Didi Ki Chudai Story – कपड़े बदलता देख डोला चचेरे भाई का मन
नमस्कार मित्रों, स्वागत है आप सभी का आपके अपने फेवरेट ब्लॉग gandistory.com पर हाजिर आपके सामने एक बार फिर से अदिति जी द्वारा भेजी गई Didi Ki Chudai Story लेकर. दोस्तों यह Sister sex kahani अभी पिछले ही दिनों की है जिसमे मेरे छोटे चचेरे भाई रविन्द्र ने चुदाई करके मुझे जवानी का अहसास कराया है.
राजस्थान के बीकानेर जिले के एक छोटे से गाँव में संयुक्त रूप से रहते है. हमारे परिवार में कुल 12 मेम्बर है. जिनमे से हम 6 भाई बहन है. तथा मैं अपने बारें में बताऊ तो दोस्तों में फ़िलहाल 24 बरस की हो गयी हूँ. और मेरा चचेरा भाई 16 बरस का हो गया है. लेकिन दोस्तों उम्र केवल एक नम्बर है. ये बात रविन्द्र ने मेरे को पेलकर अच्छे से सिखा दी.
और जब से मुझे उसने चोदा है मुझे तो मानों चुदाई की लत सी लगी हुई है. तथा इसके बाद मैं हमेशा गंदी फिल्मे देखकर अपना गुजारा कर लेती हूँ. इसके अलावा GandiStory.com पर मैं हमेशा कहानियां पढ़ती हूँ. और यहाँ पर मुझे भी अपनी कहानी बताने का मौका मिला है. तो क्यों ना मैं भी अपने साथ हुई कहानी आपको बताऊ जिसे जानकर आप भी अपना मनोरंजन करें.
चलो अब अपनी कहानी की शुरुआत करते है, एक दिन की बात है दोस्तों जब मैं और रविन्द्र बाहर मार्केट में जाकर आते है. और फिर रविन्द्र तथा मैं दोनों खाने के लिए बहुत सारी चीजें लेकर आते है. अब दोस्तों हमें बाजार में खाने का शौक तो है नही इसलिए घर चलकर खाने के लिए काफी एक्साइटेड रहते है.
तब जब हम घर पहुंचे तो रविन्द्र मेरे पीछे-पीछे कमरे में आ गया. और मैंने भी खाने की चीज वहीँ पर रख दी. तथा इस दौरान रविन्द्र चीज को खोलकर खाने लग गया. अब दोस्तों गर्मी का टाइम था तो मैंने अब अपने कपड़े बदलना बेहतर समझा और मैंने सोचा की अभी रविन्द्र छोटा ही है. इसलिए इसका ध्यान वैसे भी खाने में है. और मैं अपने कपड़े बदल लेती हूँ.
तो दोस्तों सबसे पहले मैंने रविन्द्र को बोल दिया की तुम उस साइड चेहरा करके खा लो. मुझे अब चेंज करना है तो दोस्तों रविन्द्र ने मेरी बात का कोई ध्यान नही दिया. और अपने खाने पर ही ध्यान लगा रखा था. तो मैंने इस दौरान अपना कुरता उतारा तथा दूसरा कुरता डाल लिया.
फिर दोस्तो मैंने अपना सलवार का नाडा खोला और धीरे-धीरे निचे सरकाया तो मैंने देखा की रविन्द्र मेरी ही तरफ देख रहा था. और फिर मैंने उसके सामने ही सलवार को पूरा उतार दिया. इस दौरान मैंने काले रंग की पेंटी पहन रखी थी. और फिर मैंने देखा की रविन्द्र की आँखों में एकदम ही चमक आ गयी थी.
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और वह मेरे नंगे टांगों को बिना आँख झपकाए ऐसे देख रहा था जैसे कोई शिकारी अपने शिकार को देख रहा हो. मैं हालाँकि ये सब देखकर समझ तो चुकी थी की रविन्द्र अब जवान हो गया है. और आज मैंने इसके सामने कपड़े चेंज करके गलती कर दी. हालाँकि दोस्तों मुझे वैसे चुदाई का बिलकुल भी नॉलेज नही था.
