Sasur Bahu Sex Story – घर में अकेला पाकर ससुर जी ने दिया चूत चुदाई का असली मजा
नमस्कार मित्रों, आप सभी का स्वागत है आपके अपने फेवरेट ब्लॉग GandiStory.com के Rishton me chudai के नए एपिसोड में. हाजिर है आपके सामने एक बार फिर अंजुम जी द्वारा भेजी गयी Sasur Bahu Sex Story लेकर. दोस्तों मेरी यह Sex story sasur bahu एक सच्ची घटना है जिसमे पिछले ही दिनों मेरे ठरकी ससुर ने मेरे को घर में अकेला पाकर अपने 8 इंच के लंड का मजा दिया है.
वैसे आपको बता दूँ की मैं भी हमेशा इस वेबसाइट पर कई लोगों की कहानियां पढ़ती हूँ. और मेरे को ये सब कहानियां बहुत अच्छी लगती है. इसलिए मैंने भी सोचा की क्यूँ न मेरे साथ गुजरी अपनी हसीन सी कहानी आपके संग शेयर की जाए. ताकि आप भी अपने जीवन में गुजरी कोई कहानी यहाँ शेयर कर सकें.
सबसे पहले तो मैं आपको बता दूँ की हम लोग मध्यप्रदेश के मुरेना के रहने वाले है. और मेरे ससुर जी एक अध्यापक के पद से रिटायर्ड है. अभी पिछले ही बरस वह स्कूल से रिटायर्ड हुए है. और मेरे पति नवीन जो की फ़िलहाल रेलवे में नौकरी कर रहे है. और हफ्ते में दो दिन ही मेरे संग रह पाते है. तथा हमारी शादी को लगभग 3 बरस होने को आए है.
मेरे ससुराल में 3 ननद और एक उनका भाई मेरा पति तथा मेरे ससुर जी शामिल है. एवं मेरी सासु माँ की बात करूँ तो दोस्तों उनका किसी बीमारी के कारण 5 बरस पहले ही निधन हो गया था. इसलिए अब बेचारे ससुरजी का ठरकी होना भी जायज है. क्योंकि मेरा मानना है की, दोस्तों इस उम्र में ही लोग असल में प्यार कर पाते है. और जब जीवन साथी ही संग न रहता तो फिर कैसी जिन्दगी?
अब मैं आपको अपने बारें में बताती हूँ दोस्तों, मेरी उम्र अभी 23 बरस की हो चली है. और जब मैं 20 बरस की थी तथा कॉलेज के फाइनल इयर में थी तो मेरी शादी नवीन के साथ हो गयी थी. दिखने में एक स्लिम टाइप की गोरी लड़की हूँ. कॉलेज के दौरान भी कई लड़के मेरे पीछे घूमते थे. लेकिन मैंने कभी उन पर ज्यादा ध्यान नही दिया. और आज भी हमारे घर के बाहर कई आशिक ऐसे है जो मेरे दर्शन के लिए सुबह शाम बैठ जाते है.
इसलिए ऐसा समझकर चलो की अगर मैं आपको मिल जाऊ तो आप मेरे संग 2-4 राउंड तो आसानी से लगा लोगे. क्योंकि मेरे को देखने के बाद किसी लड़के पर वियाग्रा का असर सा हो जाता है. इसी कड़ी में दोस्तों एक दिन की बात है अभी पिछले ही महीने की जब गर्मी पड़ रही थी. तब जैसा की मैंने आपको पहले भी बताया की हम लोग घर में 2 ही जने रहते है. जिनमे मैं और मेरे ससुर जी शामिल है.
इसके अलावा पतिदेव शनिवार को आते है और सोमवार को चले जाते है. अब दोस्तों मैं कई दिनों से नोटिस कर रही थी की मेरे ससुर जी मेरे पर अपनी तिरछी नजर घुमाये रखते थे. और मैं उनसे शर्माकर अपना पलु वगेरह सब सम्भाल कर रखती थी. मुझे डर इस बात का था की, कहीं मेरे ससुरजी को मेरा बदन दिख गया तो वो पक्का मेरे को पेले बिना नही रहेंगे. इसलिए सावधानी पहले ही थी.
फिर दोस्तों एक दिन सुबह जब ससुरजी नहाने के लिए गये हुए थे. तो वो बाहर जानबुझकर अपना टॉवल बाहर भूल गये. और फिर नहाने के बाद मेरे को आवाज जी- अंजुम, मेरा टॉवल बाहर रह गया है, प्लीज मेरे को पकड़ा दो.
मैं बोली- आई पापाजी.
