Train Me Chudai Kahani – अनजान लड़की को चलती ट्रेन में चुदाई का दिया भरपूर मजा
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स्वागत आप सभी का आपके अपने फेवरेट ब्लॉग gandistory.com पर हाजिर आपके सामने फिर से मनोज जी द्वारा भेजी गई ट्रेन में चुदाई की कहानी (Train Me Chudai Kahani) लेकर. दोस्तों यह Train me chudai story जब में दिल्ली से जयपुर जा रहा था तब की है जब में चेतक एक्सप्रेस में बेठा हुआ था जनरल डिब्बे के अन्दर. तब मनीषा नाम की लड़की के साथ मस्त चुदाई का आनंद लिया.
दोस्तों सबसे पहले तो मैं अपने बारें में बताऊ तो मेरी उम्र अभी 20 साल है और मैं एक जवान लड़का हूँ. तथा अक्सर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी के लिए मुझे रात को ट्रेन के माध्यम से दुसरे शहर जाना होता है. ताकि सुबह जल्दी मैं अपने परीक्षा सेंटर पर पहुँच सकूं.
मैं हमेशा जब भी मेरा मन नही लगता तब Gandistory पर कहानियां पढता हूँ जहाँ लोगों ने अपनी कहानियां शेयर की है तब से मुझे भी ऐसा लगा की मुझे भी अपनी कहानी इस पोर्टल पर बताना चाहिए. और आप सभी पाठकों का मनोरंजन करवाना चाहिए.
तो दोस्तों हुआ क्या की अभी मई महीने की बात है मैं जा रहा था कृषि पर्यवेक्षक की परीक्षा देने. रात के 12 बजे की बात है. ट्रेन में जनरल डिब्बे में जगह नही थी. हालाँकि मुझे तो सीट मिल गयी थी. लेकिन बहुत से लोग ऐसे थे जो खड़े ही थे. उन्ही मैं से एक मनीषा नाम की खुबसूरत लड़की भी खड़ी थी. जिसे देखने पर दोस्तों आप भी उसकी चुदाई करे बगैर नही रह पाओ.
इसलिए दोस्तों मुझसे देखा नही गया क्योंकि मनीषा मेरे पास ही खड़ी थी और मैं बैठा हुआ था. दिखने में एकदम किसी परी जैसी लड़की मनीषा जिसके बूब्स का आकार उसकी उम्र के हिसाब से काफी बड़ा था. मुझे लगा यार ये लड़की शायद बहुत से BF का लंड पहले से ले चुकी है.
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तभी शायद इसकी गांड और बूब्स बाहर निकले हुए दिख रहे है. इसलिए दोस्तों गुडगाँव आते-आते जनरल डिब्बा लगभग और भर गया और मनीषा काफी परेशान सी हो रही थी. तो मैंने मनीषा से कहा- आप थोड़ी देर मेरी सीट पर बैठ जाओ, मैं कुछ देर खड़ा हो जाता हूँ.
मनीषा- नही, कोई जरूरत नही.
मैं- प्लीज आपके साथ बैग भी है इतना बोझ आप कैसे उठा रही हो, मेरी मानो और थोड़ी देर बैठ जाओ.
मनीषा- ठीक है, थैंक्स. और हल्की सी मुस्कान दी.
फिर दोस्तों मनीषा मेरी सीट पर बैठ गयी और मैं खड़ा हो गया. और मनीषा से पूछा- कहा जा रही हो आप वैसे?
मनीषा- मेरी कृषि पर्यवेक्षक की परीक्षा है कल इसलिए परीक्षा देने जा रही हूँ.
मैं- अच्छा, बहुत बढ़िया, मेरी भी वही परीक्षा है और मैं भी परीक्षा देने ही जा रहा हूँ.
मनीषा- अच्छा, आपका सेंटर कहाँ आया है?
मैं- जयपुर.
मनीषा- बहुत खूब, मेरा भी भी वहीँ पर आया है.
फिर दोस्तों हम खूब घुल मिल से गये. और एक दुसरे के बारें में बातें करने लग गये. जैसे आप कहाँ से हो? क्या करती हो? ये सब.
इसके बाद अगले स्टेशन पर ट्रेन खाली हुई और पास वाली सीट में ही मैं मनीषा के बगल में बैठ गया.
और मैंने देखा मनीषा नीले रंग के शूट में मस्त दिख रही थी और जैसे वो उठकर कूप से बाहर गई, उनके गोल गद्देदार चूतड़ के फांकों को टकराते देख, मेरा लंड फनफना उठा।
मनीषा- आप किनके है?
मैं- मेरी जाति चौधरी है.
मनीषा- मैं भी चौधरी ही हूँ. तुम्हारी कोई GF है?
मैं- नही, कोई मिली ही नही जो इतना सब पूछे मेरे को.
मनीषा- हाहाहा, मैंने पूछा न बताओ?
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मैं- नही है.
मनीषा- अच्छा तब ठीक है.
मैं- कैसे?
मनीषा- नही बस ऐसे ही. हाहाहा
मैं कुछ समझ नहीं पाया और उनके बगल में जाकर बैठ गया। फिर मनीषा ने झट से अपनी बाहें मेरे कंधे में डालकर, मुझे असामंजस्य में डाल दिया।
मनीषा- आप कितने अच्छे बन्दे हो जो मुझे सीट दी.
तो दोस्तों मैं भी जब उन्होंने कंधे में बाहे ले रखी थी तो प्यार दिखाया और उनके चेहरे पर चुम्बन दे दिया और बोला- यार आप कितनी हॉट और सेक्सी हो काश आप मेरी GF होती. मजा आ जाता जिन्दगी का.
और ये कहते ही, मनीषा ने मेरी जांघ पर अपना चूतड़ रखा और मुझे चूमने लगी। फिर मेरे हाथ उनकी पीठ को सहला रहे थे। मनीषा के गोल और गुंबदाकार नितम्ब का एहसास, जांघ पर मुझे मज़ा देने लगा। हमारे कूप का पर्दा भी लगा हुआ था और दोनों के सिवाय कोई और वहां नहीं था. क्योंकि धीरे-धीरे ट्रेन खाली हो गयी थी.
मनीषा मुझे चूम-चूमकर मस्त कर रही थी और मैं भी अब उनके होंठो को ही चूमने लगा और फिर उसने अपने होंठ मेरे मुंह में डाल दिए। अब होंठ चूसते हुए , उनके दाहिने स्तन का एहसास मेरी छाती को मिलने लगा और पल भर में ही उनकी लम्बी जीभ मेरे मुंह में थी।
जिसे चूसते हए, मैंने उनकी सलवार को ऊपर कर दिया और मनीष के बूब्स मुझे अब साफ़ साफ़ दिख रहे थे। अब हम दोनों सेक्स की दुनिया में खो गए थे। दोस्तों मनीषा के बारें में आपको बताऊ तो वह पहले से ही एक चुद्दकड लडकी थी इसलिए वह सेक्सी दिख रही थी.
फिर मैंने उनकी जीभ मुंह से निकाली और मनीषा को बर्थ पर लिटा दिया। ट्रेन के डिब्बे में मानो सन्नाटा पसरा हुआ था। तो अब मैं सलवार का नाडा खोलता हुआ, उसके चूचे पकड़ कर दबाने लगा और उसने भी बिना झिझक के अपनी सलवार उतार दी।
इसके बाद मैं मनीषा के कमर के पास होंठ रख कर चुम्बन देते हुए, ज्योंहि मैंने उनके कमर की ओर उठाना चाहा, उसने मेरा हाथ पकड़ लिया और फिर अपने नग्न चूचे पर रख दिया। उसने अपने बूब्स दबाने के लिए रिक्वेस्ट की. तो मैं भी दोस्तों कहाँ पीछे हटने वाला था मैंने ढंग से मनीषा की बॉल्स को चूसा और दबाने लग गया.
इतना सब होते देख मनीषा एकदम मानो तड़प उठी. और मुझे सब कुछ सच-सच बताने लग गयी. की उसकी काफी दिनों से चुदाई नही हुई है. जब से उसका BF विदेश चला गया है कमाने के लिए. तो प्लीज आज की रात और अब से तुम ही मेरी चुदाई करो.
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इतना सुनते ही दोस्तों मैं मनीषा के उपर सवार होकर चूचे को मुंह में लेके चूसने लगा। उसकी पूरी चूची मेरे मुंह में नहीं घुस सकती थी, तो मैं चूची के अगले भाग को चुसक-चुसक कर चूसता हुआ, दूसरे स्तन की घूंडी को मसलने लगा। अब मनीषा मेरे बाल पर हाथ फेरते हुए सिसक रही थी।
मनीषा: ओह.. ओह.. मनोज मुझे मज़ा आ रहा है। आह! आराम से चूसो ना।
तब मेरे मुंह से लार टपकने लगी। मैं बाईं चूची छोड़, अब दाहिनी चूची को मुंह में भर कर चूसने लगा और मनीषा मेरे चूतड़ सहला रही थी। इतना सब होते देख मेरा 8 इंच लम्बा लंड शॉर्ट्स के अंदर ही सख्त हो चुका था। और बाहर आने के लिए बेताब हुआ जा रहा था.
उधर मनीषा अब सिसकियां लेने लगी: ओह.. मनोज, तुम अनजाने होकर भी मुझे चुदाई से पहले कितने गर्म कर दिए हो.
मैं- अभी रोको मनीषा चुदाई का मजा तो बाकि है.
अब उसके गोरे बदन , बड़ी-बड़ी चूचियां , गहरी नाभि और मोटी चिकनी जांघों को देख मेरा मन डोल उठा और अब मनीषा बर्थ पर बैठ गई, वो भी घुटनों के बल। जब पैर मोड़कर उन्होंने बर्थ पर रखे, तो दोनों जांघें इस कदर फैल गई थी, मानों कोई चुदक्क़ड लड़की हो।
मैं फिर उनके पैरों के सामने फर्श पर बैठा और उन्होंने खुद अपने चूतड़ बर्थ के किनारे कर दिए। तब उसकी फूली हुई जांघों को मैं सहलाने लगा और गांड की लालिमा देख कर, ये नहीं लग रहा था, कि ये 20-21 साल की लड़की है क्योंकि उसकी गोरी-गोरी गांड मुझे केवल 15 बरस की लड़की जैसी लगी लेकिन उसकी चूत फैली हुई थी, तो दरार स्पष्ट नज़र आ रही थी। क्योंकि दोस्तों उसने पहले बहुत चुदाई करवा कर अपनी चूत का भुत आराम से उतार रखा था.
फिर मैं उसकी चूत में जीभ घुसाए चाटने लगा, तो उसकी चूत पर हल्के बाल थे। मै जांघों को चूम-चूम कर मस्त हो गया। फिर बुर में जीभ घुसाए चाटने लगा, तो साली की चूत में से मूत की गंध आ रही थी। लेकिन सेक्स में सब चलता है। फिर मनीषा मेरे सर के पीछे हाथ लगाए सिसकने लगी।
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मनीषा: उह.. ओह.. आह.. मनोज कृप्या अब छोड़ो चाटना और चोदो मुझे।
और मैंने उसके बुर में से जीभ निकाल दी। फिर मनीषा मेरे शॉर्ट्स उतारने लगी और मेरे टाईट लंड को पकड़ कर, उसे गाल पर रगड़ते हुए मस्ती करने लगी थी। अब मेरा चोदने का मन था। तभी वो मेरे लंड को मुंह में लेकर चूसने लगी, तो मैंने हाथ उसके सिर पर रख दिया था।
फिर मेरा लंड उसके मुंह का प्यार पाकर और अकड़ रहा था और तभी मैंने चूतड़ उठा-उठा कर उसके मुंह को ही लंड से चोदना शुरु कर दिया। अब वो साली रण्डी, आराम से पूरा लंड मुंह में लिए चुभलाए जा रही थी। पल भर बाद उसने मेरा थूक से सना लंड छोड़ा और फिर जीभ से चाटते हुए, मुझसे नज़रें मिला रही थी।
दोस्तों उसकी सेक्सी अदाएं मुझे तड़पा रही थी और फिर वो लंड छोड़ बर्थ पर बैठ गई। मनीषा बर्थ पर लेटी, और फिर मैं अपना लंड उसकी चूत में घुसाने लगा। उस साली की चूत बिल्कुल रसीली हो चुकी थी।
फिर मैं उसकी जांघों के बीच बैठकर, दे दनादन चोदता हुआ, उसके स्तन को दबाने लगा. तो मैडम मेरे गाल चूमने लगी और साथ ही मुझे कसकर पकड़े हुए, अपनी चूतड़ भी उछालने लगी और मेरा लंड घपा-घप अंदर-बाहर हो रहा था।
मनीषा पहले राउंड में चूतड़ उछाल-उछाल कर चलती ट्रेन में चुदाई में मस्त थी और मेरे सीनें से उसकी चूचियां रगड़ खा रही थी। कमर का कमर से टकराव बहुत मज़ा दे रहा था। मेरा मोटा लंड चूत का रस पीकर और मोटा हो गया था। तो मनीषा भी चूतड़ उछाल-उछाल कर अपनी हवस मिटाने में लीन थी। लेकिन मैं उसको करीब 10 मिनट चोद कर हांफने लगा और फिर लंड ने वीर्य निकाल दिया और हम दोनों अलग हो गए।
और फिर पहले राउंड के बाद समय देखा तो अभी ट्रेन जयपुर पहुचने में 1 घंटा और है. इसलिए मनीषा बोली- यार तुम कैसे लड़के हो मैंने इससे पहले बहुत लडकों से चुदाई करवाई है लेकिन सभी बस अपना पानी निकालने में लगे रहते है. मेरे पानी के बारें में कोई नही सोचता.
लेकिन जो तुमने आज मुझे इस तरीके से चोदा है इसे हमेशा याद रखा जाएगा. अभी 1 घंटा और है क्या हम फिर से चुदाई कर सकते है?
इसके बाद दोस्तों मेरा तो मानो जोश काफी हाई लेवल का हो चूका था. और तुरंत मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया और मनीषा को फिर से पेलने लगा. इस बार मनीषा को दोस्तों मैंने करीब आधे घंटे तक ढंग से चोदा. फिर अंत में हमने अपने अपने कपड़े पहन लिए और एक दुसरे के नम्बर शेयर कर लिए.
अब दोस्तों हम हमेशा फोन पर बातें करते है और जब भी मनीषा को चुदवाना होता है तो मेरे शहर की होटल में आ जाती है. और कभी वो अपने शहर में मेरे लिए होटल बुक कर देती है.
लेकिन दोस्तों देखों सीट देने पर कोई चूत देदे ये मैंने कभी सोचा नही था. इसलिए आप भी किसी लड़की की ट्रेन में मदद किया करो क्या पता आपको भी चूत मिल जाए.
दोस्तों ये Train Me Chudai Kahani आप हमारी वेबसाइट gandistory.com/ पर पढ़ रहे है। उम्मीद है आपको यह Train me chudai ki kahani बहुत पसंद आई होगी। चलिए, जल्द ही मिलते है अपनी अगली कहानी के साथ। अगर आपको मेरी Gandi Story पसंद आई है तो प्लीज् कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं।