Humbistari Ki Dua: जाने Tarika और Ghusl Ki Dua की पूरी जानकारी
इस्लाम में हमबिस्तरी यानी पति-पत्नी का शारीरिक संबंध केवल एक शारीरिक क्रिया नहीं बल्कि एक इबादत की तरह है। हमबिस्तर का अर्थ है पति-पत्नी का एक बिस्तर पर साथ होना यानी दाम्पत्य संबंध। इस्लाम ने इस रिश्ते को बेहद पवित्र, सम्मानजनक और बरकत वाला बनाया है। इसमें दोनों की रज़ामंदी, प्यार और अल्लाह की रज़ा सबसे जरूरी है। इस लेख में हम आपको humbistari ki dua, humbistari ka tarika, humbistari ke baad ghusl ki dua और रोज़े की हालत से जुड़े जरूरी मसाइल की पूरी जानकारी देंगे।
हमबिस्तर का अर्थ क्या है?
हमबिस्तर का अर्थ अरबी और उर्दू भाषा से लिया गया है। “हम” यानी साथ और “बिस्तर” यानी सेज — यानी पति-पत्नी का एक साथ बिस्तर पर होना। इस्लाम में इसे निकाह के बाद हलाल और पवित्र करार दिया गया है। यह पति-पत्नी के बीच प्रेम, विश्वास और पवित्रता का जरिया है। इस्लामिक शरीअत में हमबिस्तरी को इबादत का दर्जा दिया गया है बशर्ते इसे सही तरीके और दुआ के साथ किया जाए।
Humbistari Ki Dua (हमबिस्तरी से पहले की दुआ)
इस्लाम में humbistari karne ki dua पढ़ना बेहद जरूरी है। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि हमबिस्तरी से पहले यह दुआ जरूर पढ़नी चाहिए:
दुआ (अरबी):
بِسْمِ اللهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنَا الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
हिंदी उच्चारण:
“बिस्मिल्लाहि अल्लाहुम्मा जन्निबनश् शैताना व जन्निबिश् शैताना मा रज़कतना”
अर्थ:
“अल्लाह के नाम से — ऐ अल्लाह! हम से शैतान मरदूद को दूर कर और उस औलाद से भी शैतान को दूर रख जो तू हमें अता करे।”
इस humbistari ki dua की बरकत यह है कि अगर अल्लाह तआला उस जोड़े को औलाद अता फरमाए तो शैतान उस बच्चे को कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकता। इसलिए यह दुआ हर मियां-बीवी को हमबिस्तरी से पहले जरूर पढ़नी चाहिए।
Humbistari Ka Tarika (इस्लामिक तरीका)
इस्लाम ने humbistari ka tarika बहुत ही मर्यादित और पवित्र तरीके से बताया है। नीचे दिए गए आदाब का पालन करना जरूरी है:
1. खुले दिल से बात करें: हमबिस्तरी से पहले मियां-बीवी को एक-दूसरे के साथ प्यार और सम्मान से पेश आना चाहिए। यह एक रूहानी और जज़्बाती रिश्ता है इसलिए इसमें किसी तरह की ज़बरदस्ती नहीं होनी चाहिए।
2. पाकीज़गी का ख्याल रखें: Biwi se humbistari ka tarika यह है कि हमबिस्तरी से पहले मियां-बीवी दोनों को पाक होना चाहिए। खुशबू का इस्तेमाल करना सुन्नत है।
3. तन्हाई का एहतिराम करें: हमबिस्तरी हमेशा ऐसी जगह पर होनी चाहिए जहां कोई तीसरा शख्स न देख सके। पर्दे और एकांत का पूरा ख्याल रखें।
4. बातचीत करना: हमबिस्तरी के दौरान बातचीत में कोई हर्ज नहीं लेकिन शर्म और हया के खिलाफ बातों से बचना बेहतर है।
5. एक-दूसरे की खुशी का ख्याल रखें: इस्लाम में humbistari ka tarika यह है कि दोनों की रज़ामंदी और खुशी सबसे पहले हो। किसी एक की नाराजगी में यह रिश्ता मकरूह हो जाता है।
6. वज़ू करना: नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि अगर दोबारा हमबिस्तरी करनी हो तो पहले वज़ू कर लेना चाहिए।
Humbistari Ke Baad Ghusl Ki Dua
हमबिस्तरी के बाद गुस्ल यानी पूरे बदन को पाक पानी से धोना फर्ज़ है। इसे जनाबत की हालत कहते हैं। Humbistari ke baad ghusl ki dua यानी गुस्ल की नियत इस प्रकार है:
नियत:
“नवैतु अं अग्तासिल मिन गुस्ली लिरफालिल हदसी”
अर्थ:
“नियत की मैंने गुस्ल की, नापाकी को दूर करने और पाक होने के लिए।”
गुस्ल का सही तरीका यह है कि पहले नियत करें, फिर बिस्मिल्लाह पढ़कर पूरे बदन पर पानी बहाएं। सिर से लेकर पैर तक हर हिस्से पर पानी पहुंचाना जरूरी है। Humbistari ke baad ki dua और गुस्ल के बिना नमाज़ अदा करना जायज नहीं है इसलिए जल्द से जल्द पाक हो लेना चाहिए।
Humbistari Ke Baad Ki Dua
गुस्ल के बाद पाक होने पर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए। Humbistari ke baad ki dua के तौर पर यह पढ़ें:
“अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अज़हब अन्निल अज़ा व आफ़ानी”
अर्थ:
“तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझसे तकलीफ दूर की और मुझे आफियत दी।”
Roze Ki Halat Me Humbistari Kar Sakte Hai Kya?
यह सवाल बहुत से मुसलमानों के मन में आता है कि roze ki halat me humbistari kar sakte hai kya? इस्लामिक जानकारों के अनुसार इसका जवाब बिल्कुल स्पष्ट है।
रोज़े के दौरान यानी फज्र से लेकर मगरिब तक हमबिस्तरी करना सख्त मना है। इस वक्त खाने-पीने के साथ-साथ शारीरिक संबंध से भी परहेज़ करना फर्ज़ है। अगर कोई जानबूझकर रोज़े की हालत में हमबिस्तरी करता है तो:
| स्थिति | नतीजा |
|---|---|
| रोज़ा | टूट जाता है |
| कज़ा | उस रोज़े की कज़ा करनी होगी |
| कफ्फारा | गंभीर मामलों में कफ्फारा भी देना पड़ सकता है |
इसलिए रोज़ेदार मियां-बीवी को इफ्तार के बाद और सेहरी से पहले के वक्त में ही हमबिस्तरी करनी चाहिए। रोज़े की हालत में खुद को संयमित रखें और पहले बीवी से प्यार-मुहब्बत की बातें करें और बोस व किनार से उसे राज़ी करें — लेकिन हमबिस्तरी रोज़ा खुलने के बाद ही करें।
निष्कर्ष
इस्लाम में हमबिस्तरी एक पाक और बरकत वाला अमल है बशर्ते इसे सही humbistari ka tarika और humbistari ki dua के साथ किया जाए। हमबिस्तरी से पहले दुआ पढ़ना, पाकीज़गी का ख्याल रखना और बाद में गुस्ल करना — यह सब मिलकर इस रिश्ते को इबादत बना देते हैं। Roze ki halat me humbistari से बचना हर मुसलमान पर फर्ज़ है। अल्लाह तआला हम सभी को दीन के मुताबिक ज़िंदगी गुज़ारने की तौफीक दे। आमीन।