इतना कहकर मैं उनके कमरे में पड़ा टॉवल लेकर चल दी. और फिर जैसे ही मैंने बाथरूम के बाहर आकर बोला- लो पापाजी अपना टॉवल.
ससुरजी बोले- दरवाजा खुला है अंदर दे जाओ.
फिर जैसे ही मैंने दरवाजा खोला तो ससुरजी एकदम नंगे होकर नहा रहे थे. और उनका लंड एकदम सख्त होकर चूत में जाने जैसा बेताब दिखाई दिया. जिसके बाद मैंने नही देखने का नाटक किया और टॉवल को पकड़ाकर बाहर की और चलने ही लगी थी की ससुरजी ने एकदम से मेरे हाथ को पकड़ लिया. और बोले- बेटा क्या हुआ, अच्छा नही लगा क्या मेरा लंड?
मैं बोली- आप मेरे ससुरजी है आप ऐसी बातें क्यूँ कर रहे हो?
ससुरजी बोले- घर में और कौन है जिससे मैं ऐसी बातें कर सकूं, एक तू ही तो है मेरे लिए ऐसी बातें करने के लिए.
मैं- पापाजी ये गलत बात है.
ससुरजी- कुछ गलत नही है, किसी बाहर वाले को ये सब थोड़ी पता है की मैं ऐसा कर रहा हूँ. और मैं जनता हूँ की मेरा बेटा तेरे संग मुश्किल से 2 दिन ही बिता पाता है. इसलिए इस जवानी की प्यास प्लीज मेरे को बुझा लेने दो.
मैं- नही पापाजी ये गलत बात है, आप ऐसी बातें ना करो.
ससुरजी- प्लीज अंजुम, मैं पिछले कई दिनों से तुम्हे चोदने का सपना देख रहा हूँ. अगर मेरी फ़ीलिंग्स को समझती हो तो मेरे को ना मत बोलो. क्योंकि जब से तुम्हारी सासु माँ का निधन हुआ है तब से ये लंड चूत का प्यासा है. और अगर तुम मेरी मजबूरी समझती हो तो प्लीज मेरे को ना मत बोलो.
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इतना सुनकर मेरे को भी थोड़ी दया आ गयी और मैंने कहा- ठीक है, लेकिन प्लीज किसी को पता न चलना चाहिए.
क्योंकि दोस्तों मैंने भी जब उनका इतना बड़ा और मोटा लंड देखा तो मेरे मन में वैसे भी चुदाई वाले ख्याल आने शुरू हो चुके थे. इसलिए मैं ससुरजी को इनकार न कर सकी. और फिर जैसे ही उन्होंने इमोशनल अटैक किया तो मेरे से हाँ बोले बिना नही रहा गया. और फिर जैसे ही मैंने हाँ बोला तो ससुरजी बोले- चलो अब इस लंड को चुसो प्लीज बहुत दिनों से प्यासा है.
इतना सुनते ही मेरे मन में मानों लड्डू से फुट चले. क्योंकि दोस्तों मैं नवीन का लंड भी बहुत चूसती हूँ. मेरे को चूत में डलवाने से ज्यादा लंड को चुसना बहुत पसंद है. ऐसा इसलिए क्योंकि मैं ज्यादातर गंदी फ़िल्में देखती हूँ जिनमे लडकियाँ लड़कों का बड़ा वाला लंड मुह में दबाये रखती है. और कई देर तक उसका चूसकर मजा लेती रहती है.
इसलिए अब मैं घुटनों के बल बाथरूम में ही बैठ गयी और ससुरजी के लंड को आइसक्रीम की तरह चूसने में लग गयी. और मेरे लंड चूसने का तरीका देखकर ससुरजी बोले- यार अंजुम तुम तो लंड चूसने की खिलाड़ी निकली, तेरी सासु माँ तो कितनी जिद्द करता था तब जाकर लंड को मुह में लेती थी. लेकिन तुमने तो मेरे को चूसकर ही चुदाई जैसा मजा दे डाला.
मैं- मेरे को डलवाने से ज्यादा चूसने में ज्यादा मजा आता है.
ससुरजी- अच्छा, तो फिर तुम नवीन का लंड भी भरपूर चूसती होगी?
मैं- हाँ लेकिन उसका इतना बड़ा नही है, आपके वाले से तो आधा भी नही है.
ससुरजी- इसका मतलब तेरे को बड़ा लंड पसंद है?
मैं- हाँ क्योंकि बड़ा लंड ही मेरी चूत की आग को शांत कर सकता है, जो आपके बेटे से नही हो पाती है. अब आपसे ही मेरी चुदाई की आश लगाये बैठी हूँ.
इतना सुनते ही ससुरजी ने मेरे को उठाया और मेरे से चिपक गये. तथा मेरे को किस करना शुरू कर दिया. और करीब 5 मिनट तक मेरे होठो को चूमने के बाद बोला- अब तुम अपने सारे कपड़े निकाल लो.
और फिर मैंने इतना सुनते ही सारे कपड़े निकाल फेंके सिवाय पेंटी और ब्रा के. आपको बता दूँ की मैंने उस दौरान लाल रंग की पेंटी पहनी थी. जो की मेरे गोरे से बदन पर जच रही थी. उसे देखकर झट से में ससुरजी मेरे चूत के ऊपर अपना प्यार भरा हाथ फेरने में लग गये. और जैसे ही उन्होंने मेरी चूत पर हाथ फेरना शुरू किया और मैं ऊऊऊ….. आआआआआआआ………… ईईईईईईईइ………… आआहह्हहहहाअ……. आअहहहह्ह…. करने में लग गयी.
क्योंकि दोस्तों चूत पर हाथ फेरना भी किसी की कला होती है. और ये कला मेरे अनुभवी ससुरजी के पास बखूबी थी. वरना नवीन भी मेरी चूत पर हाथ फेरता है लेकिन मुझे वैसा तगड़ा फील नही हुआ जैसा की ससुरजी के हाथ से हो रहा था. और फिर धीरे-धीरे करके मेरी चूत गीली होनी शुरू हो चुकी थी. और अब जैसे ही ससुरजी को मेरी पेंटी गीली-गीली महसूस हुई तो उन्होंने जरा भी देर न करते हुए खुद से ही मेरी पेंटी को निकाल फेंका.
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और देखा की मेरी चूत से एक लार जैसा पदार्थ निकल रहा है. जो की मेरी चूत में आग लगने की निशानी थी. अब ससुरजी समझ चुके थे की ज्यादा देर न करते हुए अब मेरी चूत को पेल दिया जाए तो अच्छा होगा. लेकिन दोस्तों वो ठहरे एक अनुभवी व्यक्ति तो उन्होंने मुझे खड़ा करके खुद घुटनों के बल बैठकर मेरी चूत को चूमना शुरू कर दिया.
और जैसे ही वो मेरी चूत को चूमने लगे मेरी फिर से अआहह्हा….. ईईईईइ…………… आआआआआआअ………… आ………आआआआआआअ………. अ आला.अ..र….अ.अ.र.अ.र…..अ.र.अ..अ.अ.र.आर. निकलने लग गयी. लेकिन ससुरजी ने मेरी एक न सुनी और मेरी चूत को लगातार 10 मिनट तक चुमते रहे. और उनके चूमने के कारण से ही मेरी चूत झड़ गयी.
और ससुरजी ने मेरी झड़ी हुई चूत के पानी को अपने मुह में गटक लिया. और फिर उनको चुदाई का वो नशा चढ़ा जो की किसी को सेक्स पॉवर की गोली खाने के बाद चढ़ता है. इसलिए अब उन्होंने मेरे को बोला- अंजुम आज तेरी ऐसी चुदाई करूँगा की तू मेरे पास बिना बुलाये चुदवाने के लिए खुद चली आएगी.
और फिर उन्होंने मेरे को बाथरूम में ही कोने में ले जाकर मेरा एक टांग ऊपर करके अपने लंड को मेरी चूत में घुसा दिया. और इस दौरान वो मेरे को धीरे-धीरे धक्के लगाने लगे. जैसे ही उनका आधा लंड घुसा मैं चिल्लाई प्लीज पूरा मत डालो पापाजी मेरे को दर्द हो रहा है.
ससुरजी- अभी कहाँ गया है पूरा अभी तो आधा भी नही गया है ढंग से.
इतना कहकर वो मेरी चूत में धीरे-धीरे अपने लंड को आगे-पीछे करते रहे. और मेरे को इस दौरान काफी मजा आ रहा था. और मैं आह… आह्हह…. आहाहहः… आह्हहहहाह…. करती हुई चुदाई का मजा ले रही थी. और अब ससुरजी भी मेरे को साथ में लिप्स किस किए जा रहे थे.
में भी अब धीरे-धीरे सिसकारी लेने लगी और शर्म के मारे आंखे बंद कर ली. और ससुरजी के लंड को अंदर तक महसूस करने में लग गयी. इतना होते-होते अब ससुरजी ने अपने चोदने की स्पीड बढाई और अब मेरी चूत रस छोड़ रही थी. क्योंकि ससुरजी का लंड अब काफी अंदर जा रहा था. और मैं धीरे-धीरे झड़ने में लग गयी. और मानों बेसुध सी हो पड़ी थी. क्योंकि दोस्तों मेरे को पहली बार ऐसा दमदार लंड मिला था जिसने मेरे चूत को ऐसा चोदा हो जैसे पहले किसी ने न चोदा हो.
ऐसा समझों की मेरे को इस दौरान पहली बार हुई चुदाई जैसा मजा आ गया था. लेकिन ससुरजी कहाँ थकने वाले थे. वो तो अपनी स्पीड वैसे ही बनाये रखे हुए थे. और अब उनके झटकों के साथ ही मेरी चूत से फच…फच…फच…फच… जैसी आवाजें आनी शुरू हो चुकी थी. और दोस्तों इस दौरान अब उन्होंने मुझे बोला- अंजुम तुम अब मेरे कंधों को पकड़ लो. और मैं अब तुमकों गोद में लेकर खड़े-खड़े चोदना चाहता हूँ.
इतना सुनते ही मैंने ससुरजी के कंधे पकड़ लिए और उन्होंने मेरे दोनों जांघों को अपने हाथों से पकड़कर मेरे को अधर कर दिया. और फिर मेरी चूत में जोर जोर से खड़े होकर झटके देने लगे और पुरे बाथरूम में जोर जोर से उनके झटकों की आवाजें सुनाई पड़ने लग गयी. और मैं इस दौरान उनके लंड को चूत की पूरी गहराई में महसूस किए जा रही थी.
और इस दौरान मेरे को फिर से तगड़ा वाला मजा आना शुरू हो चूका था. और फिर से मेरे चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. और करीब 15 मिनट तक मेरे को उठाकर चोदने के बाद ससुरजी बोले- अंजुम मेरे वीर्य निकलने वाला है, कहाँ निकालू?
मैं- पापाजी प्लीज इस चूत में ही जाने दो इसे भी अपने वीर्य की गर्मी महसूस कराओ.
इतना सुनते ही मेरे ससुरजी ने अपनी चुदाई और स्पीड बढ़ाते हुए आहा..अ.अह्हहहह्ह….अहहहहः…. आहाह्हा. करके काफी जोर लगाकर मेरी चूत में ही अपने वीर्य को निकाल फेंका. और फिर मेरे को निचे उतारकर मेरे को चूमना शुरू कर दिया. कभी मेरे पेट तो कभी मेरी गर्दन तो कभी मेरी जांघ पर चुम्बन लिए जा रहे थे.
मुझे ऐसा लग रहा था की, अभी भी ससुरजी को वो शांति नही मिली है जो मेरे को 3 बार मिल चुकी है. क्योंकि वो खेले-खिलाड़ी व्यक्ति थे उनसे बेहतर चुदाई का मजा कौन जनता था. लेकिन वो मेरे को चूम इसलिए रहे थे की अधिकतर मर्द चुदाई के बाद लड़की से दूर हो जाते है. बल्कि लड़की की डिमांड होती है की उसका पार्टनर उसे चोदने के बाद काफी प्यार करें.
और ससुरजी मेरे को अपनी दीवानी बनाने के लिए ये सब किए जा रहे थे. अब आपको तो पता ही है 55 बरस की उम्र ऐसे ही थोड़ी गुजारी है ससुरजी ने. काफी चुदाई का अनुभव प्राप्त था उन्हें. तभी उन्होंने अपने लंड को 8 इच जितना लम्बा कर रखा था.
अब दोस्तों करीब 5 मिनट तक चूमने के बाद ससुरजी ने बाथरूम का शावर चालू कर दिया. और वो पानी बुँदे जैसे ही मेरे ऊपर पड़ी मैं फिर से चुदने के लिए तैयार हो गयी. और मैं समझ चुकी थी की ससुरजी इसी प्रकार मेरी सासु माँ को भी चोदते होंगे. तभी उन्हें पता है की ठंड में चुदाई का मजा कुछ और ही होता है. इसलिए मैंने पूछा- पापाजी आप कभी सासु माँ को भी बाथरूम में चोदे हो?
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ससुरजी- हाँ लगभग जब नवीन घर पर नही होता था तब मैं तेरी सासु माँ को बाथरूम में लाकर ही चोदता था.
मैं- तभी आपने ये शावर चालू किया है, ये चालू करने के बाद मेरा फिर से चुदने का मन हो गया है.
ससुरजी- हाँ अंजुम ये सब नार्मल है, ये सबके साथ होता है. तुम चिंता मत करो अभी तुमको इस बार तुम्हारी फेवरेट पोजीशन में चुदाई का मजा दूंगा. बताओ तुम्हे कैसे चुदना ज्यादा पसंद है?
मैं- मुझे घोड़ी बनकर चुदना पसंद है पापाजी.
इतना सुनकर तुरंत ससुरजी ने फिर से अपने लंड को मेरे मुह में थमा दिया. और मैं फिर से उनके लंड को आइसक्रीम की तरह चूमने में लग गयी. और इस दौरान उनका लंड 2 मिनट में ही खड़ा हो गया. और फिर वो मेरी चूत को ठीक वैसे ही चूमने में लग गये जैसे की पहले चूमे थे. और मैं फिर से आअहह्हह….अहहहः… हहहः…. ईईईईईईइ… . .. .ऊऊऊऊऊऊ…. करने में लग गयी.
मेरा ये अंदाज देखकर अब ससुरजी ने मेरे को तुरंत घोड़ी बना लिया और शावर की स्पीड आधी करके मेरी कमर को कसके पकड़ ली. और फिर पीछे से अपने तगड़े वाले लंड को डाल दिया. और पीछे से जैसे ही उन्होंने अपना लंड डाला मुझे लगा की उन्होंने कोई लोहे का सरिया घुसा दिया है. इसलिए मैं फिर से चीख पड़ी और आहाहहः………. अहहहहः…..अहहहह्हा… करने में लग गयी.
ससुरजी- डरो मत अंजुम ये लंड ही है. तुमको अपनी फेवरेट पोजीसन में चुदना है ना इसलिए इसका भरपूर मजा लो.
इतना कहकर अब ससुरजी धीरे-धीरे मेरी कमर को पकड़कर धक्के देने लग गये. और मैं आहाहाह… आहाह्हा…अहहह्हः …. अहहहः किए जा रही थी. और अब करीब 5 मिनट तक धक्के देने के बाद मेरा दर्द मजे में तब्दील हो चूका था.और आगे वाले झटकों को मेरी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था. क्योंकि इस दौरान ससुरजी का लंड मेरे अंदर काफी गहराई में जा रहा था.
और इस दौरान ससुरजी मेरे पीछे से मेरे कूल्हों पर थप्पड़ पर थप्पड़ मारे जा रहे थे. और आपको बताऊ उनकी ये चोटें मेरे मजे को डबल कर रही थी. और मेरे को इस दौरान अब और थप्पड़ खाने का मन हो रहा था. इसलिए मैंने कहा- जोर से मारो पापाजी.
इतना सुनकर ससुरजी ने मेरे कूल्हों को थप्पड़ मार-मारकर एकदम टमाटर जैसा लाल कर दिया था. और साथ में उनके वो दमदार लंड के झटके … आये हाय… करीब 30 मिनट तक लगातार चोदने के बाद में फिर से एक बार झड़ गयी और मेरी चूत अब पानी-पानी हो चुकी थी. फिर ससुरजी बोले- बेटा आया ना मजा?
मैं- पापाजी आप इतने दिन मेरे को क्यूँ नही चोदे? मेरे को ऐसे ही लंड की तलाश थी.
ससुरजी- देर से ही सही बेटा लेकिन अब तुमको मैं हमेशा ऐसी ही चुदाई का मजा दूंगा. तुम चिंता मत करो.
और इतना कहकर ससुरजी ने अपनी स्पीड बढाकर आहा.अ.अ.अ..अ.अ.अ. करके मेरे कंधों को जकड़कर अपने लंड का माल फिर से मेरी चूत में ही धकेल दिया. और मैं भी दर्द से कराह उठी और मैं भी आहाहहह्हः….अहहः दर्द हो रहा है, मजा आ रहा है….. प्लीज ऐसे ही जोर लगाये रखो पापाजी.
इतना सुनकर मेरे ससुरजी ने करीब 2 मिनट तक मेरे कंधों को पकड़े रखा और मेरी चूत की गहराई में अपने लंड को डाले रखा. तथा मेरे को इस दौरान ऐसा मजा आया की मैं बयाँ नही कर सकती.
इसके बाद हम दोनों एक दुसरे से अलग हुए और अब हम नहाकर बाहर निकल गये. तथा उस दिन के बाद से हम हमेशा चुदाई का भरपूर मजा लेते है. और आपको सच बताऊ तो अब मेरे को नवीन की बिलकुल भी कमी महसूस नही होती है. और नवीन का लंड अब मेरे को काफी फीका लगने लगा है. इसलिए मैं अपने ससुरजी की दीवानी बन चुकी हूँ.
दोस्तों ये Sasur Bahu Sex Story आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Sex story sasur bahu बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.