Didi Ki Chudai Kahani – बड़ी दीदी ने पास सुलाकर लिया लंड का मजा
नमस्कार मित्रों, आप सभी का स्वागत है आपके अपने फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com के Bhai bahan ki chudai ki kahaniyan के नए एपिसोड में. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर रविन्द्र जी द्वारा भेजी गयी Didi Ki Chudai Kahani लेकर. दोस्तों मेरी यह Sister sex kahani एक सच्ची घटना है जिसमे मेरी मंजू दीदी ने मेरे को चुदाई करना सिखाया है.
सबसे पहले मैं अपने बारें में आपको बता देता हूँ. हम लोग हरियाणा के पानीपत के रहने वाले है. और हम लोग एक परिवार में संयुक्त रूप से रहते है. क्योंकि हम लोग गाँव में रहते है इसलिए आज भी हमारे यहाँ संयुक्त रूप से रहने का प्रचलन चल रहा है. हमारे परिवार में एक ताऊ और एक चाचा शामिल है. तथा सबसे बीच वाले हमारे पापा है.
तथा हमारे घर में हम 5 भाई बहन है. यानी की सभी सगे भाई बहन नही है. चचेरे मिलकर सभी 5 भाई बहन है. उन्ही में से मंजू दीदी सबसे बड़ी है. और ये जो मैं आपको कहानी बता रहा हूँ ये कहानी दोस्तों आज के 5 बरस पुरानी है. तब मेरी उम्र महज 14 बरस की थी. और उस समय मंजू दीदी को जवानी का नशा भी चढने ही लगा था. और उस समय उनकी उम्र 19 बरस की थी.
आज भी मंजू दीदी शादी हो गयी लेकिन हॉट वैसी की वैसी है. और जो मेरे जीजू है वो भी उनसे काफी खुश रहते है. क्योंकि मंजू दीदी है ही एक कमाल का माल. इसलिए कभी भी वो लोग झगड़ा नही करते है.
अब दोस्तों ज्यादा देर न करते हुए अपनी कहानी की शुरुआत करते है. दरअसल हुआ यूँ की हमारे घर में पहले टेलीविज़न केवल मंजू दीदी के कमरे में ही था. इसलिए मैं एक रात को वहां कार्यक्रम देखने में लग गया. और फिर ये सर्दियों के दिन थे इसलिए मैं मंजू दीदी के संग लेटे हुए रजाई में दुबके हुए कार्यक्रम देख रहा था.
तभी रात के 10 बजने को आए थे. और दोस्तों वो कार्यक्रम था सावधान इंडिया के नाम से जो की एक रोमांटिक सीरियल सा था. जिसकी वजह से मेरे को तो कुछ नही हुआ था. लेकिन मंजू दीदी उस कार्यक्रम पर अपनी नजरें गडाए हुए थी. और वो उन रोमांटिक सीन को देखकर काफी रोमांटिक हो चुकी थी. तथा पहले मंजू दीदी ने ही पहल करते हुए अपने पैर से मेरे लंड को छुआ.
और उस दौरान मेरे लंड में कोई हलचल नही थी. फिर दोस्तों रजाई के अंदर ही अपने पैर से मेरे लंड के सामने रगड़ चालू कर दी. हालाँकि मैं इन सब से अनजान था. मुझे लगा की मंजू दीदी कोई खाज खुजा रही होगी. इसलिए मैं अनजान ही बना रहा. फिर दोस्तों अब मेरे जितना चुतिया मेरा लंड थोड़ी था वो दीदी के पैर की रगड़ के कारण कुछ ही देर में तनकर खड़ा हो गया.
और फिर मेरे को भी कुछ अजीब सा लगने लग गया. तो दीदी को भी इस दौरान पता चल चूका था की अब लंड तैयार हो चूका है. इसलिए उन्होंने अब टेलीविज़न को बंद कर दिया. और अब बोली- रविन्द्र मेरे को अब सोना है. इसलिए अब मेरे को नींद तभी आएगी जब तुम मेरी साइड मूह करके सोवोगे.
मैं बोला- ठीक है दीदी, इतना कहकर मैं दीदी की साइड मूह करके सो गया.
फिर दोस्तों दीदी ने मेरे दोनों पेरों के बीच में अपना एक पैर फंसा लिया. और उनके मुलायम पेरों को फील करके मेरा लंड अब भी जोर से तना जा रहा था. और फिर दीदी ने बोला- रविन्द्र मुझे कुछ चुभ सा रहा है, और एकदम से मेरे लंड पर हाथ लगा डाला.
मैं बोला- दीदी मेरे को शायद पेशाब लग रही है. इसलिए ऐसा हो रहा है.
दीदी- पागल ये केवल पेशाब के लिए ही नही होता है.
मैं- फिर किस काम के लिए होता है?
दीदी- अभी पता चल जाएगा.
मैं- कैसे दीदी?
इतना सुनते ही दीदी ने मेरे होटों पर अपने होठ रख दिए. और जैसे वो कार्य्रकम में लड़का लड़की की चूम रहा था. ठीक वैसे ही मंजू दीदी ने मेरे को चूमना शुरू कर दिया. और काफी देर तक चूमती रही. और उनकी इस हरकत से मेरे को अब समझ में आने लग गया था की, अब हो वाला तो कुछ स्पेशल ही है.
इसलिए दोस्तों मैंने भी बिना बोले ही मंजू दीदी का जैसा वो चाह रही थी ठीक वैसे ही साथ दिया. और अब हम अपनी मर्जी से एक दुसरे को चूम रहे थे. और उस सर्दी की रात हम दोनों की गर्मी इतनी बढ़ चुकी थी की मानों अब हमें रजाई की भी कोई आवश्यकता न थी. इसलिए अब दीदी ने पहल करते हुए अपने एक हाथ को मेरे लंड की तरफ कर दिया और धीरे-धीरे मेरे लंड को मसलना शुरू कर डाला.
और करीब 10 मिनट तक वो अपने प्यार भरे अंदाज से मेरे लंड को मसलती ही रही. चूँकि ये सब मेरे साथ पहली बार हो रहा था इसलिए अब मुझे इतना मजा आ रहा था की पूछो मत. और आखिर में दोस्तों मेरे लंड ने उनकी रगड़ के कारण पेंट के अंदर ही अपना पानी छोड़ दिया. और मैं आह…. अहहाह….हाहाह. करता रहा…. दीदी बहुत अच्छा लग रहा है…. आहाह्हा….अह्हह.
और फिर मेरी पेंट अंदर से गीली होने के बाद मैं बोला- दीदी लगता है मेरा पेशाब निकल गया है.
दीदी- चेक करो देखे.
इतना सुनते ही मैंने पेंट उतारकर देखा तो उसमे सफेद-सफेद निकला हुआ नजर आया. मैं उसे देखकर सोच में पड़ गया और बोला- दीदी ये सफेद-सफेद निकला है. ये पहली बार आया है ऐसा पेशाब.
दोस्तों ये Didi Ki Chudai Kahani आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है.
दीदी- पागल ये निकला तभी तो मजा आया ना.
मैं- हाँ दीदी मजा तो बहुत आया है.
इतने सुनते ही अब दीदी ने अपने सलवार का नाड़ा खोल दिया और साथ में अपनी लाल रंग की पेंटी को भी अपने बदन से निकाल फेंका. तथा मेरे को भी बोला की अब मैं पेंट न पहनकर यहाँ सिर्फ नंगा ही सो जाऊ. अब दोस्तों मंजू दीदी केवल अपनी झांटभरी चूत लेकर नंगी ही लेती हुई थी. और बोली- रविन्द्र फिर से चाहिए क्या वैसा मजा तेरे को?
मैं- हाँ दीदी, प्लीज मुझे बहुत मजा आया था कसम से. ऐसा लगा जैसे मैं स्वर्ग में हूँ.
दीदी- तो एक काम कर अब तू एक हाथ अपना मेरी चूत पर फिराने में लग जा.
और इतना कहते ही मैं दीदी की चूत पर अपना हाथ फिराने में लग गया. तथा इस दौरान दीदी भी अपने एक हाथ से मेरे लंड के टोपे पर हल्का-हल्का हाथ फिराने में लगी हुई थी. अब दोस्तों आपको बताऊ दीदी की चूत से भी काफी गीला-गीला पदार्थ निकला हुआ था. तभी मैंने पूछा- दीदी आपको भी मजा आया हुआ है क्या? आपकी चूत गीली-गीली लग रही है. बहुत चिपचिपी हो रखी है.
दीदी- नही पागल, मेरे को मजा अब तेरा ये लंड देगा.
मैं- कैसे दीदी?
इतना सुनते ही दीदी पहले तो रजाई हटाई और फिर बोली- अब मेरे सामने आ और मेरी चूत को चूम.
अब दोस्तों जैसे ही मैंने उनकी चूत के दर्शन किये तो मेरा लंड फडफडाने के लिए मजबूर हो चला. और तनकर एकदम सख्त हो गया. मुझे इस दौरान दीदी की चूत के सिवाय कुछ भी नही सूझ रहा था. इसलिए मैं कुछ देर तो उनकी गुलाबी सी चूत को चूमने में लग गया. लेकिन अब मेरा मन केवल दीदी की चूत में घुस जाने का हो रहा था.