लेकिन जैसा की उसने मेरे को नंगा देखा तो वहां से उठकर वह मेरे पीछे आ गया और मेरे कुरते को उठाकर पीछे से मेरी गांड देखने लग गया. और बोला- दीदी आप अंदर से कितनी गोरी हो, मुझे आपको ऐसे देखकर बहुत अच्छा लग रहा है.
मैं- चल हट पागल अपनी दीदी के बारें में ऐसा बोलता है.
रविन्द्र- सॉरी दीदी, लेकिन मुझे सच में आपको ऐसा देखकर कुछ-कुछ हो रहा है.
मैं- क्या हो रहा है जरा बताना.
रविन्द्र- पता नही दीदी लेकिन मेरा खड़ा होने लगा है.
मैं- इतने में ही खड़ा हो गया है, अब क्या करना है?
रविन्द्र- दीदी मेरा आपकी पेंटी उतारकर देखने का मन है.
मैं- नही बाबा तुम मेरे भाई हो पागल ऐसे कैसे सोच सकते हो?
रविन्द्र- भाई हूँ लेकिन दीदी आपका सगा भाई नही हूँ. प्लीज मुझे आपकी पेंटी उतार लेने दो.
मैं- चलो ठीक है, मैं खुद ही उतार कर दिखा देती हूँ.
और दोस्तों जब मैंने अपनी पेंटी उतारकर रविन्द्र को दिखाई तो मैंने इस दौरान पहले ही दिन अपने बाल साफ़ किये थे. तो मेरी चूत (didi ki chut) एकदम रसीली और गुलाबी टाइप की दिख रही थी. जिसे देखकर रविन्द्र ने आव देखा न ताव एकदम से मेरी चूत को सहलाने लग गया. और फिर उसका ये अंदाज देखकर मेरे अंदर भी कुछ-कुछ होने लग गया.
फिर उसने कहा सॉरी दीदी, लेकिन ये जरूरी था मुझे और कर लेने दों. फिर चाहे अच्छा लगे तो इजाजत देना लेकिन अभी मेरे को बहुत अच्छा लग रहा है. आपका ये गोरा बदन मेरे को मदहोश कर रहा है. इसके बाद दोस्तों उसने कहा दीदी आप लेट जाओ खटिया पर.
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तो उसके कहे अनुसार मैंने लेट गयी. और फिर रविन्द्र और मैं एकदुसरे को बेतहासा चूमने लगें. वो चूमते चूमते मेरे चुचियों को दबाने लगा. मेरे मुंह से आह….आह…आह की आवाज आने लगी. फिर वो अपना जीभ मेरे मुंह मे डालने लगा जिसे मैं चूस रही थी फिर कभी वो मेरे मुंह मे कभी मैं उसके मुंह मे जीभ डाल डाल कर चूस चूस कर अपने प्यार का मजा ले रहे थे.
मुझे ऐसा लग रहा था की रविन्द्र आज मेरे को पागल करके ही मानेगा. क्योंकि दोस्तों वह इतना सा बच्चा जिसे मैं एकदम नादान समझ रही थी वो सब कुछ कर रहा था. जो चुदाई के दौरान एक लड़की को मचलाने के लिए चाहिए होता है.
इसके बाद रविन्द्र मेरा हाव-भाव समझ गया और मेरे बहुत करीब आ गया. मेरी धड़कन बहुत तेज हो गई. रविन्द्र ने मेरे चेहरे को दोनों हाथों से पकड़ लिया और मेरा माथा चूम लिया. उसे इतना प्यार देखकर मेरी आंखों में पानी आ गया. माथे से फिर से मेरे गाल को चूमने लगा और फिर गले पर किस करने लगा.
मैंने भी अपने होंठ सामने रखे और उसके होठों को चूमने लगा. रविन्द्र का हाथ अपने आप मेरी कमर पर और धीरे-धीरे कमर से मेरी गांड पर आ गया. जैसे ही उसका हाथ मेरी गांड पर आया, मैं समझ गयी कि आज वह मुझे यहाँ खटिया पर सिर्फ चोदने के लिए लाया है.
रविन्द्र मेरी गांड को पीछे ऊपर से सहलाने लगा. मुझे दोस्तों उसकी ये हरकते इतनी अच्छी लग रही थी की मैं अपने आप पर काबू नही रख पाई और बोली- रविन्द्र आज तुम मेरे को पागल करके ही मानोगे.
रविन्द्र- कैसे दीदी?
मैं- तेरी इन हरकतों से मेरी चूत में आग लग गयी है.
इसके बाद रविन्द्र निचे बढ़ा और मेरी चूत (bahan ki chut) की पंखुडियो को खोलकर देखा तो उसमे से चिपचिपा पदार्थ निकल रहा था. तो उसने जरा भी देर न करते हुए अपनी जीभ मेरी चूत पर टिका थी. और मैं इस दौरान आह…. आह…. आह….उ… रविन्द्र….. प्लीज मत तडपाओ. ऐसे कर रही थी.
मेरी ऐसी तडप देखकर रविन्द्र बोला- दीदी लगता है अब आपकी चूत को चुदाई की काफी ज्यादा जरूरत हो चली है.
मैं- हाँ ज्यादा श्याना मत बन और जा पहले कमरे के कुण्डी लगाकर आ.
इसके बाद रविन्द्र हंसा और उठकर कुण्डी लगाने चला गया और फिर से मेरी चूत पर ऊँगली मसलने लग गया. और मैं उसकी इन हरकतों से काफी एक्साइट हो चुकी थी. तो अब उसने अपनी शर्ट के बटन खोले और फिर अपनी पैंट उतार दी.
और मैंने भी अपना हाथ उसके लंड तक ले लिया और उसे सहलाने लगा. फिर उसने मेरी चूत को सूंघा और चूमा. थोड़ी देर बाद उसने मेरा मुंह बंद कर दिया और मेरी टांगों को खोल दिया और अपने हाथ से मेरी चूत पर 3-4 हलके किस कर दिए.
फिर उसने लंड को चूत पर रख दिया और ज़ोर से झटके से एक ही बार में पूरा लंड अंदर कर दिया और मैं काँप उठी. वह अब कहाँ रहने वाला था?
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मेरे दोनों बूब्स को दोनों हाथों में पकड़कर वो मुझे चोदने वाला था. स्तनों को मुंह में लेकर चूसने लगा और नीचे से दम घुटता रहा. कुछ देर इस तरह चोदने के बाद उसने मुझे उल्टा कर दिया और एक झटके से मेरी गांड के नीचे से लंड को चूत के अंदर डाल दिया.
आपको बताऊ दोस्तों रविन्द्र के पीछे से उसके झटके बहुत तेज थे. चोदने के दौरान वह मेरी गांड को चटाई पर मारकर चूम रहा था. उसका लंड ऐसा था की कुछ ही झटकों से मेरा पानी निकल गया. चूत गीली थी लेकिन रविन्द्र रुकने का नाम नहीं ले रहा था. उसकी वासना बढ़ती जा रही थी. मानों मेरे को काफी दिनों से चोदने के प्लान में था.
वो दनादन मेरे को पीछे से ऐसे पेल रहा था की मेरे बूब्स भी हिल-हिलकर आगे पीछे हो रहे थे और मेरे को आंनद की अनुभूति दे रहे थे. उसकी चुदाई करने का अंदाज देखकर मैं बोली- रविन्द्र सच बताना पहले भी किसी की चुदाई किए हो?
रविन्द्र- हाँ दीदी क्लास में गर्लफ्रेंड की की है लेकिन उसके आपके जैसी गांड नही है. जो मेरे हर झटके में हिल सकें. आपकी बात ही कुछ और है दीदी.
मैं- अच्छा, तेरे को इतना अच्छा लग रहा है?
रविन्द्र- पूछो मत दीदी आप तो केवल मेरे को पप्पी दो मैं आपका दीवाना हो गया हूँ. तभी तो ये झटके जोर-जोर के लग रहे है.
मैं- वो तो है.
इसके बाद दोस्तों रविन्द्र ने अपने झटके बढाये और फिर बोला- दीदी मेरा होने वाला है कहाँ निकालू?
मैंने कहा- पागल बाहर मत निकाल देना मैं टेबलेट ले लुंगी अंदर ही छोड़ मेरे को तेरे माल को अंदर तक फील करना है. और फिर रविन्द्र ने भी जोर का झटका देकर अपना माल मेरी चूत में ही झाड़ दिया. और अपने लंड को बाहर निकालकर बोला- दीदी आपने तो पानी की गंगा बहा डाली.
