Train Me Chudai Story – ठंडी रात में अनजान भाभी ने लिया लंड का मजा
नमस्कार सभी को, कैसे हो आप सभी? उम्मीद है की आप सभी अच्छे होंगे. दोस्तों मेरा नाम रमेश है और मैं हिमाचल के शिमला का रहने वाला हूँ. आज आपको में मेरे साथ गुजरी एक सच्ची ट्रेन में चुदाई की कहानी (Train Me Chudai Story) से रूबरू कराउंगा. आपको बता दूँ की दोस्तों मैं फ़िलहाल 21 बरस का नौजवान हूँ. और अभी मेरी ग्रेजुएशन की पढाई चल रही है. तथा मैं प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी भी साथ – साथ कर रहा हूँ.
क्योंकि घरवालों का सपना है की मैं किसी न किसी सरकारी नौकरी में लग जाऊ. इसलिए घरवाले मेरे को ज्यादातर पुलिस और डिफेन्स से रिलेटेड भर्तियों में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते रहते है. इसी कारण दोस्तों मुझे कई बार ट्रेन से एक राज्य से दुसरे राज्य में जाना पड़ता है.
ये जो आपको मैं मेरी Train me chudai ki kahani बता रहा हूँ ये कहानी है जनवरी महीने की. तो हुआ क्या की दोस्तों मुझे दिल्ली पुलिस कांस्टेबल के फिजिकल हेतु दिल्ली जाना था. इसलिए मैंने शिमला से दिल्ली के लिए ट्रेन में सफर शुरू कर दिया. मुझे इस दौरान मजबूरन रात का सफर बुक करना पड़ा. क्योंकि दिन की सभी ट्रेन फुल थी. इसलिए दोस्तों मैंने AC कोच थोड़ा महंगा तो पड़ा मेरे लिए लेकिन बुक कर लिया.
इस दौरान दोस्तों मैंने रात को ही ये ठंड का मौसम था तो आपको बतो पता ही है की लंड तो सलामी सभी का देने लग जाता है. तो दोस्तों मैं एक WhatsApp ग्रुप से जुड़ा हुआ था. जिसमे 1000+ मेम्बर पहले से जुड़े हुए थे. इसलिए वो एक चुदाई वाला ग्रुप था. उसमे मैने ऐसे ही मजाक-मजाक में मेसेज भेज दिया- “अगर कोई भाभी या आंटी इस ट्रेन में सफर कर रही है तो प्लीज मुझसे सम्पर्क करें पूरी रात मजे दूंगा”.
तो दोस्तों इसके कुछ ही मिनट बाद मीनाक्षी नाम की भाभी का रिप्लाई मुझे पर्सनली आता है. और मैं एकदम चौक गया की ऐसा भी होता है क्या?
मीनाक्षी भाभी लिखती है- आपका नाम क्या है?
मैं- रमेश.
मीनाक्षी- आपकी उम्र?
मैं- 21 बरस.
फिर मैंने लिखा- आप कहाँ जा रही हो?
मीनाक्षी- मैं दिल्ली जा रही हूँ मेरे पति को अभी-अभी क्वाटर मिला है. वो रेलवे में नौकरी करते है इसलिए मैं अब वहीँ पर शिफ्ट होने जा रही हूँ.
मैं- आप हो कहाँ पर, मतलब कौने डिब्बे हो?
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मीनाक्षी- मैं AC कोच में ही हूँ.
मैं- अच्छा मैं भी वहीँ पर हूँ, आप मेरे डिब्बे 1xxxb में आ सकती हो??
मीनाक्षी- ये भी कोई पूछने की बात है, तभी तो मैंने मेसेज किया है आपको.
इसके बाद मीनाक्षी भाभी अपना सामान साथ लेकर मेरे डिब्बे के बाहर पहुँच गयी और मुझसे कोच का गेट खुलवाने के लिए बोली. तो मैं करीब से जब मीनाक्षी भाभी को देखा तो मेरे तो दोस्तों होश उड़ गये.
उनके गुलाबी होठ और बाहर निकली हुई गांड मेरे लंड के तोते उड़ा रही थी. और मुझे इसका यकीन नही हो रहा था की ऐसा भी हो सकता है. मेरे एक मेसेज करने से. तो मैंने तुरंत अपना गेट खोला और मीनाक्षी भाभी को अंदर ले लिया.
इसके बाद दोस्तों मैंने गेट के बाहर पर्दा कर दिया ताकि बाहर किसी को कुछ भी दिखे नही. और दोस्तों मीनाक्षी भाभी मेरे पास आकर बैठ गयी.
मैं बोला- आप भी ऐसे ग्रुप से जुड़ी हुई हो?
मीनाक्षी- हाँ मैंने पिछले 2 साल से इस ग्रुप को ज्वाइन किया हुआ है यहाँ मस्त-मस्त XXX देखने को मिलती है.
मैं- अच्छा, तो आपको क्या जरूरत पड़ गयी ऐसे ग्रुप से जुड़ने की?
मीनाक्षी- जैसी आपको पड़ी है वैसे ही मेरे को पड़ी है.
मैं- अच्छा, आपके पति है ना?
मीनाक्षी- पति तो है लेकिन वो केवल नाम मात्र के पति है, क्योंकि वो लगभग ड्यूटी पर रहते है. और उनसे वो सब होता भी नही है जैसा आपने मेरे को अपने लंड की फोटो भेजी है ये कहकर की किसी को 8 इंच का मेरा लंड लेना हो तो मेसेज करें. इसलिए मैंने आपको रिप्लाई दिया है.
मैं- अच्छा तो आपको कुछ स्पेशल चाहिए?
मीनाक्षी- हाँ और क्या?
इतना कहते ही दोस्तों मैंने मीनाक्षी भाभी को देखा ठंड के मारे उसके होंठ थरथराने लगे और में उसके और पास चला गया और धीरे से उसकी कमर पर हाथ रखते हुए उसको अपनी तरफ दबा लिया और प्यार से उसके होंठो पर अपने होंठो को रख दिया.
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अब होंठ रखते ही वो मेरे ऊपर आ गई और मेरे होंठो को एक भूखी शेरनी की तरह चूसने लगी, मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे ये उसकी जिंदगी का आखरी किस है. अब होंठ चूसते-चूसते मैंने उसको कसकर पकड़ लिया था और किस करते हुए ही उसको वहीँ पर लेटा दिया और प्यार से उसकी साड़ी का पल्लू हटाते ही उसके बूब्स पर अपनी उंगलियां फैरने लगा और प्यार से बीच में किस भी किया.
अब मीनाक्षी भाभी की साँसे किसी ट्रेन के इंजन से भी तेज़ चल रही थी और उसका बदन किसी भट्टी की तरह तप रहा था. इतने में उसने मुझे मेरी शर्ट से पकड़कर मुझे वापस अपनी तरफ खींचा और किस करने लगी. अब मैंने किस करते हुए उसके ब्लाउज के हुक खोल दिए.
आपको बता दूँ की दोस्तों इस दौरान मीनाक्षी ने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी और फिर में बूब्स को नीचे से पकड़कर धीरे-धीरे दबाने लगा. अब उसने मेरे होंठ छोड़ दिए और वो सिसकारियां भरने लगी. अब में उसकी गर्दन पर, आँखों पर, सब जगह किस करने लगा. उसके बूब्स पर किस करने लगा और उनको दबाने और चूसने लगा.
फिर मैंने उसके गोरे-गोरे बूब्स दबाते हुए धीरे से उसकी निप्पल पर चिकोटी काटी तो वो मुस्कुराते हुए बोली कि इतना धीरे मत करो कि मेरी जान ही निकाल दो. फिर मैंने उसके बूब्स चूसना शुरू किया और बहुत देर तक चूसने के बाद उनको मसलने लगा. फिर उसने उठकर अपनी साड़ी और पेटीकोट उतार दिया और अब वो अपनी लाल रंग पेंटी उतारने लगी.
अब मैंने भी मेरे पूरे कपड़े उतार कर सिर्फ़ अंडरवियर छोड़ दिया और उसके ऊपर आकर उसके पेट को चाटने लगा और धीरे-धीरे नीचे की तरफ आते हुए उसकी नाभि पर आकर रुक गया और उसको चूसने लगा. फिर मैंने मेरा हाथ नीचे लगाया, तो मुझे महसूस हुआ कि उसकी चूत में से इतना पानी आ रहा था कि बेडशीट गीली हुये जा रही थी.
फिर में नीचे की तरफ आया तो मुझे शरारत सूझी और मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से चूत को किस करते हुए, उसकी जाँघो पर किस किया. इससे वो और तड़प गई और कहने लगी कि तुम बहुत गंदे हो और मुझे तड़पाते हो. फिर मैंने उसकी पेंटी के ऊपर से किस किया तो उसकी एक लंबी सिसकारी छूट पड़ी. फिर वो बोली कि बहुत ठंड लग रही है, अब तो कुछ करो.
इसके बाद दोस्तों मैंने मीनाक्षी भाभी की पेंटी को अपने दांतों से उतार दिया और मैंने देखा कि उसकी चूत में से अमृत की धारा बह रही थी जो कि बहुत ही मस्त थी. अब वो बिना स्पर्श के ही निकल रही थी. फिर मैंने उसकी चूत पर किस करते हुए अपनी जीभ उसकी चूत के अंदर डाली और प्यार से चूसने लगा, और खूब जबरदस्त चूसने के बाद चुदाई का मौसम आया.
फिर मैंने अपना 8 इंच लंबा लंड निकाला और उसके हाथों में थमा दिया. और मीनाक्षी भाभी ने जरा भी देर न करते हुए मेरा लंड अपने मुँह में लिया और चूसने लगी. अब वो चूसते-चूसते बोली कि बस अब डाल दो, नहीं तो में मर जाउंगी. फिर मैंने उसकी दोनों जाँघो को अपने कंधो पर रखते हुए धीरे से अपने लंड को उसकी चूत में धकेल दिया और धीरे-धीरे चूत में अन्दर डालता चला गया.
अब वो जैसे जैसे अंदर जा रहा था, उसकी साँसे ऊपर चढ़ती जा रही थी और लंड सीधा जाकर उसकी बच्चेदानी से टकराया और उसकी जान निकल गई. आह….आह……आह…….आह…………आह………..उ………….मर गयी रे रमेश धीरे करो. मेरे लंड के झटकों से मीनाक्षी तो मानों बेसुद सी हो गयी. फिर मैंने धीरे-धीरे धक्के मारते हुए उसको खूब चूसा, खूब चूमा. और चलती ट्रेन में चुदाई शुरू कर दी.
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अब मीनाक्षी भाभी को काफी मजा आने लगा और बोली- थोड़ी स्पीड बढाओ मेरे राजा. मुझे बहुत मजा आ रहा है अब.
यह सुनते ही दोस्तों मैंने मीनाक्षी भाभी के ऊपर लेटे-लेटे अपनी स्पीड को बढ़ा दी. और मैंने देखा की मेरा लंड मीनाक्षी भाभी के अंदर तक छू कर आ रहा था. और मीनाक्षी भाभी की आँखे तेरने लगी थी. क्योंकि वो मेरे लंड को अंदर तक महसूस कर रही थी. तथा अपनी चूत से पानी का फव्वारा छोड़ रही थी.
करीब 20 मिनट तक नॉनस्टॉप चुदाई होने के बाद मैंने कहा – भाभी मेरा झड़ने वाला है कहाँ निकालू?
मीनाक्षी- मेरे अंदर ही झाड़ दो और प्लीज् लास्ट में मेरे अंदर तक अपने लंड को लगाये रखना मुझे बहुत मजा आ रहा है.
इतना सुनते ही दोस्तों मैंने अंतिम में मेरा लंड मीनाक्षी भाभी की चूत में अंदर तक जोर दिए रखा और करीब 1 मिनट तक इस दौरान मीनाक्षी भाभी ने मेरे लंड को फील करते हुए अपनी चीखे निकाल रही थी. तथा मेरे को अपने ऊपर कसकर जकड़ रखा था. जैसे पहले उन्हें ऐसा मजा कभी नही आया हो.
फिर करीब 5 मिनट तक मेरे को ऐसे ही जकड कर रखते हुए भाभी ने मेरे बदन पर अपना हाथ सहलाया जिसकी वजह से मेरे अंदर चुदाई की आग फिर से लगनी शुरू हो गयी. और फिर मीनाक्षी भाभी बोली- एक बार उठो.
इसके बाद मैं उठा और मीनाक्षी भाभी ने अपने बेग से एक सूती कपड़ा निकाला और मेरे लंड को तथा अपनी चूत को ढंग से साफ़ किया और बोली- थैंक्स मेरे को चोदने के लिए मुझे ऐसे ही लंड की जरूरत थी. अब मुझे बिलकुल भी सर्दी नही लग रही ही.
मैं बोला- भाभी मेरे लंड को देखों ये फिर से आपको चोदने के लिए खड़ा हो गया है.
भाभी- तो इसमें क्या है, करो फिर से शुरू अपना कार्यक्रम.
इतना सुनते ही दोस्तों मैंने भाभी को इस बार घोड़ी बना लिया. और पीछे से उनकी चूत को चाटना शुरू कर दिया. और भाभी इस दौरान अजीब-अजीब आवाजें निकाल रही थी. आह…. आह….. मजा आ रहा है….. आह …. ऐसे ही चाटो प्लीज.
फिर करीब 10 मिनट तक मैंने मीनाक्षी भाभी की चूत को चाटने के बाद. अपने लौड़े को सेट किया और पीछे से उनकी चुदाई चालू कर दी. मुझे दोस्तों इस दौरान बहुत मजा आ रहा था. क्योंकि मीनाक्षी भाभी के गोरे-गोरे कुल्हे देखकर मेरे लंड ने अपना असली अवतार ले लिया था और वो फिर से एकदम सख्त हो गया था. तथा भाभी के अंदर तक जा रहा था.
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और घोड़ी बनने के बाद मीनाक्षी भाभी ने जो आवाजे निकाली- आह…. रमेश…… ऐसे ही करो…. प्लीज मेरी जान…. आह…… आह…. बहुत मजा आ रहा है.
और दोस्तों इतना सुनकर फिर से मैं मीनाक्षी भाभी को करीब 40 मिनट तक ऐसे ही झटके देने लग गया था. और इस दौरान मेरे झटकों की वजह से मीनाक्षी भाभी का तो पेशाब ही निकलने लग गया था और उनकी जांघों पर से पानी टपकने लग गया. फिर अंत में मेरा झड़ने वाला था तो मैंने मीनाक्षी भाभी की कमर को जोर से पकड़कर अपना माल फिर से उनकी चूत में ही गहराई से छोड़ दिया.
फिर भाभी बोली- वाह मेरे राजा तुम तो सच में चुदाई के मास्टर लगते हो. ये चुदाई मेरे को जिन्दगी भर याद रहेगी. प्लीज अब से तुम दिल्ली आवो तो मेरे को मेसेज करना मैं खुद ही तुमको अपने क्वाटर पर बुला लुंगी और तुमसे जरूर अपनी सेवा लुंगी.
मैं- मीनाक्षी भाभी मुझे भी बहुत मजा आया है और लगता है की अब आपको चोदे बिना कैसे रहूँगा?
मीनाक्षी भाभी- चिंता मत करो मेरे राजा तुम दिल्ली से ही अपनी तैयारी कर लो तुम्हारा खर्च मैं उठा लुंगी.
तब से लेकर दोस्तों अब तक 6 महीने हो गये है दोस्तों और मैं दिल्ली में ही सेट हो गया हूँ और मुझे किसी भी चीज की परवाह नही करनी पड़ती तथा चुदाई भी मीनाक्षी भाभी मुझसे हमेशा करवाती है. तथा मेरा खर्च भी उठाती है. मेरे तो मानों पिछले 6 माह से भाग से खुल गए है.
ये थी दोस्तों मेरी Train me chudai kahani जो काफी मजेदार थी और आज भी मेरे लिए काम की है. आप ये Train me chudai ki kahani हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. तो दोस्तों अगर आपको मेरी ये ट्रेन में चुदाई की कहानी पसंद आई है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव साँझा कर सकते है. मिलता हूँ आपसे मेरी एक और मेरी Gandi Story के साथ.