इसलिए दोस्तों मैं बिना बोले ही दीदी के ऊपर आ गया. और अपना लंड सेट करके दीदी की चूत में डालने की कोशिश करने में लग गया. लेकिन इस दौरान मेरा लंड अंदर जाने के बजाय फिसले जा रहा था. तभी दीदी बोली- एक बार खड़ा हो.
और मैं उपर हो गया. फिर दीदी ने मेरे लंड को अपनी चूत के छेद में सेट किया और बोली- अब जाने दे अंदर. और दोस्तों जैसे ही उन्होंने बोला मैंने एकदम से झटका दिया. और मेरा लंड मंजू दीदी की चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया. और इस दौरान मेरे लंड की तथा दीदी की चूत की सील एकदम से टूट पड़ी. हम दोनों ही चुदाई के भूखे थे.
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इसलिए दीदी भी मेरे साथ चिल्लाई- हहहहह्हः….ह्ह्ह्हह्हह्ह्ह……ईईईईईईईइ………..ऊऊऊऊऊऊउ…………अहहह्हाहा…… रविन्द्र…. आई लव यू….. पागल धीरे डाल…… बहुत दर्द हो रहा है.
मैं- दीदी दर्द मुझे भी हो रहा है लेकिन मजा भी आ रहा है.
दीदी- एक बार बाहर निकाल.
इतना सुनते ही मैंने लंड को बाहर निकाला और देखा की दीदी की चूत से लहू निकलने लगा था. इसलिए अब दीदी ने पास में रखा एक कपड़ा लिया और अपनी चूत को पोंछकर बोली- आजा अब फिर से मेरे ऊपर और अब धीरे-धीरे अपने लंड को मेरे अंदर जाने दे.
अब दोस्तों मंजू दीदी की वो गोरी-गोरी जांघें देखकर तो मानों मेरे को किसी से भी इजाजत लेने की जरूरत नही थी. इसलिए अब मैं फिर से दीदी के ऊपर आ गया और अपना लंड सेट करके दीदी की चूत में घुसा दिया. और अब दीदी दर्द के साथ मजा लेने में लगी थी. और मुझे बोल रही थी- आहाहाह…. रविन्द्र- थोड़ा आगे-पीछे करते रहो…. मजा आ रहा है…आह
मैं- दीदी मेरे को भी बहुत मजा आ रहा है.
इतना सुनते ही दीदी ने मेरे सर को पकड़कर मेरे को लिप्स किस करना शुरू कर दिया. और बोली- आगे पीछे करते-करते मेरे बूब्स को दबा बहुत मजा आएगा. और फिर मैं जैसा दीदी ने बोला ठीक वैसा ही करता रहा.
और अब मानों मेरा मजा डबल होने लगा था. और कब मैंने अपनी स्पीड बढ़ा डाली मेरे को पता भी नही लगा. क्योंकि ढंग की चुदाई मन से होती है. इसलिए जैसे-जैसे मेरा मजा बढ़ता गया. वैसे-वैसे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा डाली. और करीब 10 मिनट तक आगे-पीछे करने के बाद मुझे फिर से मजा आने जैसा फील होने लगा था.
इसलिए मैंने कहा- दीदी मेरे को फिर से मजा आने लगा है.
दीदी- कैसे?
मैं- ऐसा लग रहा है जैसे मैं आपकी इस चूत में अपना लंड पूरा घुसा दू.
दीदी- हाँ प्लीज घुसा दे रविन्द्र… अहहाह…अहः….मजा आ रहा है.
इतना सुनते ही मैंने कुछ झटके और दिए और फिर मैंने लंड का जोर लगाते हुए दीदी की चूत में अपना पूरा लंड समा दिया. और इस दौरान हम दोनों ही आह…आह….आः….अहहाह…. करने में लग गये. और फिर मैंने अपने लंड का माल चूत में छोड़कर दीदी की ऊपर ही लेट गया था.
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क्योंकि मेरे को इस दौरान थोड़ी सी थकान भी महसूस हुई थी. इसलिए अब दीदी मेरी पीठ पर अपना प्यार भरा हाथ घुमाये जा रही थी. और मेरे को इस दौरान बहुत अच्छा फील हो रहा था.
दीदी बोली- कैसा लगा रविन्द्र?
मैं- ऐसा लगा जैसे पहले कभी ऐसा अहसास नही हुआ हो. एक बात बताओ दीदी आपने ये सब पहले किया हुआ था?
दीदी- नही तूने ही किया है तभी तो मेरी सील आज टूटी है.
ये सब बातें करते-करते रात के 12 बज चुके थे. और अब दीदी बोली अब कपड़े पहन लेती हूँ. और अब दीदी बेड से निचे जाकर कपड़े पहनने में लग गयी. और तभी मेरी नजर उनकी गांड पर पड़ गयी. उनकी गोरी-गोरी गांड मेरे लंड को बहुत पसंद आई. इसलिए मैंने कहा- दीदी प्लीज अभी न पहनों अभी मेरे को फिर से आपको पीछे से ये सब करने का मन हो रहा है.
इतना सुनते ही दीदी समझ चुकी थी की ये मेरे को घोड़ी बनाने की चाह रहा है. इसलिए दीदी ने बिना बोले ही घोड़ी वाला आसन ले लिया. और बोली- आजा रविन्द्र मेरे पीछे और मेरे को भी तेरे से पीछे से चुदने की काफी ख्वाहिस है. इसलिए जितना मर्जी हो आज चोदकर मजे ले ले और मेरी चूत का पानी निकाल दे.
इतना सुनते ही मैं दीदी के पीछे आ गया. और पहले तो उनकी चूत की पंखुड़ियों को खोलकर देखा तो वो काफी लाल हो चुकी थी. क्योंकि दीदी की चूत ने पहली बार लंड लिया था. इसलिए वो अभी से ही लाल हो चुकी थी. अब दोस्तों दीदी ने बोला- रविन्द्र प्लीज चोदने से पहले मेरी चूत को चाट मेरे को चटवाने में मजा आने वाला है.
इसलिए मैंने बिना देर किए हुए दीदी की चूत को पीछे से चाटना शुरू कर डाला. और करीब 5 मिनट तक लगातार चाटने के बाद दीदी की आह…. अहा…. आः….अहहः… अहहहहहहहाहाहा…. आह्हहहः…अहहहहह्हा… आह्हहः… हहहाहः अहहहहाह्हा….. निकलने में लग गयी.
फिर दीदी बोली- अब एक काम कर मेरी कमर को पकड़कर अपने लंड को जाने दे मेरी चूत की गहराई तक.
और इतना सुनते ही दोस्तों मैंने मंजू दीदी की गोरी-गोरी पतली सी कमर को पकड़कर उनकी चूत में धक्के देना शुरू कर दिया. और मैं एक टांग बेड पर रखकर अपना लंड मंजू दीदी की चूत में पूरा घुसा रहा था. और मंजू दीदी इस दौरान आह.. आहाह…. अहहहहः…. अहहहहः… आहाह्हः… किये जा रही थी.
क्योंकि ये मेरा तीसरा राउंड था इसलिए मैं लगातार धक्के पर धक्के दिए जा रहा था. और करीब 10 मिनट धक्के देने के बाद ही दीदी की चूत में से पानी का फव्वारा सा चलने में लग गया. और अब उनकी चूत लगातार पानी छोड़े जा रही थी. अब अगले झटकों में जैसे ही मैं लंड डाल रहा था. दीदी की चूत में से फच… फच…फच…फच… की आवाजें आने में लग गयी थी.
तभी ये आवाजें सुनकर अब मेरे को भी काफी जोश आ गया और अब मैं अपनी स्पीड को दोगुनी कर डाला. और लगातार आधे घंटे तक बिना रुके चुदाई करने के बाद अब मेरा फिर से झड़ने वाला था. इसलिए अब मैंने दीदी की कमर को कसकर पकड़कर अपना माल दीदी की चूत की गहराई तक आहा….. अहहः…अहहहः. करते हुए छोड़ दिया.
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और काफी देर तक उनकी कमर को कसकर पकड़ा रखा. फिर जैसा ही लंड ढीला पड़ा तब जाकर दीदी की कमर को छोड़ा. लेकिन दोस्तों सच बताऊ तो अब मेरे को फिर से दीदी को चोदने का मन हो रहा था. क्योंकि उनकी वो गांड मेरे लंड को खड़ा होने पर मजबूर किए जा रही थी. फिर मैंने कहा- दीदी मेरे को फिर से करने का मन हो रहा है.
दीदी- अब रजाई में ही करेंगे जो भी करेंगे वो सब.
इतना सुनते ही हम दोनों रजाई में घुस गये. और फिर दीदी बोली- तू प्लीज घर में किसी को बता मत देना की हमने ये सब किया है.’
मैं- चिंता मत करो दीदी.
इतना कहकर दोस्तों उस रात मैंने और मंजू दीदी ने करीब 6 बार जमकर पहली बार चुदाई का मजा लिया. और फिर आए दिन हम जब भी मौका मिलता था जमकर चुदाई किया करते थे. और मेरा लंड मंजू दीदी को इतना पंसद है की वो जब भी मायके आती है मेरे से चुदवाकर जरूर जाती है. और दोस्तों आज तक मैं उनकी उस गोरी-गोरी गांड का दीवाना हूँ.
दोस्तों ये Didi ki chudai ki kahani आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Sister sex kahani बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.