Bhabhi Ki Chudai Story – घर की सफाई के दौरान सुनिधि भाभी को जमकर चोदा
नमस्कार सभी पाठकों को, आशा करता हूँ की आप सब अच्छे होंगे. दोस्तों मेरा नाम है रवि और मैं गुजरात के वडोदरा का रहने वाला हूँ. फ़िलहाल मैं कुछ समय पहले एक सीधा-साधा लड़का था. लेकिन एक दिन मेरी सुनिधि भाभी ने मुझे अपनी गांड के दर्शन करवाकर मुझे बिगाड़ दिया. इस Bhabhi Ki Chudai Story में दोस्तों मैं आपको मेरी और सुनिधि Bhabhi ki chudai ki kahani के बारें में विस्तार से बताऊंगा.
सबसे पहले दोस्तों मैं आपको अपने परिवार के बारें में बता दूँ तो हमारे परिवार में फ़िलहाल 5 जने रहते है जिनमे- मम्मी-पापा, भाई-भाभी और मैं. दोस्तों मेरे राकेश भैया मुझसे 6 साल बड़े है और उनकी शादी सुनिधि भाभी से 2 साल पहले हो गयी थी. हम एक बिजिनेस वाली फेमिली से बिलोंग करते है.
पापा पहले हमारे ट्रांसपोर्ट के बिजनेस को सम्भालते थे लेकिन अब पापा ने अपना बिजनेस भैया के हाथ में दे दिया है. इसलिए पापा भैया को बिजनेस सिखाने के लिए पिछले 2 साल से अपने पास ही रखते है. और दोस्तों मेरे लिए पापा कहते है वो मुझे एक सिविल इंजिनियर के रूप में देखना चाहते है.
इसलिए मैं फ़िलहाल JEE की तैयारी कर रहा हूँ. और अपना पूरा ध्यान पढाई पर लगा रखा है. फिर दोस्तों एक दिन की बात है अभी होली के समय की जब हमारे घर में सफाई का काम चल रहा था. अब आपको तो पता ही है त्यौहार से पहले लोग अपने घरों की सफाई करते है. लेकिन कई लोग तो अपनी बहन को ससुराल से बुला लेते है चूँकि हमारे कोई बहन नही थी इसलिए यह जिम्मा केवल सुनिधि भाभी के पास ही था.
घर में केवल मैं और सुनिधि भाभी ही थे. और मैं दोस्तों सुबह 9 बजे के समय के दौरान पढाई कर रहा था तथा दुसरे कमरे में भाभी सफाई में लगी हुई थी. फिर मुझे एक दम से किसी टेबल के गिरने की आवाज आई और मैं दौड़ा-दौड़ा गया भाभी के पास जहाँ भाभी को गिरने की वजह से पैर में मोच आई हुई थी.
हालात ये थे की सुनिधि भाभी से उठा भी नही जा रहा था. वह केवल आवाज देकर ही मुझे बुलाई और जब उन्होंने बोला – रवि जी आओ प्लीज मेरे चोट लग गयी है. तो मैं भागा-भागा भाभी के पास जा पहुंचा. फिर दोस्तों मैंने भाभी को अपना हाथ देकर खड़ा करने की कोशिश की लेकिन वो लंगड़ाने के कारण चल नही पा रही थी.
इसलिए मैंने उन्हें कहा- भाभी आप अभी थोड़ी देर आराम कर लो. ताकि दर्द ठीक हो जाए.
और फिर दोस्तों मेरी सुनिधि भाभी पास में पड़े बेड पर लेट गयी लेकिन वह दर्द के कारण कराह रही थी. इसलिए मैंने पूछा- भाभी कैसे गिरे? और कहाँ पर चोट आई है?
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तो भाभी बोली- मैं इस टेबल पर चढ़ी हुई थी और जब मैं ऊपर से मकड़ी के जाले साफ कर रही थी तब मुझे पता नही चला की टेबल के कोर्नर की तरफ जा चुकी हूँ. इसलिए टेबल एक साइड से खड़ी हो गयी और फिर मैं गिर गयी.
मैं- ओह माय गोड, तो फिर आपको चोट कहाँ लगी? आपको हॉस्पिटल ले चलूँ?
भाभी- मेरे गिरने की वजह से पैर के निचे चोट आई है और टेबल के लगकर मेरी जांघ पर भी दर्द हो रहा है.
मैं- आपको हॉस्पिटल ले चलूँ?
भाभी- नही हॉस्पिटल नही अभी दवा लगा लेने से ठीक हो जाएगा शायद.
मैं- आपके पास दवा है या फिर मैं लेकर आऊ बाजार से नई?
भाभी- मुझे याद नही है कहाँ आप एक काम करो बाजार से जाकर नई ही लाकर दे दो.
फिर दोस्तों मैं तुरंत गया बाजार में और Dr ortho नाम की दवा लेकर आया जिससे तुरंत दर्द निवारण के लिए काम में लिया जाता है. अब मैं घर आ गया और अपनी प्यारी सी भाभी को करहाते हुए मुझसे नही देखा जा रहा था.
मैं- लो भाभी आप ऐसे कराहों नही दवा लगा लो. मेडिकल वाले ने बोला है की जल्दी ही आराम मिल जाएगा अगर चोट नई है तो.
भाभी- ठीक है, लेकिन मेरे से बैठा भी नही जा रहा है. और मम्मी जी भी घर पर नही वरना वो मेरे को ये दवा लगा देती.
मैं- मेरी प्यारी भाभी आपको ऐसे करहाता मैं नही देख सकता, क्या मैं आपको दवा मसल दूँ?
भाभी- ठीक है आप मसल दो. मैं सीधी लेट जाती हूँ.
इसके बाद दोस्तों मैं भाभी के पैर वाली चोट पर पहले दवा को मसलने लग गया और फिर जैसे ही उन्हें इस दवा से ठंडक मिली तब उन्होंने बोला – रवि जी ये दवा तो बहुत काम की है एक दम से दर्द का अहसास ही नही हो रहा है.
मैं- हाँ भाभी मेडिकल वाले ने भी यहीं बोला था की अगर चोट नई है तो तुरंत लगा देना. ताकि वहां खून न जम पाए.
भाभी- आप इसको अभी मेरी जांघ पर भी लगा दो.
मैं- ठीक है भाभी.
इसके बाद दोस्तों भाभी उलटी लेट गयी और अपनी साड़ी को ऊपर कर ली जांघ तक तो मैंने जैसे ही उनका गोरा बदन देखा तुरंत मैं तो हिलने लग गया और मेरे अंदर अजीब सी घबराहट होने लग गयी. लेकिन मुझे सुनिधि भाभी को दवा लगानी थी इसलिए मैं पहले उनकी जांघ पर दवा लगाने लग गया.
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इसके बाद दोस्तों मेरा मन तो उनको और ऊपर से देखने का हो रहा था. इसलिए वो उल्टी लेटी हुई थी. तो मैं धीरे-धीरे करके उनकी साड़ी को उठाता गया. और फिर मैंने भाभी के गांड के दर्शन कर लिए. हालाँकि भाभी को मेरी ये हरकत सब पता चल रही थी. क्योंकि वो समझ रही थी की अगर देवर मेरे को ऐसे देखेगा तो या तो मेरी चुदाई करेगा या फिर हिलाकर अपना काम चलाएगा. इसलिए भाभी कुछ भी नही बोली मेरे को और चुपचाप दवा लगवाती रही.
फिर मैंने देखा की मेरी सुनिधि भाभी की गांड एकदम उभरी हुई और एकदम गोरी काले रंग की पेंटी में और खिली हुई दिख रही थी. इसलिए दोस्तों अब मेरे से 10 मिनट दवा लगाने के बाद रहा नही जा रहा था. तो मैं सोचा की अब लंड को हिलाना ही पड़ेगा. इसलिए मैंने भाभी से बोला- भाभी अब लग गयी दवा मैं जा रहा हूँ.
फिर भाभी सीधी हुई और मेरे निचे की तरफ देखी और बोली- रवि जी दवा तो लग गयी लेकिन ये आपकी पेंट के सामने क्या निकल आया? हाहाहा
मैं- शर्म से कुछ नही भाभी ये तो ऐसे ही.
भाभी- सब समझती हूँ 2 साल हो गए है मेरे को भी किस काम के लिए ये पेंट आपकी उभरी हुई है.
मैं- नही भाभी ऐसा कुछ नही है.
भाभी- सच बताओ आपको कुछ करने का मन है क्या?
मैं- हाँ भाभी, लेकिन आप मेरी भाभी हो इसलिए नही हो पाएगा.
भाभी- अच्छा, अगर आपने मेरी मदद नही की होती तो मैं खड़ी भी नही हो पाती. इसलिए अगर आपने मेरा काम किया है तो मैं भी आपका काम करवाउंगी अब.
मैं- सच में भाभी?
भाभी- हाँ और क्या?
इसके बाद भाभी मेरे एक हाथ को पकड़कर अपने पास सुला ली और बोली- मुझे सब पता चल रहा था आपका जब मेरी साड़ी को आप उपर कर रहे थे. लेकिन आप चिंता मत करो ये सब नार्मल है. होता है इस उम्र में हम दोनों ही जवान है. और सच बताऊ तो देवरजी जब आप मेरे पीछे हाथ फिरा रहे थे तब मेरे को भी चुदाई करवाने का मन हो रहा था.
मैं- अच्छा तभी भाभी पहले तो आपकी पेंटी निचे से सुखी थी फिर गीली हो गयी.
भाभी- हाँ, आपके भैया ने भी मेरी चुदाई करे 10 दिन होने को आए है जब से वो ट्रिप पर गये है तब से मेरी चुदाई नही हो पाई है.
और इतना कहते ही दोस्तों मैं झट से मेरी सुनिधि भाभी को किस करना शुरू कर दिया. कभी उनके दाहिने गाल पर तो कभी उनके बाए गाल पर और मैंने महसूस किया की उनके गाल इतने मुलायम थे की मेरा तो मानों अभी ही उनकी चूत में लंड घुसाने का मन हो गया था.
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फिर दोस्तों सुनिधि भाभी ने अपने दोनों हाथ से मेरे सिर को पकड़ा और अपने होठों से मेरे होठ लगा लिए. और हम मस्त होकर एकदुसरे को लिप्स किस कर रहे थे. इस दौरान मैंने महसूस किया की सुनिधि भाभी के लिप्स से मीठा तो शहद भी नही है. इसलिए मैंने करीब 10 मिनट तक उनके होठ लगातार चूमें.
फिर मैंने सुनिधि भाभी की साड़ी उतारने को बोला तो भाभी ने तुंरत अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए. अब मैं उनकी ब्रा के ऊपर से बूब्स दबाने लगा. तब जाकर वो थोड़ा शांत हुईं. मैंने फिर से किस शुरू किया. अब सुनिधि भाभी मेरा साथ देने लगीं. उन्हें इस दौरान खूब मजा आने लगा. मैंने उनके सारे कपड़े उतार दिए और उन्हें नंगा कर दिया।
इसके बाद दोस्तों मैंने सुनिधि भाभी की चूत को टच किया. उनके शरीर में सिहरन दौड़ गया. मैं धीरे-धीरे किस करने लगा. फिर किस करते-करते मैंने अपने कपड़े भी उतार दिए. मेरा 8 इंच का लंड देखकर भाभी हैरान रह गईं।
मैं- क्यूँ भाभी डर गयी क्या?
भाभी- डरी तो नही लेकिन ऐसा लम्बा और मोटा लंड मेंने आजतक देखा नही है.
इसके बाद मैंने उन्हें खूब किस किया और उनकी चूत की तरफ बढ़ा. उनकी चूत पर किस किया और एक उंगली से चोदना शुरू किया. और फिर मैंने स्पीड बढ़ाई तो उन्हें मजा आने लगा और उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया. सुनिधि भाभी बहुत खुश थीं. फिर मैंने दो उंगलियों से चोदना शुरू किया. वो फिर चिल्लाईं, पर मैं नहीं रुका.
जब वो पूरी तरह गरम हो गईं, मैंने अपने लंड पर ढेर सारा ऑयल लगाया और उनकी चूत पर भी लगाया. लंड को चूत से टच करने लगा.
सुनिधि भाभी बोलीं- “बस डाल दो!” मैंने एक झटका मारा तो भाभी बोली- आह …….आह……ऊऊउ….रविजी….आह. इतना तगड़ा लंड छुपा के रखा था आपने और मुझे पता भी नही था कब से मुझे ऐसे लंड की जरूरत थी. कम से कम बता तो देते ताकि हम पहले से ही मजे कर लेते .
