपनी कुंवारी बुआ को हस्तमैथुन करते पकड़कर असली लंड का मजा दिया है.
क्योंकि दोस्तों मेरी सुशीला बुआ अभी तक 30 बरस की होने को आई लेकिन बदकिस्मती से उनकी अभी तक शादी नही हुई है. क्योंकि बुआ को अपनी खूबसूरती पर बहुत नाज है इसलिए उसे कोई भी लड़का दिखाओ तो घरवालों को ना बोल देती है. और घरवालों को लगता है की बेटी एकदम सती-सावित्री है. लेकिन दोस्तों जब से मैंने आजकल उनकी हरकतें देखी है तब से मेरा ये डाउट भी क्लियर हो गया.
चूँकि बुआ का अभी तक मेरे को पता नही था की वो बॉयफ्रेंड भी बना रखी. फिर पिछले दिनों से वह छत पर जाकर किसी से घंटो तक बातें करती थी. इसलिए कभी-कभी मैं भी उनके पीछे जाकर उनकी बातें सुनता था. इसलिए जब वो अपने बॉयफ्रेंड मनीष के संग सेक्सी बातें करती थी तो मेरे तो मानों दोस्तों की होश उड़ गये थे.
अब मैं दोस्तों आपको अपने बारें में बताऊ तो मैं जम्मू-कश्मीर के पहलगाम का रहने वाला हूँ. तथा मेरी उम्र अभी 17 बरस की हो गयी है. तथा मैं इस वेबसाइट (Gandi Story) का बहुत बड़ा फैन हूँ. क्योंकि मेरे को मूठ मारना भी इसी वेबसाइट पर कहानी पढ़कर अच्छा लगता है. इसलिए दोस्तों मैं भी आपके सामने अपने साथ बीती सच्ची कहानी बता रहा हूँ.
दोस्तों हम संयुक्त परिवार में रहते है. जहाँ मेरे 3 बुआ है और 2 मेरे पापा और चाचा तथा उनकी बीवियां यानी मेरी चाची और मम्मी शामिल है. तथा मेरी बड़ी बुआ की शादी हो चुकी है. लेकिन जैसा की मैंने आपको पहले बताया की सुशीला बुआ की शादी अभी तक नही हो पाई है. इसलिए दोस्तों पिछले दिनों से मैं बुआ के पीछे-पीछे लगा रहता था की बुआ कोई गलत कदम न उठा ले. यानी की घर से भागने जैसा.
इसलिए वैसे भी जब वो छत पर बातें करती थी तो उन्ही बातों को सुनकर मैं मूठ मार लेता था. क्योंकि वो अपने फ्रेंड मनीष से पूरी चुदाई वाली भूख दिखाती थी. और ये सब सुनकर मेरे को बहुत मजा आता था. फिर दोस्तों एक दिन रात में मैंने सोचा की आज बुआ को देखकर आते है वो पढाई कर रही है या कुछ और?
इसलिए मैंने पास के ही कमरे में गया जहाँ बुआ ने कुण्डी लगा रखी थी. इसलिए मैं चुपचाप खिड़की की तरफ झुककर देखा तो अंदर पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था. और मेरे को वो नजारा साफ़-साफ़ दिखाई दे रहा था. जहाँ बुआ उल्टी लेटकर चूत पर तकिया लगाकर आगे-पीछे हो रही थी. और इस दौरान वह काफी तड़प रही थी. और उनकी ये तडप देखकर दोस्तों मेरा तो बिना हिलाए ही लंड झड़ गया.
क्योंकि सुशीला बुआ का गोरा बदन मेरे को काफी दीवाना बना गया था. और अब लंड झड़कर फिर से खड़ा होने लग गया था. क्योंकि इस दौरान मैं बुआ को करीब 45 मिनट से देख रहा था. वह आगे पीछे होकर काफी तडप महसूस कर रही थी. लेकिन उनसे उनकी चूत का पानी नही निकल पा रहा था. इसलिए मेरे दीमाग में आईडिया आया और मैंने थोड़ी हिम्मत दिखाई और बुआ के कमरे का दरवाजा खटखटा दिया.
बुआ बोली- कौन?
मैं- मैं हूँ पंकज, खोलो बुआ.
बुआ- इतनी देर क्या काम है तेरे को, 11 बज गये रात के?
मैं- एक बार खोलो तो सही बुआ.
इतना सुनकर बुआ ने जल्दी-जल्दी से अपने कपड़े पहने और फिर कमरे की कुण्डी खोल दी. फिर बोली- हाँ बोलो पंकज क्या काम है इतनी देर रात को?
मैं- कुछ नही बुआ, मेरा सोने का मन नही था इसलिए आपके पास चला आया.
बुआ- अच्छा, हमेशा तो नही आते, आज नींद कैसे नही आई? दोपहर में सो गये थे क्या?
मैं- नही बुआ, लेकिन पता नही क्यूँ नही आ रही. आप सो गयी थी क्या?
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बुआ- हाँ थोड़ी सी आँख लगी ही थी.
मैं- सॉरी बुआ मैंने आपको डिस्टर्ब कर दिया.
बुआ- कोई बात नही, आ जाओ अंदर.
अब दोस्तों मुझे कैसे जैसे भी चुदाई की वो बातें शुरू करनी थी. इसलिए मैंने सामने देखा की बुआ के बेड की बेडशीट गीली हो रखी थी. इसलिए मैंने पूछा- बुआ ये बेडशीट गीली कैसे हुई?
बुआ- अरे यहाँ तो पानी लग गया था. अभी मैंने पानी पि रही थी इसलिए थोड़ा गीर गया.
फिर मैंने वहां पर थोड़ा हाथ फेरा तो चिकना-चिकना लगा और मैंने बोला- बुआ ये कौनसा पानी है, जो इतना चिकना है, देखो इसमें से तो लार जैसा कुछ निकल रहा है.
बुआ- छोड़ो, तुम भी क्या-क्या खोजबीन करते रहते हो.
मैं- सॉरी बुआ मैंने ऐसे ही पूछ लिया. आप कितनी बजे सोती हो?
बुआ- बस अब सोने ही वाली थी.
मैं- तब तो ठीक है, वैसे बुआ आप इतनी देर क्या कर रही थी?
बुआ- कुछ नही बस पढाई कर रही थी.
मैं- अच्छा, केवल पढाई ही कर रही थी इतनी देर रात तक?
बुआ- हाँ कोचिंग वाले बहुत काम देते है. इसलिए देरी से ही निपटता है.
मैं- बुआ झूठ मत बोला करो.
इतना सुनते ही बुआ घबराई हुई बोली- कैसे पंकज?
मैं- कुछ नही, लेकिन झूठ मत बोला करो.
बुआ- बताओगे तभी तो बता पाऊँगी कैसे बताओ ना प्लीज?
मैं- अभी मैंने आपको खिड़की में से अंदर देखा था जो आप कुछ कर रही थी. वो मैंने सब कुछ देख लिया है इसलिए ज्यादा बनो मत, तभी मैं आपसे बोलता हूँ की प्लीज झूठ मत बोला करो.
बुआ- क्या देखा तुमने?
मैं- कुछ नही बस आप बिना कपड़ों के थी और तकिये के आगे पीछे हिल रही थी. और आह….आह…आह…. जैसी आवालें निकाल रही थी.
बुआ- सच में तुमने देख लिया?
मैं- और नही तो क्या बुआ, तभी मेरे से ये सब देखा नही गया और फिर मैं आपसे कमरे की कुण्डी खुलवा लिया हूँ. क्योंकि जब से मैंने आपको इस रूप में देखा है मेरे अंदर कुछ-कुछ होने सा लगा है.
बुआ- तेरे अंदर क्या हो गया?
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मैं- पता नही लेकिन बुआ आप कितनी सुंदर लग रही थी जब आप बिना कपड़ों के थी. मुझे ऐसा लगा की काश इस तकिये की जगह मैं खुद ही आपके आगे-पीछे होता तो कितना अच्छा फील होता आपको.
बुआ- अच्छा, जरा दिखाना.
इसके बाद बुआ ने मेरे तंतनाते लंड पर नजर घुमाई और गौर से देखने के बाद हाथ लगे और एकदम से हटा ली. और बोली- पंकज ये है क्या इतना लम्बा?
मैं- पता नही बुआ ये कैसे हो गया लेकिन पिछली कितनी देर से ये ऐसे ही खड़ा है.
बुआ- खड़ा तो है लेकिन किसी का इतना भी खड़ा होता है क्या पागल मैंने तो पहली बार देखा है, इतना बड़ा.
मैं- अच्छा आपको कैसा लगा बुआ?
बुआ- मेरे को बहुत अच्छा लगा, लेकिन दर्शन तो करवाओ.
इतना सुनते ही मैंने अपनी पेंट उतार दी. और अब जल्दी से बुआ ने फिर से कमरे के कुण्डी लगाकर मेरी चड्डी भी उतार दी. तथा मेरे लंड के दर्शन करने लग गयी. और उसे सहलाने के लिए लग गयी.
फिर मैंने कहा- बुआ मेरे से बिलकुल भी नही रहा जा रहा है. अभी कुछ निकल जाएगा. आप प्लीज अपना सलवार उतार लो. और साथ में वो लाल रंग वाली पेंटी भी.
बुआ- तेरे को कैसे पता लाल रंग की है?
मैं- अभी तो देखा था, कितनी हॉट लग रही थी उसमे आप.
इतना सुनते ही बुआ ने अपनी पेंटी और सलवार उतार फेंके. इसके बाद मैंने एक्साइटमेंट में आकर बुआ की चूत के एक-दो चुम्मे लिए तथा फिर मैंने अपने खड़े हुए लंड को बुआ के अंदर घुसा डाला… और जैसे ही घुसाया बुआ…. आह…. आह…. आह…. आह… पूरा नही…. पंकज धीरे-धीरे कर….. मेरे को दर्द हो रहा है….. ऐसे बोल रही थी.
फिर मैंने धीरे-धीरे अपने लंड को बुआ की चूत में घुसाने की कोशिश की तो अब वह मेरा पूरा 8 इंच का लंड लेने लग गयी. क्योंकि बुआ ने पहले ही अपनी चूत मनीष से फड़वा रखी थी. इसलिए अब उन्हें इतना कोई दर्द नही हो रहा था. और वह अब मजे से अपनी चूत की चुदाई करवा रही थी. और साथ में आह…आह…आह… करके सिसकारियां भरे जा रही थी.
बुआ की ये तडप देखकर मेरे अंदर जोश आ गया और मेरे से रहा नही गया इसलिए मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी. और अब मैं जोर-जोर से सुशीला बुआ को चोदने में लग गया. इस दौरान मेरा एक्साइटमेंट में माल निकलने को तैयार हो गया था. क्योंकि बुआ की चूत पहले से ही काफी गीली थी इसलिए अब मेरे लंड को भी बहुत मजा आने लगा था. मैं बोला- बुआ मेरा निकलने वाला है.
बुआ बोली- प्लीज बाहर मत निकलना इसे अंदर तक जाने देना. और जितना जोर लगा सकों उतना लगाकर गहराई तक जाने देना. इतना सुनते ही मेरा माल निकलने लग गया और मैंने बुआ की चूत की गहराई तक अपना वीर्य आह….आह…. आह… करते छोड़ दिया. और इस दौरान बुआ मेरे ऊपर अपना हाथ फेर रही थी. उनको बहुत मजा आया इसलिए उन्होंने मेरे खूब सारी किस की.
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और बोली- पंकज कहाँ से सीखी ऐसी चुदाई तुमने?
मैं- आप ही से सीखी है बुआ.
बुआ- मैंने कब सिखा दी.
मैं- आपकी छत वाली बातें पूरी सुनता हूँ मैं.
बुआ- अच्छा इसका मतलब मेरा पीछा कई दिनों से कर रहे हो?
मैं- हाँ बुआ मैं नही चाहता की वो मनीष आपको चोदे इसलिए मैंने आज हिम्मत करके आपसे चुदाई की भीख मांगी है.
बुआ- अच्छा किया, वैसे तेरे लंड के आगे मनीष का लंड फीका है.
मैं- कैसे बुआ?
बुआ- वो साला 2 मिनट में अपना काम निपटाकर मेरी तडप को ऐसे ही छोड़ देता है.
मैं- कोई बात नही बुआ अब मैं हूँ ना आपके साथ.
इतना कहते ही बुआ ने फिर से मेरे को किस करनी शुरू कर दी. और बोली- मेरे को घोड़ी बनकर चुदाई करवाना बहुत पसंद है. इसलिए क्या तुम मेरे को घोड़ी बनाकर ऐसा मजा दे सकते हो?
मैं- क्यों नही बुआ आपकी मर्जी है, मेरे को भी कुछ सिखने को ही मिलेगा.
फिर बुआ पास का एक कपड़ा लेकर आई और अपनी चूत को ढंग से साफ़ की. तथा घोड़ी बन गयी. और मैंने पीछे से उन्हें देखा तो एकदम चुदाई की प्यासी चूत मेरे को लगी. और मेरे से रहा नही गया. इसलिए मैंने बुआ की चूत की पंखुड़ियों को फैलाकर उसमे अपनी जीभ फिरानी शुरू कर दी. और मेरे को उनकी रसीली चूत पिने में इतना मजा आया की दोस्तों पूछो मत.
उनकी चूत का रस ही मेरा लंड खड़ा करने के लिए काफी था. इसलिए करीब 10 मिनट तक मैं बुआ की चूत को चाटता रहा. और इस दौरान बुआ भी…. अह… आह.. पंकज….. तडपाओ मत अब….. डाल दो अपने 8 इंच वाले हथियार को…. कह रही थी.
इतना सुनते ही मैंने पीछे से बुआ की चूत पर अपना लंड सेट किया. और एक धक्का मारा तथा लंड चूत को फाड़ते हुए अंदर की ओर प्रस्थान कर गया. बुआ की आंखे फटी की फटी रह गयी. उसने इस तरह के धक्के की उम्मीद नहीं की थी. इसके बाद मैं धीरे-धीरे उनके चूत के अंदर ही झटके देने लगा. बुआ चूदते हुए बोल रही थीं- क्या मस्त लंड है तेरा पंकज….. अगर मेरे को पता होता तो मैंने भी भी मनीष से अपनी चूत की सील नही फड़वाती…. आह…… बहुत मजा आ रहा है मेरे भतीजे…… प्लीज ऐसे ही पीछे से धक्के मरता रह….. प्लीज….. आई लव यू पंकज….. आज से तुम मेर आशिक हो भतीजे नही.
बुआ की ये प्यास फील करके मेरे में और जोश आ गया और दुसरे राउंड के दौरान मैं फिर से उनको घोड़ी बनाकर अपने धक्कों की स्पीड बढ़ा डाला. और बुआ अब जोर-जोर से चीखने लग गयी. क्योंकि इस दौरान मेरा लंड उनकी नाभि तक टच हो रहा था. जिसकी वजह से उनको दर्द और मजा दोनों आ रहे थे. फिर मैंने उनके मुह पर हाथ डाला और पीछे से जोर-जोर से झटके देने शुरू कर दिए. और इस दौरान बुआ मेरी महज 10 मिनट की चुदाई में ही झड़ गयी.
लेकिन मैंने कहाँ रुकने वाला अब मैं उनके कंधे पकड़ रखा था. और पीछे से जोर-जोर से धक्के दिए जा रहा था. और उनके झड़ने के कारण अब मेरे हर झटके में मेरे को फट….फट…फट… जैसी आवाजें सुनाई देने लग गयी. जिन्हें सुनकर मेरे को बहुत अच्छा फील हुआ. और करीब 40 मिनट तक नॉनस्टॉप चुदाई के बाद बुआ एक बार फिर झड़ गयी. और अब उनकी चूत में से पानी की पिचकारी सी बहने लग गयी.
मैंने देखा की उनकी जांघ तक उनकी चूत का पानी आ रहा था. और ये देखकर मेरे में और जोश आ गया और फिर से मैंने अब 10-20 झटके दी और अपना माल बुआ की चूत में ही फिर से छोड़ दिया. और अब बुआ के ऊपर ही लेट गया. तथा बुआ के किस करने लग गया. क्योंकि अब मेरा उनसे दूर जाने का मन नही हो रहा था. इसलिए मैं करीब आधे घंटे तक उनको किस करके फिर से तैयार कर रहा था.
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और अपनी फीलिंग्स शेयर कर रहा था. वहीँ बुआ भी मुझसे अपनी चूत की प्यास बता रही थी. तो दोस्तों यह सब करते-करते आपको बताऊ मैंने रात को करीब 5 बार बुआ की चूत की चुदाई की. और सुबह 5 बजे तक तो उनको मैंने सलवार नही पहनने दी. मेरी चुदाई से खुश होकर बुआ बोली- पंकज आज से मैं तेरी हूँ. तेरा जब भी मन करे मेरे को चोद लेना. लेकिन ध्यान रखना किसी को पता न चल जाए.
उस दिन के बाद से दोस्तों मैं हमेशा बुआ के कमरे में ही पढाई के बहाने सोने लग गया. और अब मैं सुशीला बुआ की जमकर चुदाई करता हूँ. अब हम दोनों खुश है और बुआ ने भी मनीष से ब्रेकउप कर लिया है. हमारी चुदाई में कभी वो मेरे ऊपर तो कभी मैं उनके नीचे लेटकर बड़ा खुश होकर उनकी प्यासी चूत को चोदकर उसको पूरी तरह से संतुष्ट करता हूँ.
दोस्तों ये Bua ko choda कहानी आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Bua ki chudai ki kahani बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.