Mama Bhanji Sex Story – सील पैक भांजी को पत्नी के सामने जवानी का स्वाद चखाया
हेल्लो दोस्तों, मेरा नाम मनीष है और मेरी उम्र 35 साल की है। आज के इस Rishton me chudai story के एपिसोड के अंदर मैं आपको मेरी सच्ची कहानी (mama bhanji sex story) के बारें में बताऊंगा। दरअसल दोस्तों मेरी शादी हो चुकी है। और मेरी पत्नी का नाम मीनाक्षी है। मेरे एक बेटा भी है जो अभी महज 3 साल का है।
चलिए आपको अब ज्यादा देर न करते हुए मेरी mama bhanji sex kahani कहानी के बारें में बताता हूँ. एक बार शीतकालीन छुट्टियों के दौरान मेरी भांजी नीतू मेरे घर आई हुई थी। मेरी भांजी की उम्र लगभग 16 की थी। वैसे आपको बता दूँ की नीतू देखने में बेहद आकर्षक थी। मैंने पहले कभी उसे इस नजर से नहीं देखा था।
लेकिन इस बार मैंने नोटिस किया कि नीतू उससे बहुत अधिक बातें कर रही थी। जब मैं और मेरी पत्नी मीनाक्षी आपस में बातें कर रहे थे, तो नीतू बार-बार मेरी तरफ देख कर मुस्कुराती रहती थी।
तो हुआ ये की सर्दियों के दिन थे। एक शाम मैं, मीनाक्षी और नीतू साथ बैठे बातें कर रहे थे। तीनों एक ही बिस्तर पर बैठे थे और अपने पैरों पर कंबल डाला हुआ था। अचानक मेरा पैर गलती से नीतू की टांगों के बीच चला गया और उसकी टांगों से टकराने लगा। पहले तो मैंने सोचा कि यह मीनाक्षी का पैर है, लेकिन कुछ देर बाद उसे एहसास हुआ कि उसका पैर नीतू की टांगों से टकरा रहा था।
नीतू ने इस पर कोई विरोध नहीं किया, बल्कि उसने अपनी जांघ मेरे पैर पर और सटा दी। इसके बाद दोस्तों मेरा मन अब नीतू के प्रति बदलने लगा। मैंने अपने पैर से नीतू की जांघ को हल्के-हल्के सहलाना शुरू किया। नीतू ने मेरी तरफ देख कर हल्की मुस्कान दी, जिससे मेरा आत्मविश्वास और बढ़ गया।
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फिर कुछ देर बाद, सभी सोने की तैयारी करने लगे। मीनाक्षी अपने बेटे लोकेश के पास लेट गई। भांजी नीतू का बिस्तर अलग था। तो मैंने मजाक में कहा, “यार, सर्दी बहुत ज्यादा है… कोई हमें भी पास सुला लो।”
इसके बाद मीनाक्षी ने हंसते हुए जवाब दिया, “मैं तो नहीं, अपनी भांजी से पूछ लो।”
फिर भांजी नीतू ने तुरंत जवाब दिया, “मामाजी, मैं कब मना कर रही हूं? आपको सोना ही तो है, कहीं भी सो जाओ… मेरे पास आ जाओ।”
मेरे को और कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ी। मैं तुरंत नीतू के बेड पर चला गया और उसके साथ लेट गया। लेटते ही उसने कमरे की लाइट बंद कर दी। मेरी पत्नी को अब डाउट हो चूका था की हमारे बीच कुछ चलने वाला है।
करीब 10-15 मिनट के बाद, मेरे को लगा कि भांजी नीतू सो चुकी है। फिर मैं धीरे-धीरे नीतू के पास सट गया। इतना करते ही मेरा लंड खड़ा हो चुका था और नीतू के चूतड़ों की दरार से टकरा रहा था। हालाँकि नीतू ने कोई विरोध नहीं किया।
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मैंने धीरे-धीरे अपना हाथ आगे बढ़ाकर नीतू के मम्मों पर रखा। जैसे ही मैंने महसूस किया, नीतू के मम्मे गोल और उभरे हुए थे। कोई विरोध न होते देख मेरा हौसला और बढ़ गया। फिर इसके बाद मैंने अपना हाथ नीतू के सूट के अंदर डाल दिया और नंगे मम्मों को सहलाने लगा।
भांजी नीतू अब भी चुपचाप लेटी हुई थी। फिर मैंने उसे धीरे से सीधा कर लिया। नीतू अब सीधी लेटी हुई थी। फिर मैंने उसके सूट को ऊपर की तरफ सरकाया और उसके दोनों मम्मे पूरी तरह नंगे कर दिए।
फिर मैंने अपने होंठ नीतू के एक मम्मे पर रखे और उसे अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। इतना करते ही भांजी नीतू की सांसें तेज हो रही थीं, और मेरे को समझ आ गया कि वह जाग रही है और पूरा मजा ले रही है।
कुछ देर मम्मे चूसने के बाद, मैंने अपना एक हाथ नीतू की सलवार में डाल दिया। मैंने महसूस किया कि नीतू की चूत पहले से ही भीगी हुई थी। यह देख मैं समझ गया कि नीतू पूरी तरह तैयार है।
लेकिन दोस्तों मुझे डर लग रहा था की, नीतू अभी कुंवारी है, यहां पूरी चुदाई करना ठीक नहीं होगा। इसलिए मैंने धीरे-धीरे नीतू के कान में फुसफुसाते हुए कहा, “चलो बगल वाले कमरे में चलते हैं।”
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नीतू ने तुरंत मेरी बात मानी और उठकर दूसरे कमरे में चली गई। मैं भी उसके पीछे-पीछे वहां पहुंच गया। दूसरे कमरे में पहुंचते ही मैंने बिस्तर नीचे लगाया। इसके बाद उसने नीतू को बिस्तर पर लिटा दिया।
नीतू और मैंने अपने-अपने कपड़े उतार दिए और दोनों पूरी तरह नंगे हो गए। मेरी नजर नीतू के नंगे शरीर पर पड़ी, तो मैं खुद को रोक नहीं सका। नीतू के मम्मे गोल और कसे हुए थे, और उसकी चूत फूली हुई और उभरी हुई थी। इससे मेरा एक्साइटमेंट और बढ़ गया।
और मैंने नीतू को चित लिटाकर उसके मम्मों को फिर से अपने मुँह में लिया और चूसना शुरू कर दिया। नीतू हल्की-हल्की मादक सिसकारियां भरने लगी। मेंने उससे पूछा, “कैसा लग रहा है?” नीतू ने धीरे से जवाब दिया, “मामा जी, बहुत मजा आ रहा है… आगे करो ना कुछ।”
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फिर दोस्तों मैंने धीरे-धीरे नीतू की टांगों को फैलाया और उसकी चूत को ध्यान से देखा। चूत पूरी तरह से भीगी हुई थी। फिर मैंने अपनी दो उंगलियों से नीतू की चूत की दरार को थोड़ा और फैलाया और उसकी चूत पर अपनी जीभ लगाई।
नीतू ने तुरंत प्रतिक्रिया दी और उछल पड़ी। फिर मैंने उसकी चूत को गहराई तक अपनी जीभ से चाटना शुरू कर दिया। अब नीतू की सिसकारियां और तेज हो गईं। वह अपनी कमर उछाल-उछाल कर और अधिक मजा ले रही थी। इसके कुछ देर बाद, नीतू ने कहा, “मामा जी, अब मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा… जल्दी कुछ करो!”
नीतू की बात सुनकर मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “पहले मेरे लंड को तो चाटो, मेरी प्यारी भांजी।”
फिर भांजी नीतू ने बिना किसी झिझक के अमित का लंड अपने मुँह में ले लिया और उसे चूसने लगी। वह आइसक्रीम की तरह लंड को चाट रही थी। हालंकि मेरा लंड पहले ही भीग चुका था, लेकिन नीतू उसे पूरी तरह साफ कर रही थी।
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करीब 5 मिनट तक चूसने के बाद नीतू ने लंड को मुँह से निकाला और कहा, “मामा जी, बहुत मोटा है… मेरा मुँह दुख रहा है। अब नीचे कुछ करो ना प्लीज।”
फिर मैंने नीतू को सीधा लिटाया और उसकी टांगों को चौड़ा कर दिया। फिर मैंने अपनी उंगलियों से नीतू की चूत की दरार को फैलाया और अपने लंड के सुपारे को चूत के मुँह पर सेट किया। फिर मैंने हल्के से धक्का दिया, और लंड का सुपारा नीतू की चूत के अंदर चला गया।
मैंने नीतू से पूछा, “दर्द हो रहा है?”
नीतू ने कहा, “थोड़ा सा दर्द है, मामा जी, लेकिन कोई बात नही चलेगा आगे करो कुछ।”
मैंने उसे समझाया, “थोड़ा दर्द होगा, लेकिन उसके बाद बहुत मजा आएगा। बस तुम चीखना मत।” नीतू ने सहमति में सिर हिला दिया।
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इसके बाद मैंने उसके मम्मे को चूसना शुरू किया और धीरे-धीरे अपना लंड और अंदर डालने लगा। लंड का आधा हिस्सा नीतू की चूत में समा चुका था। उसे हल्का दर्द हो रहा था, लेकिन मैंने अपनी गति धीमी रखी ताकि रीना को ज्यादा तकलीफ न हो।
जब यह सब दो चार मिनट चला फिर धीरे-धीरे नीतू का दर्द कम हो गया, और वह अपनी कमर उछालने लगी। फिर मैंने अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए लंड को पूरी तरह बाहर खींचा और एक जोरदार धक्का मारा। इस बार उसका लंड पूरी तरह नीतू की चूत में समा गया।
नीतू के मुँह से हल्की सी कराह निकली, लेकिन मैंने तुरंत उसके होंठों को अपने होंठों से दबा लिया। फिर मैंने नीतू की चूत में अपना लंड फंसा कर कुछ देर तक उसके ऊपर लेटे रहने का फैसला किया। इस दौरान मैं उसके मम्मों को बार-बार अपने मुँह में लेकर चूस रहा था। धीरे-धीरे नीतू भी सामान्य हो गई। फिर मैंने ने तब अपने लंड को हल्के-हल्के अंदर-बाहर करना शुरू किया।
नीतू की मादक सिसकारियां अब साफ सुनाई देने लगीं। अब मैं समझ चुका था कि अब नीतू दर्द से बाहर आ चुकी है और चुदाई का पूरा मजा ले रही है। उसने अपनी गति तेज कर दी और जोरदार चुदाई करने लगा।
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नीतू की प्रतिक्रिया ने मेरे को और अधिक उत्तेजित कर दिया। फिर मैंने एक बार अपने लंड को चूत से बाहर खींचा और देखा कि मेरे लंड पर हल्का-हल्का खून लगा हुआ था। मैंने तुरंत अपने लंड को साफ किया और नीतू की चूत को भी साफ किया। इसके बाद मैंने फिर से अपना लंड नीतू की चूत में डाल दिया और चुदाई शुरू कर दी।
अब मैं पूरी तरह से नीतू के साथ चुदाई का आनंद ले रहा था। मेरी गति तेज हो चुकी थी, और नीतू की सिसकारियां कमरे में गूंज रही थीं। मैंने ने धीरे से पूछा, “कैसा लग रहा है, नीतू?”
नीतू ने अपनी सिसकारी के बीच कहा, “मामा जी, बहुत मजा आ रहा है। और जोर से करो।”
मैंने नीतू की ये बात सुनकर अपनी गति और तेज कर दी। और मैं पूरी तरह से नीतू की चूत में खो गया था। फिर मैंने महसूस किया कि नीतू अब पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी है और चुदाई का पूरा आनंद ले रही है।
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कुछ देर बाद, नीतू ने मुझसे कहा, “मामा जी, मेरे शरीर में अजीब सी ऐंठन हो रही है। मुझे कुछ हो रहा है।” मैं समझ गया कि नीतू अब झड़ने वाली है।
तभी नीतू ने मेरे को कसकर जकड़ लिया और कामुक आवाज में कहने लगी, “उम्म्ह … अहह … हय … ओह … मामाजी … जोर से चुदाई करो … और जोर से चोदो … मुझे कुछ-कुछ हो रहा है … आह, मैं कट सी गई … नीचे कुछ हो रहा है मामाजी … प्लीज प्लीज …”
फिर इसके कुछ ही देर में नीतू शांत पड़ गई। मैं समझ गया कि वह झड़ चुकी थी। इसके बाद मैंने अपने लंड को नीतू की चूत से बाहर निकाल लिया। इस प्रकार उस रात को मैं ऐसे mama bhanji ki chudai कहानी का हिस्सा बना।
फिर अगले दिन अब नीतू को तो मानो लत सी लग गयी थी. नीतू फिर से उसी कमरे में आ गई। उसने मेरे को बोला मामाजी कल रात वाला मजा फिर से लेते है। इतना सुनते ही मैं फिर से एक्साइटेड और मैं फिर से नीतू को पेल दिया। दोस्तों ये सिलसिला अब तक चल रहा है। और जब भी मौका मिलता है नीतू मेरे पास आ जाती है। और हम दोनों मजे से चुदाई करते है।
अगर आपको दोस्तों मेरी ये mama bhanji ki chudai ki kahani पसंद आई है तो आप कमेंट बॉक्स में अपना अनुभव साँझा कर सकते है। मिलता हूँ आपसे मेरी एक और rishton me chudai story के साथ।