चलो अब झटके मारों देवरजी. फिर दोस्तों मैंने सुनिधि भाभी को एक झटके में सुपाड़ा अंदर डाल दिया. और मैं धीरे-धीरे धक्के लगाता रहा. थोड़ी देर बाद उन्हें और मजा आने लगा. मेरे झटकों की वजह से सुनिधि भाभी जोर से चीखीं, “रवि जी, छोड़ दो! तुम्हारा बहुत बड़ा है, निकालो इसे!” लेकिन मैं नहीं रुका और बड़े-बड़े शॉट मारते हुए पूरा लंड अंदर डाल दिया.
वो चिल्लाती रहीं, “छोड़ दो प्लीज,,,,आह,,,,,,,आह” पर मैं धक्के लगाता रहा। 4-5 मिनट बाद उन्हें मजा आने लगा और वो मेरा साथ देने लगीं। उन्होंने मुझे हग किया और बोलीं, “फक मी हार्ड रविजी, फास्टर एंड हार्डर!”
इतना सुनकर दोस्तों मैं जोश में आ गया और धक्के पे धक्के लगाने लगा. फिर सुनिधि भाभी को 69 पोजीशन में लिया और पीछे से खूब चोदा. पूरा घर “छप….छप…..छप….” की आवाजों से गूंज उठा।
सुनिधि भाभी बोलीं, “रुकना मत, चोदते रहो!” मेरा निकलने वाला था। मैंने पूछा, “कहाँ छोड़ू?” वो बोलीं, “एक बूंद भी बाहर नहीं, सब अंदर डाल दो!” हम दोनों एक साथ झड़ गए. इसके बाद मैं उनके ऊपर ही लेट गया.
और फिर भाभी बोली- देवरजी आपके दर्द वाले तेल से ज्यादा तो मेरे आपके चुदाई ने असर कर दिया. अब मुझे तो दर्द का पता ही नही चल रहा है. और मुझे आपसे चुदने में बहुत मजा आया सच कहूँ तो.
ये सब सुनकर दोस्तों मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मैं बोला- अभी तो भाभी पहला राउंड चुदी हो आगे देखों क्या होता है.
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भाभी बोली- एक बार मुझे पेशाब जाकर आने दो वापस आती हूँ.
भाभी फिर पेशाब जाकर आई और बोली- आ जाओं मेरे प्यारे से देवर फिर कर लो चुदाई.
मैं- अबकी बार भाभी आप घोड़ी बन जाओ.
और दोस्तों सुनिधि भाभी तुरंत घोड़ी बन गयी. और फिर मैं पहले तो पीछे से पाने लंड के सुपारे को चूत पर फिराता रहा जिसकी वजह से मेरा लंड एकदम टाइट हो गया और फिर एकदम से सुनिधि भाभी की चूत में घुसेड दिया.
भाभी- आह….आह…ये कहाँ से सिख गये आप?
मैं- भाभी आपको देखकर सबकुछ बिना सीखे ही दिमाग में आ जाता है.
भाभी- अच्छा, तो चोदो फिर वैसे ही जैसे पहले किये थे.
फिर दोस्तों मैंने सुनिधि भाभी को घोड़ी बनाकर दुसरे राउंड में लगभग आधे घंटे तक जमकर चुदाई की और उनकी चूत से 2 बार पानी झाड़ चूका था. अंत में तो उनकी चूत से फच…फच…फच की आवाजे आने लग गयी थी. तो मैंने अभी अपनी स्पीड बढाई और फिर से उनकी चूत में अपना वीर्य निकाल दिया.
फिर हम थके हुए आराम करने लग गये. लेकिन मैं कहाँ मानने वाला था फिर से चुदाई की मांग करने लग गया तो भाभी बोली- अभी मम्मी का बाजार से आने का वक्त हो गया है इसलिए हम आगे की चुदाई रात को करेंगे.
फिर दोस्तों मैंने भी हामी भर दी. और दोस्तों तब से लेकर अब तक 4 महीने हो गये है जब भी मेरा मन होता है मैं मेरी सुनिधि भाभी की खूब जमकर चुदाई (bhabhi ko jamkar choda) करता हूँ. और वो मेरे से इतनी खुश है की मैं आपको बता नही सकता.
दोस्तों आप ये Bhabhi ki chudai ki kahani हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है। अगर आपको दोस्तों मेरी ये Devar bhabhi ki chudai ki kahani कहानी पसंद आई है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव साँझा कर सकते है। मिलता हूँ आपसे मेरी एक और नई कहानी के साथ।