मैं- तो तूने चुदाई भी इसी प्रकार की करी है गंगा तो बहनी ही थी पागल.
ये सुनकर रविन्द्र ने मेरे को चूमना फिर से शुरू कर दिया. और उसका अब मैं खुलकर साथ दे रही थी. करीब 10 मिनट तक मैंने और रविन्द्र ने लिप्स किस किया और फिर रविन्द्र बोला- दीदी फिर से गंगा का पानी बहाऊ क्या?
मैं- ये भी कोई पूछने वाली बात है क्या पागल. आज से ये चूत तेरी ही है जो मर्जी कर ले.
इतना कहते ही वो मेरी चूत को फिर से चाटने लग गया और करीब 5 मिनट तक मेरी चूत के दाने को ऊपर से चाटकर मेरे को पागल कर दिया. तथा फिर से अपना लंड मेरे मूंह में दे दिया और मेरा सर पकड़कर अपने लंड को अंदर बाहर करने लग गया.
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अब जब रविन्द्र का लंड फिर से सख्त हो गया तो उसने कहा दीदी इस बार आपको सामने वाली टेबल पर ले जाकर चोदने का मन है. जैसे में क्लास में मेरी GF को चोदता हूँ वैसे ही.
इतना सुनते ही मैं टेबल पर चली गयी और दीवार का सहारा ले ली. तथा रविन्द्र ने मेरी दोनों टांगो को उठाकर अपना लंड मेरी चूत में डाल दिया और मेरे को करीब 30 मिनट तक एक ही रफ्तार में चोदता रहा. उसका ये चुदाई का अंदाज देखकर मेरे को बहुत अच्छा लग रहा था.
तो मैंने कहा- कहाँ से सीखी है ऐसी चुदाई?
रविन्द्र- मेरी GF ने सिखा दी और कुछ आपके गोरे बदन ने. हाहाहा
मैं- रुकना नही है ऐसे ही चोदते रहो मेरे को बहुत मजा आ रहा है. काश तुम मेरे BF होते कितना अच्छा होता…आह…आह
रविन्द्र- कोई बात नही दीदी घर में दिखावे का भाई ही समझ लेना पर जब आपका मन हो चुदवा लेना मेरे से.
मैं- हाँ लेकिन कोई देख लेगा तो?
रविन्द्र- अरे पागल दीदी जब घर में कोई नही होगा तब हम चुदाई करेंगे ऐसे थोड़ी करेंगे सब के सामने.
मैं- हाँ ये ठीक कह रहे हो.
इसके बाद फिर से रविन्द्र ने अपने झटकों की स्पीड बढाई और टेबल इस दौरान..चु….चु…चु करने लग गयी. तो फिर से रविन्द्र ने आखिर में अपना माल मेरी चूत में ही झाड़ दिया. और फिर से देखा तो बोला- दीदी फिर से अपने गंगा बहा डाली?
मैं- तू वास्तव में चुदाई मास्टर है रविन्द्र, तू बहा सकता है मेरी चूत से पानी की गंगा औरों की हिम्मत नही है.
रविन्द्र- और कौन? बताओ दीदी.
मैं- किसी को बता मत देना लेकिन वो पड़ोस वाला महेंद्र मेरा BF है साले से कुछ नही हो पाता है. मेरे सलवार उतारते ही उसका निकल जाता है. कमीना कहीं का पूरा मजा खराब कर देता है.
रविन्द्र- चिंता मत करो दीदी, अब मैं हूँ ना मैं आपकी चुदाई रोज करूँगा.
रविन्द्र ने दीदी को चोदा और इसके बाद हम दोनों ने अपने कपड़े पहने और बाहर निकल गये. और दोस्तों इसके बाद जब भी मौका मिलता है हम दोनों दिन में एक बार तो ढंग से चुदाई कर लेते है. और गनीमत है की आजतक हमारे रिश्ते का किसी को पता भी नही चला है.
दोस्तों ये Didi ki chudai kahani आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है. उम्मीद है आपको यह Cousin sister sex story बहुत पसंद आई होगी. चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ. अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं.